बाएं की जगह दाहिने घुटने का ऑपरेशन कर दिया:लखनऊ के हेल्थ सिटी हॉस्पिटल के डॉक्टर की करतूत, गलती पूछने पर धमकाया
लखनऊ के हेल्थ सिटी हॉस्पिटल (Health City Hospital) में 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला के गलत पैर का ऑपरेशन किए जाने का मामला सामने आया है। राजाजीपुरम निवासी राजेश्वरी के परिजनों का आरोप है कि उनके बाएं घुटने में परेशानी थी, लेकिन अस्पताल में बाएं की जगह दाहिने घुटने का ऑपरेशन कर दिया गया। परिजनों के मुताबिक, ऑपरेशन के बाद महिला की समस्या दूर होने के बजाय अब दोनों पैरों से चलने में परेशानी हो रही है। मामले में महिला के बेटे मनोज कुमार ने डॉक्टर और अस्पताल के खिलाफ गोमतीनगर थाने में शिकायत दी है। परिवार का कहना है कि शिकायत के बावजूद अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है।
बाएं घुटने की परेशानी के लिए कराया था भर्ती:
परिजनों के अनुसार, राजेश्वरी को बढ़ती उम्र के कारण बाएं घुटने के आसपास परेशानी थी। इसी समस्या के उपचार के लिए उन्हें 8 सितंबर को आद्या हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिवार का कहना है कि वहां डॉ. सीपी गुप्ता ने इलाज के लिए 70 हजार रुपये और आयुष्मान कार्ड जमा कराया। इसके बाद उन्हें बताया गया कि बेहतर इलाज के लिए महिला को हेल्थ सिटी हॉस्पिटल ले जाया जाएगा।
परिवार के मुताबिक, 9 सितंबर को महिला को हेल्थ सिटी हॉस्पिटल ले जाया गया। वहां भी डॉ. सीपी गुप्ता के बैठने की बात परिजनों ने बताई है। बाद में ऑपरेशन किया गया। हालांकि, परिवार का आरोप है कि जिस बाएं घुटने में समस्या थी, उसकी जगह दाहिने घुटने का ऑपरेशन कर दिया गया।
ऑपरेशन के बाद भी बाएं घुटने की समस्या बरकरार:
पीड़ित महिला के नाती आयुष के मुताबिक, उनकी नानी को बाएं घुटने के ऑपरेशन के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार को सर्जरी में अधिक खर्च आने की बात बताई गई और आयुष्मान कार्ड के माध्यम से इलाज के लिए उन्हें हेल्थ सिटी हॉस्पिटल में स्थानांतरित किया गया।
आयुष का कहना है कि 11 सितंबर की शाम डॉ. सीपी गुप्ता ने महिला का ऑपरेशन किया। परिवार का आरोप है कि सर्जरी बाएं घुटने में होनी थी, लेकिन डॉक्टर ने दाहिने घुटने का ऑपरेशन कर दिया। 14 सितंबर को महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। परिवार के मुताबिक, इलाज के दौरान 70 हजार रुपये नकद जमा कराए गए, जबकि करीब 2.50 लाख रुपये का भुगतान आयुष्मान कार्ड के माध्यम से हुआ।
परिजनों ने पुलिस और स्वास्थ्य विभाग से की शिकायत:
परिजनों के अनुसार, अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद 14 सितंबर को ही गोमतीनगर थाने में मामले की शिकायत देकर प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की गई, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई। इसके बाद 16 सितंबर को मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में भी शिकायत दी गई। परिवार का कहना है कि वहां से भी उन्हें तत्काल राहत नहीं मिली।
इसके बाद परिजनों ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक (Brajesh Pathak) के यहां भी शिकायत की है। परिवार मामले की जांच और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग कर रहा है।
शिकायत में ऑपरेशन थिएटर का भी जिक्र:
महिला के बेटे मनोज कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि उनकी मां को आनन-फानन में ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया। वहां दाहिने घुटने के ऑपरेशन की तैयारी की जाने लगी। शिकायत के मुताबिक, इस दौरान महिला ने डॉक्टरों से कहा कि परेशानी उनके बाएं घुटने में है, इसलिए उसी घुटने का इलाज किया जाए।
परिजनों का आरोप है कि महिला ने ऑपरेशन थिएटर में मौजूद लोगों से घरवालों को बुलाने की बात भी कही, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई। शिकायत के अनुसार, इसके बाद उन्हें बेहोशी का इंजेक्शन दिया गया। ऑपरेशन पूरा होने के बाद परिवार को जानकारी हुई कि जिस घुटने में समस्या नहीं थी, उसी का ऑपरेशन कर दिया गया है।
परिजनों के बनाए वीडियो भी सामने आए:
मामले से जुड़े कुछ वीडियो भी सामने आए हैं, जिन्हें पीड़ित महिला के परिजनों द्वारा रिकॉर्ड किया गया बताया जा रहा है। एक वीडियो में परिजन शिकायत करते हुए दिखाई दे रहे हैं और डॉक्टर पर कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगा रहे हैं।
एक अन्य वीडियो में डॉक्टर को यह कहते हुए सुना जा रहा है कि अस्पताल के लोग डॉक्टर को परेशान कर रहे हैं और इसे गैर-जमानती अपराध बताया जा रहा है। एक अन्य वीडियो में परिजन पुलिस को फोन करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसमें गलत ऑपरेशन किए जाने और कथित तौर पर गाली-गलौज किए जाने की शिकायत की जा रही है।
एक वीडियो में राजेश्वरी अस्पताल के बिस्तर पर बैठी दिखाई दे रही हैं। परिवार के लोग उनसे परेशानी वाले पैर के बारे में पूछते हैं। वीडियो में महिला बाएं पैर की ओर इशारा करती दिखाई देती हैं। इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आना बाकी:
मामले में हेल्थ सिटी हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ. संदीप कपूर से भी पक्ष मांगा गया है। उपलब्ध जानकारी में उनके बयान का पूरा विवरण सामने नहीं आया है। ऐसे में ऑपरेशन से जुड़े चिकित्सकीय कारणों और अस्पताल का पक्ष संबंधित जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
मामले में परिजनों की शिकायत, अस्पताल के अभिलेख और चिकित्सकीय दस्तावेजों के आधार पर जांच की मांग की गई है। गलत ऑपरेशन किए जाने का आरोप फिलहाल परिजनों की शिकायत पर आधारित है और इसकी पुष्टि संबंधित जांच एवं चिकित्सकीय अभिलेखों के आधार पर होना बाकी है।
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