योगी ने पुलिस वर्दी भत्ता 6500 से बढ़ाकर 15000 किया:पेट्रोल भत्ता भी बढ़ाया, 3 बड़ी घोषणाएं कीं
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर पुलिस विभाग के कर्मचारियों के लिए तीन बड़ी घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों के वर्दी भत्ते को 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये करने, मोटरसाइकिल भत्ते को 700 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये करने और सिम कार्ड के लिए मिलने वाली राशि को 2,000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये करने की घोषणा की। इस अवसर पर कर्तव्य निभाते हुए जान गंवाने वाले पुलिस और अग्निशमन कर्मियों के बलिदान को भी याद किया गया। दिए गए विवरण में ग्रेटर नोएडा की आग और हरियाणा में सड़क हादसे के दौरान जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों के घटनाक्रम का भी उल्लेख है।
पुलिसकर्मियों के भत्तों में बढ़ोतरी की घोषणा:
पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस विभाग के कर्मचारियों के लिए आर्थिक सुविधाओं से जुड़ी तीन घोषणाएं कीं। पहली घोषणा वर्दी भत्ते को लेकर की गई। इसके तहत वर्दी भत्ता 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये करने की बात कही गई।
दूसरी घोषणा मोटरसाइकिल भत्ते में बढ़ोतरी को लेकर थी। मुख्यमंत्री के मुताबिक, यह भत्ता 700 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये किया गया है। तीसरी घोषणा सिम कार्ड के लिए मिलने वाली राशि से संबंधित रही। इसके तहत पहले मिलने वाले 2,000 रुपये की राशि बढ़ाकर 2,500 रुपये करने की घोषणा की गई। इन घोषणाओं का उद्देश्य पुलिसकर्मियों को विभागीय कार्यों से जुड़ी सुविधाओं के लिए अधिक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।
ग्रेटर नोएडा की फैक्ट्री में भीषण आग:
4 अगस्त को तड़के करीब तीन बजे ग्रेटर नोएडा (Greater Noida) के ईकोटेक-3 औद्योगिक क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक पीसीबी चिप बनाने वाली एक फैक्ट्री में आग लग गई। आग तेजी से फैल गई और इमारत धुएं तथा लपटों से घिर गई। सूचना मिलने पर दमकल की गाड़ी मौके पर पहुंची। आग बुझाने के लिए पहुंची टीम में फायरमैन रोहित यादव और ड्राइवर तीर्थपाल सिंह भी शामिल थे।
फैक्ट्री के अंदर रसायन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मौजूद होने के कारण आग पर काबू पाना चुनौतीपूर्ण था। धुएं की वजह से दिखाई देना भी मुश्किल हो रहा था। इसके बावजूद दमकलकर्मियों ने पाइप के जरिए पानी की बौछार कर आग बुझाने का प्रयास शुरू किया।
दीवार और लोहे का गार्डर गिरने से पांच कर्मी दबे:
आग बुझाने के अभियान के दौरान रोहित यादव सबसे आगे रहकर वॉटर होज से लपटों पर पानी डाल रहे थे, जबकि तीर्थपाल सिंह पानी की आपूर्ति और दबाव बनाए रखने में जुटे थे। इसी दौरान अत्यधिक तापमान और गर्मी के कारण फैक्ट्री की दीवार और भारी लोहे का गार्डर नीचे गिर गया। इसकी चपेट में आकर तीर्थपाल सिंह, रोहित यादव समेत पांच कर्मी मलबे में दब गए।
घटना के बाद साथी दमकलकर्मियों और पुलिस बल ने तत्काल बचाव अभियान शुरू किया। काफी प्रयासों के बाद मलबे में दबे सभी लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि, उपचार के दौरान रोहित यादव और तीर्थपाल सिंह को बचाया नहीं जा सका।
450 कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया:
इस हादसे के दौरान फैक्ट्री में काम कर रहे करीब 450 कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। आग बुझाने और लोगों को सुरक्षित निकालने के अभियान में दमकलकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
दिए गए विवरण के अनुसार, रोहित यादव की उम्र 32 वर्ष थी। वह अपने पीछे पत्नी और दो छोटी बेटियां छोड़ गए। वहीं, 48 वर्षीय तीर्थपाल सिंह के परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं। दोनों कर्मियों की मौत से उनके परिवारों को गहरा नुकसान पहुंचा।
व्यापारी के अपहरण की जांच में निकली पुलिस टीम हादसे का शिकार:
एक अन्य घटनाक्रम में जालौन के प्रॉपर्टी कारोबारी विजेंद्र मोर के अपहरण का मामला सामने आया। आशंका जताई गई थी कि उनकी करोड़ों रुपये की जमीन पर कब्जा करने के उद्देश्य से अपहरण और हत्या की साजिश रची गई। पुलिस को सूचना मिली कि कारोबारी को हरियाणा ले जाया गया है। इसके बाद पुलिसकर्मियों की एक टीम उनकी तलाश में रवाना हुई।
टीम में उपनिरीक्षक मोहित कुमार यादव, उपनिरीक्षक सत्यभान सिंह, कांस्टेबल अशोक कुमार, कांस्टेबल प्रदीप कुमार और कारोबारी के रिश्तेदार अमरीक सिंह शामिल थे। सभी स्कॉर्पियो वाहन से हरियाणा के जींद की ओर जा रहे थे। इसी दौरान नूंह के पास कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेस-वे पर वाहन बेकाबू होकर दूसरी गाड़ी से टकरा गया। हादसे में चारों पुलिसकर्मियों और अमरीक सिंह समेत पांच लोगों की मौत हो गई।
जांच में कारोबारी की हत्या का मामला आया सामने:
दिए गए विवरण के मुताबिक, बाद की जांच में श्रीभगवान, संजीव उर्फ कोकिला, मोहित मलिक और अमरजीत सुहाग के नाम सामने आए। आरोप है कि इन लोगों ने विजेंद्र मोर को जबरन क्रेटा कार में बैठाकर अगवा किया और बाद में उनकी हत्या कर दी। इसके बाद शव को हमीरपुर जिले के जलालपुर थाना क्षेत्र स्थित कूपरा जंगल में ले जाया गया। आरोप है कि वहां करीब 40 लीटर डीजल डालकर शव को जला दिया गया, ताकि पहचान और सबूत नष्ट हो जाएं।
गिरफ्तारी के बाद जंगल से कंकाल बरामद:
बताई गई जानकारी के अनुसार, 29 जुलाई को पुलिस ने कदौरा के चितैला फार्म हाउस से मोहित मलिक और उसकी पत्नी सपना रानी को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान मोहित ने कारोबारी की हत्या की बात स्वीकार की और शव को ठिकाने लगाने की जगह के बारे में जानकारी दी।
इसके बाद पुलिस ने मोहित मलिक और सपना रानी की निशानदेही पर कूपरा जंगल से कंकाल बरामद किया। इस मामले में अपहरण और हत्या से जुड़े आरोपों की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की गई। आरोपों से संबंधित अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के अधीन होंगे।
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