गाजीपुर (Ghazipur) में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर (Veer Bahadur Singh Purvanchal University, Jaunpur) की पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी और सत्रों के पिछड़ने को लेकर छात्रों में नाराजगी है। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कथित अनदेखी के खिलाफ आवाज उठाते हुए जिलाधिकारी के प्रतिनिधि सदर तहसीलदार राजीव यादव को कुलपति के नाम संबोधित मांग पत्रक सौंपा। छात्रों ने मांग की कि उनकी समस्याओं से कुलपति को तत्काल अवगत कराते हुए प्रवेश प्रक्रिया को जल्द शुरू कराया जाए।
कुलपति के नाम सौंपा मांग पत्रक:
छात्र प्रतिनिधिमंडल ने सदर तहसीलदार राजीव यादव के कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। छात्रों का कहना है कि पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में लगातार देरी होने के कारण गाजीपुर जिले के हजारों शोध इच्छुक अभ्यर्थियों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने मांग की कि उनकी समस्या को विश्वविद्यालय के सक्षम अधिकारियों और कुलपति तक तत्काल पहुंचाया जाए।
ज्ञापन स्वीकार करते हुए सदर तहसीलदार राजीव यादव ने छात्रों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों का पत्रक सक्षम प्राधिकारी और कुलपति को भेजा जाएगा। छात्रों ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस मामले में जल्द आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

चार वर्षों में दो बार हुई प्रवेश परीक्षा का दावा:
ज्ञापन में छात्रों ने कहा कि यूजीसी (UGC) और शासन के निर्देशों के बावजूद पिछले चार वर्षों के दौरान विश्वविद्यालय में केवल दो बार पीएचडी प्रवेश परीक्षा यानी पीयूसीआरईटी (PUCRET) कराई जा सकी है। छात्रों के अनुसार, इस देरी के चलते वर्ष 2023 और 2025 का सत्र शून्य हो गया। सितंबर का महीना बीतने को है, लेकिन सत्र 2026-27 के लिए अब तक आवेदन प्रक्रिया शुरू नहीं होने की बात छात्रों ने कही है।
पूर्व छात्र संघ उपाध्यक्ष दीपक उपाध्याय ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की कथित लापरवाही से हजारों मेधावी छात्रों का शैक्षणिक और शोध भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की ओर से वर्ष में दो बार पीएचडी प्रवेश कराने की बात कही जाती है, लेकिन छात्रों के अनुसार प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो पा रही है। उन्होंने नए कुलपति से मामले में कार्रवाई की उम्मीद जताते हुए सत्र 2026-27 का नोटिफिकेशन तत्काल जारी करने की मांग की।
एक महीने में प्रक्रिया शुरू करने की मांग:
छात्र नेता प्रद्युम्न सिंह यादव ‘राजन’ ने कहा कि सरकार की ओर से शैक्षणिक सत्रों को नियमित करने पर जोर दिया जा रहा है, जबकि पूर्वांचल विश्वविद्यालय में एक प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने में लंबा समय लग रहा है। उन्होंने कहा कि यदि एक महीने के भीतर विश्वविद्यालय प्रशासन स्पष्ट अकादमिक कैलेंडर जारी कर प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं करता है तो छात्र लोकतांत्रिक और गांधीवादी तरीके से धरना-प्रदर्शन व आंदोलन करेंगे।
छात्र किशन विश्वकर्मा ने कहा कि वर्ष 2022 से 2026 के बीच केवल दो बार प्रवेश परीक्षा होने से विश्वविद्यालय की व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि 2023 और 2025 के सत्र शून्य होने से पीजी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के कई साल प्रभावित हुए हैं। छात्रों ने फॉर्म भरने से लेकर परीक्षा, साक्षात्कार, डीआरसी/आरडीसी (DRC/RDC) और शोध निर्देशक आवंटन तक की समय सीमा तय करने की मांग की।
चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी:
छात्र आकाश चौधरी ने कहा कि यह अभ्यर्थियों के अधिकारों से जुड़ा मामला है। उन्होंने बताया कि ज्ञापन की प्रतिलिपि राज्यपाल और कुलाधिपति, उच्च शिक्षा मंत्री, यूजीसी सचिव और कुलसचिव को भी भेजी गई है। छात्रों ने कहा कि यदि प्रवेश प्रक्रिया में देरी जारी रही तो विश्वविद्यालय मुख्यालय तक चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
छात्रों ने सत्र 2026-27 की पीएचडी प्रवेश परीक्षा की विज्ञप्ति तत्काल जारी करने, फॉर्म, परीक्षा, साक्षात्कार और शोध निर्देशक आवंटन के लिए निश्चित अकादमिक कैलेंडर घोषित करने तथा वर्ष में दो बार प्रवेश परीक्षा कराने की नीति को लागू करने की मांग रखी।
ज्ञापन देने वालों में ये छात्र रहे शामिल:
मांग पत्रक सौंपने वालों में पूर्व छात्र संघ उपाध्यक्ष दीपक उपाध्याय, प्रद्युम्न सिंह यादव ‘राजन’, आकाश चौधरी, किशन विश्वकर्मा, संजीद कुमार और अभिषेक गुप्ता सहित अन्य छात्र मौजूद रहे। छात्रों ने कहा कि पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में समयबद्धता सुनिश्चित होने से शोध के इच्छुक अभ्यर्थियों को अपने शैक्षणिक भविष्य को लेकर अनिश्चितता से राहत मिल सकेगी।
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