यूपी में पेपर लीक कानून केंद्र से ज्यादा सख्त:यहां उम्रकैद, केंद्र में सिर्फ 10 साल जेल; क्या अब प्रदेश का कानून बेकार हो जाएगा
देश में सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार का नया संशोधित कानून अब प्रभावी हो गया है। 31 जुलाई को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून अस्तित्व में आया है। केंद्र सरकार की ओर से गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा। इस कानून में अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है। हालांकि Uttar Pradesh (उत्तर प्रदेश) में वर्ष 2024 से लागू पेपर लीक कानून को इससे भी अधिक कठोर माना जा रहा है, क्योंकि उसमें कुछ मामलों में उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि पहले से सख्त कानून होने के बावजूद पेपर लीक की घटनाएं क्यों नहीं रुक पा रही हैं।
उत्तर प्रदेश में कब बना पेपर लीक कानून?:
Uttar Pradesh Government (उत्तर प्रदेश सरकार) ने वर्ष 2024 में ‘उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम’ लागू किया था। इस कानून की पृष्ठभूमि फरवरी 2024 में हुई RO/ARO और सिपाही भर्ती परीक्षा के पेपर लीक की घटनाओं से तैयार हुई। इन घटनाओं के बाद परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के हितों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने सख्त कानून लाने का निर्णय लिया।
लोकसभा चुनाव के दौरान बना बड़ा मुद्दा:
उस समय लोकसभा चुनाव में केवल दो महीने का समय बचा था। ऐसे में विपक्ष ने पेपर लीक के मामलों को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया। इसी दौरान मई 2024 में NEET-UG परीक्षा से जुड़ा पेपर लीक मामला भी सामने आया। 4 जून को लोकसभा चुनाव के परिणाम घोषित हुए, जिसमें Bharatiya Janata Party (भारतीय जनता पार्टी) की Uttar Pradesh (उत्तर प्रदेश) में सीटों की संख्या 62 से घटकर 33 रह गई। केंद्र में भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला। राजनीतिक स्तर पर पेपर लीक के मुद्दे को भी चुनावी परिणामों से जोड़कर देखा गया।
केंद्र और राज्य सरकार ने उठाए कदम:
कई दलों के समर्थन से बनी केंद्र सरकार ने 21 जून को ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम’ पूरे देश में लागू किया। इसके बाद Uttar Pradesh Government (उत्तर प्रदेश सरकार) ने 25 जून को इसी तर्ज पर अध्यादेश जारी किया, जिसे बाद में विधानमंडल से पारित कर कानून का रूप दे दिया गया। इस प्रकार राज्य स्तर पर भी सार्वजनिक परीक्षाओं में अनियमितताओं को रोकने के लिए अलग कानूनी व्यवस्था लागू की गई।
किन परीक्षाओं पर लागू होता है यूपी का कानून?:
कानून की धारा 2(6) के अनुसार Uttar Pradesh Public Service Commission (UPPSC), Uttar Pradesh Subordinate Services Selection Commission (UPSSSC), Uttar Pradesh Police Recruitment and Promotion Board (UPPRPB), Uttar Pradesh Power Corporation Limited (UPPCL) की भर्ती परीक्षाएं, 10वीं और 12वीं की UP Board (यूपी बोर्ड) परीक्षाएं तथा उत्तर प्रदेश की सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों की परीक्षाएं इस कानून के दायरे में आती हैं।
इन परीक्षाओं पर लागू नहीं होगा राज्य का कानून:
कानून की धारा 3(2) के अनुसार Union Public Service Commission (UPSC), Staff Selection Commission (SSC), NEET, JEE, रेलवे, बैंक, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और केंद्रीय शिक्षण संस्थानों की परीक्षाएं उत्तर प्रदेश के इस कानून के दायरे से बाहर हैं। इन परीक्षाओं पर केंद्र सरकार के कानून के प्रावधान लागू होंगे।
केंद्र सरकार ने कानून में किए बदलाव:
अब केंद्र सरकार ने वर्ष 2024 में लागू किए गए ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम’ में संशोधन किए हैं। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह संशोधित कानून लागू होने की प्रक्रिया में है। इसके तहत पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के उपयोग पर सख्त दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं। वहीं उत्तर प्रदेश में पहले से लागू कानून अपने दंड प्रावधानों के कारण अधिक कठोर माना जा रहा है।
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