लोक मनीषा परिषद के तत्वावधान में वाल्मीकि जयंती मनायी गयी।

आजमगढ़। लोक मनीषा परिषद के तत्वावधान में शनिवार को पंडित अमरनाथ तिवारी के मड़या स्थित आवास पर वाल्मीकि जयंती मनायी गयी। अध्यक्षता पंडित अमरनाथ तिवारी व संचालन शनि त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम की शुरूआत वाल्मीकि की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलन व पुष्प अर्पित कर सरस्वती वंदना से हुई।
अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में पंडित अमरनाथ तिवारी ने कहाकि हिन्दी में रामचरित मानस के रचनाकार गोस्वामी तुलसी दास ने कहा है ‘‘वाल्मीकि नारद घटयोनि निज निज मुखनि कहिं निज होनी’’ उपयुक्त सभी महान द्रष्टाओं और रचनाकारों ने अपने अपने जीवन की गति स्वयं बताया है और अपने प्रणीत कार्य के प्रति सफलता का विश्वास जगाया है।
परिषद के अध्यक्ष पंडित जन्मेजय पाठक ने कहा अपने युग के समयों में महाकवि वाल्मीकि ने तत्कालीन लोक सुलभ संस्कृत भाषा में सर्वप्रथम रामायण महाकाव्य की रचना करके देश सहित विदेशों के लोगों को परिवार, समाज, देश और विश्व के साथ नैतिक बर्ताव व व्यवहार करने का मार्ग दर्शाया। उन्होने देश के यूनानियों, हूण पुषाणों आदि के व्यक्तित्व निर्माण तथा लोक व्यवहार की सीख दी। तब से अब तक देश की निर्मित सभ्यता व संस्कृति अब तक सर्वग्राह्य बनी है। दूसरे संस्कार व सभ्यता के लोग भी रामायण से सीख लेकर अपने जीवन पद्धति का निर्धारण करते आये है।
राजीव रंजन ने कहाकि महर्षि वाल्मीकि ने संस्कृत महाकाव्य रामायण की रचना करके अनेक भाषाओं में काव्य व महाकाव्य के प्रणयन का कार्य प्रशस्त किया।
इस अवसर पर छाया गायत्री पांडेय, कुमारी श्रेया पांडेय, सुभीक्षा पांडेय, तनु तिवारी, यत्तन राम, सुकालू यादव, भजन गुप्ता आदि मौजूद रहे। अंत में अध्यक्ष ने सभी के प्रति आभार जताया।