New Delhi (नई दिल्ली) में Supreme Court (सुप्रीम कोर्ट) में NEET (नीट) पेपर लीक मामले से जुड़े विरोध प्रदर्शनों पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। Solicitor General Tushar Mehta (सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता) ने अदालत को बताया कि सरकार अपने पूर्व में दिए गए आश्वासन पर कायम है और छात्रों के खिलाफ कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के दौरान गंभीर अपराधों से संबंधित मामलों में दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली जाएंगी।
सरकार ने दोहराया अपना रुख:
सुनवाई के दौरान Solicitor General Tushar Mehta (सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता) ने अदालत से कहा कि सरकार ने जो आश्वासन पहले दिया था, वह आज भी उसी पर कायम है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं होगी। साथ ही यह भी बताया कि प्रदर्शन के दौरान गंभीर अपराधों के आरोपों में 2700 से अधिक लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
विरोध प्रदर्शन के बाद बनी थी सहमति:
जानकारी के अनुसार Cockroach Janata Party (कॉकरोच जनता पार्टी) ने Jantar Mantar (जंतर-मंतर) पर NEET (नीट) पेपर लीक को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान संगठन की तीन प्रमुख मांगें सामने रखी गई थीं, जिन्हें सरकार द्वारा स्वीकार किए जाने की बात कही गई। इनमें यह आश्वासन भी शामिल था कि विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों के विरुद्ध कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस मामले में अब अगली सुनवाई 18 अगस्त को निर्धारित की गई है।
सुप्रीम कोर्ट की पुलिस कार्रवाई पर टिप्पणी:
सुनवाई के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भी अदालत में चर्चा हुई। वकील Vrinda Grover (वृंदा ग्रोवर) ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को वापस लेने या रद्द करने को लेकर सवाल उठाया। इस पर Solicitor General Tushar Mehta (सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता) ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप जो भी उचित होगा, सरकार अपने वादे का पालन करेगी।
वहीं Chief Justice Suryakant (चीफ जस्टिस सूर्यकांत) ने कहा कि यदि किसी पुलिस अधिकारी द्वारा आवश्यकता से अधिक बल का प्रयोग किया गया है तो उसे अनावश्यक संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि छात्र आंदोलन की आड़ में यदि किसी अन्य व्यक्ति ने गंभीर अपराध किया है तो उसे भी कानून के अनुसार ही देखा जाना चाहिए।
36 दिन तक चला था आंदोलन:
NEET (नीट) परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के विरोध में Cockroach Janata Party (कॉकरोच जनता पार्टी) का प्रदर्शन 36 दिनों तक चला था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan (धर्मेंद्र प्रधान) के इस्तीफे के बाद यह आंदोलन समाप्त कर दिया गया था।
दो प्रमुख मुद्दों पर अदालत का फोकस:
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष दो प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा हुई। पहला, प्रदर्शनकारियों और पैलेट गन से घायल हुए लोगों के आरोपों की जांच के लिए Supreme Court (सुप्रीम कोर्ट) के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किए जाने की संभावना। दूसरा, यह पता लगाने का प्रयास कि पुलिसकर्मियों पर हमले प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने किए थे या छात्रों की भीड़ में शामिल अन्य शरारती तत्वों ने।
पिछली सुनवाई में दिए गए थे महत्वपूर्ण निर्देश:
28 जुलाई को हुई पिछली सुनवाई में Supreme Court (सुप्रीम कोर्ट) ने राज्यों को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कठोर कार्रवाई से फिलहाल रोकने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह भी कहा था कि यदि 18 वर्ष से कम आयु के किसी व्यक्ति का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है तो उसे रिहा किया जाए।
अदालत ने Maharashtra (महाराष्ट्र), Bihar (बिहार), Assam (असम), Uttar Pradesh (उत्तर प्रदेश), Madhya Pradesh (मध्य प्रदेश), West Bengal (पश्चिम बंगाल) और Kerala (केरल) सरकारों को नोटिस जारी किए थे। साथ ही संबंधित राज्यों को सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा फुटेज, वायरलेस संचार रिकॉर्ड, पीसीआर लॉग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए थे।
20 जुलाई के संसद मार्च का मामला:
20 जुलाई को Delhi (दिल्ली) में संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई थी। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े गए थे। प्रदर्शनकारी NEET (नीट) पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan (धर्मेंद्र प्रधान) के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। बाद में उनकी मांगें स्वीकार किए जाने के बाद आंदोलन समाप्त होने की जानकारी दी गई।
फेशियल रिकग्निशन तकनीक पर भी याचिका:
इसी मामले से जुड़ा एक अन्य पक्ष भी Supreme Court (सुप्रीम कोर्ट) के समक्ष है। Communist Party of India (Marxist) (कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी)) के Kerala (केरल) से राज्यसभा सदस्य A.A. Rahim (एए रहीम) ने याचिका दाखिल कर प्रदर्शन के दौरान Delhi Police (दिल्ली पुलिस) द्वारा फेशियल रिकग्निशन तकनीक और अन्य बायोमेट्रिक निगरानी प्रणालियों के उपयोग को चुनौती दी है। याचिका में शांतिपूर्ण सार्वजनिक सभाओं के दौरान इस प्रकार की निगरानी को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है।
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