विशेष छूट वाली दवाओं पर सख्ती, ‘बिल टू-शिप्ड टू’ में खेल बंद
लखनऊ (Lucknow), 24 सितंबर। नकली, काउंटरफिट और अधोमानक दवाओं की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने के साथ आमजन को उचित मूल्य पर गुणवत्तापरक दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने विशेष छूट वाली संस्थागत दवाओं की आपूर्ति को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। नए निर्देशों में दवाओं की बिलिंग और वास्तविक आपूर्ति के बीच पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया गया है। इसके तहत कंपनी, सीएंडएफ एजेंट, सुपर डिस्ट्रीब्यूटर और स्टॉकिस्ट को उसी चिकित्सक या संस्थान के नाम पर बिलिंग करनी होगी, जहां वास्तव में दवा की आपूर्ति की जानी है।
विशेष छूट वाली दवाओं के डायवर्जन पर रोक:
विभाग के संज्ञान में आया कि कई औषधि निर्माता और विपणनकर्ता कंपनियां अपने सीएंडएफ एजेंट, सुपर डिस्ट्रीब्यूटर अथवा स्टॉकिस्ट के माध्यम से चिकित्सकों और अस्पतालों या नर्सिंग होम को विशेष छूट प्रदान करती हैं। कुछ मामलों में दवाओं की बिलिंग संबंधित चिकित्सक, अस्पताल या नर्सिंग होम के नाम पर करने के बजाय स्टॉकिस्ट के नाम पर की जाती है।
इसके बाद स्टॉकिस्ट द्वारा बिल में बताए गए चिकित्सक, अस्पताल या नर्सिंग होम के स्थान पर किसी दूसरे औषधि विक्रेता या फर्म को दवाओं की आपूर्ति कर दी जाती है। विभाग ने ऐसी व्यवस्था को दवाओं के अनधिकृत डायवर्जन की स्थिति पैदा करने वाला माना है और इसे रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
कम कीमत पर बिक्री से बाजार पर असर:
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की आयुक्त रोशन जैकब (Roshan Jacob) द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि विशेष छूट पर प्राप्त दवाओं को अन्य थोक विक्रेताओं की तुलना में कम कीमत पर बेचने से संबंधित स्टॉकिस्ट की बिक्री बढ़ सकती है। इससे बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के सिद्धांत पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
विभाग के अनुसार स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब विशेष छूट अथवा सस्ती दवाओं की आड़ में फर्जी बिल तैयार कर नकली और काउंटरफिट दवाओं की बिक्री की जाती है। नकली और अधोमानक औषधियों के खिलाफ चलाए गए विभागीय अभियान के दौरान ऐसी गतिविधियां सामने आने का उल्लेख किया गया है।
बिल और आपूर्ति एक ही संस्थान के नाम पर:
नए निर्देशों के अनुसार कंपनी, सीएंडएफ एजेंट, सुपर डिस्ट्रीब्यूटर और स्टॉकिस्ट को यह सुनिश्चित करना होगा कि दवा की बिलिंग उसी चिकित्सक अथवा संस्थान के नाम पर हो, जिसे वास्तव में दवा की आपूर्ति की जानी है। इससे बिलिंग और दवा की वास्तविक आपूर्ति के बीच अंतर की संभावना को कम करने पर जोर दिया गया है।
इसके साथ ही बिक्री बिल में ‘बिल टू’ और ‘शिप्ड टू’ के रूप में अलग-अलग परिसरों को दर्ज करने की व्यवस्था का दुरुपयोग रोकना होगा। जिस चिकित्सक या संस्थान के नाम पर बिल तैयार किया गया है, दवा की आपूर्ति भी उसी निर्धारित स्थान पर करनी होगी।
पैकिंग पर लिखना होगा ‘इंस्टीट्यूशनल सप्लाई’:
विशेष छूट पर संस्थागत आपूर्ति के लिए दी जाने वाली दवाओं के डायवर्जन और दुरुपयोग को रोकने के लिए उनके लेबल और पैकिंग पर निर्माणकर्ता फर्म अथवा सीएफए की ओर से स्पष्ट रूप से ‘इंस्टीट्यूशनल सप्लाई’ अंकित करना अनिवार्य होगा।
इस व्यवस्था के तहत संबंधित दवा की पहचान संस्थागत आपूर्ति के रूप में आसानी से की जा सकेगी। विभाग का उद्देश्य ऐसी दवाओं को सामान्य बाजार में अनधिकृत तरीके से पहुंचने से रोकना है।
शेड्यूल एच, एच1 और एक्स दवाओं पर भी सख्ती:
औषधि नियमावली के प्रावधानों के तहत चिकित्सकीय परामर्श पर विक्रय की जाने वाली शेड्यूल एच, एच1 और एक्स श्रेणी की दवाओं की आपूर्ति के संबंध में भी निर्देश जारी किए गए हैं। इन दवाओं की आपूर्ति पंजीकृत चिकित्सक, अस्पताल, डिस्पेंसरी और नर्सिंग होम को उनके लिखित एवं हस्ताक्षरित क्रय आदेश के आधार पर ही की जाएगी।
संबंधित क्रय आदेश की प्रति को कम से कम दो वर्ष तक सुरक्षित रखना भी अनिवार्य होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य दवाओं की आपूर्ति से जुड़े अभिलेखों को सुरक्षित रखना और जरूरत पड़ने पर उनकी जांच को संभव बनाना है।
अनधिकृत आपूर्ति पर कानूनी कार्रवाई:
विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी फर्म द्वारा औषधियों की अनधिकृत आपूर्ति किए जाने की स्थिति में औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और उससे संबंधित नियमावली के तहत कार्रवाई की जाएगी।
विभाग ने सभी संबंधित कंपनियों, सीएंडएफ एजेंटों, सुपर डिस्ट्रीब्यूटरों, स्टॉकिस्टों और औषधि विक्रेताओं को जारी निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
उचित मूल्य पर गुणवत्तापरक दवाओं पर जोर:
विभाग के अनुसार औषधि एक आवश्यक वस्तु है। ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर, 2013 को आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1956 के साथ पढ़ते हुए आमजन के लिए दवाओं की उपलब्धता सुलभ बनाए रखना आवश्यक है।
इसी उद्देश्य से विशेष छूट वाली दवाओं की बिक्री में पारदर्शिता, आपूर्ति की सही पहचान और अनधिकृत डायवर्जन पर रोक लगाने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है। विभाग ने संबंधित सभी पक्षों से निर्देशों का पालन करने और दवाओं की आपूर्ति प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है।
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