गाजीपुर: एमएलसी चुनाव से पहले गरमाई सियासत, राधेमोहन सिंह ने सपा और अफजाल अंसारी को घेरा; वोट चोरी और पीडीए पर उठाए सवाल
गाजीपुर (Ghazipur) में स्नातक और शिक्षक विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह ने समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के नेतृत्व और गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी (Afzal Ansari) पर निशाना साधते हुए कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने चुनावी राजनीति में कथित वोटों की हेराफेरी, पीडीए के मुद्दे और पार्टी के बागी प्रत्याशी सुनील यादव को चुनाव मैदान से हटने के अनुरोध को लेकर सवाल खड़े किए। राधेमोहन सिंह ने कहा कि भाजपा पर वोट चोरी के आरोप लगाने से पहले समाजवादी पार्टी को अपने पिछले चुनावों से जुड़े सवालों के जवाब देने चाहिए।
एमएलसी चुनाव को लेकर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी:
पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह ने आगामी 23 तारीख को होने वाले स्नातक एवं शिक्षक एमएलसी चुनाव का जिक्र करते हुए विभिन्न दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों की स्थिति पर अपनी बात रखी। उनके अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से केदारनाथ सिंह और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से प्रमोद मिश्रा को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, समाजवादी पार्टी ने भी अपने अधिकृत प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा है। इसके अलावा कई प्रत्याशी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।
राधेमोहन सिंह ने विशेष रूप से समाजवादी पार्टी के बागी प्रत्याशी सुनील यादव का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सुनील यादव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं और इस समय उनकी उम्मीदवारी चर्चा में है। पूर्व सांसद के मुताबिक, सांसद अफजाल अंसारी ने सुनील यादव से चुनाव मैदान से हटने का अनुरोध किया था। इसके पीछे यह तर्क दिया गया कि सुनील यादव पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता हैं और पिछड़ा, दलित तथा अल्पसंख्यक वर्ग यानी पीडीए से आते हैं।
जिला पंचायत चुनाव में 27 वोटों को लेकर सवाल:
राधेमोहन सिंह ने जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव का उल्लेख करते हुए समाजवादी पार्टी और अफजाल अंसारी की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस चुनाव में समाजवादी पार्टी और अफजाल अंसारी के समर्थकों को मिलाकर कुल 47 वोट थे, जबकि सपा प्रत्याशी को केवल 20 वोट मिले थे।
पूर्व सांसद ने सवाल किया कि यदि समर्थकों की संख्या 47 थी तो बाकी 27 वोट कहां चले गए? उन्होंने इस अंतर को लेकर कथित वोटों की हेराफेरी का आरोप लगाया और कहा कि समाजवादी पार्टी के नेतृत्व को इस सवाल का जवाब देना चाहिए। हालांकि, ये आरोप राधेमोहन सिंह की ओर से लगाए गए हैं और उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या संबंधित पक्ष का जवाब शामिल नहीं है।
मदन यादव के चुनाव का भी किया जिक्र:
पूर्व सांसद ने विधान परिषद चुनाव में मदन यादव की उम्मीदवारी का उदाहरण देते हुए भी समाजवादी पार्टी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब पीडीए वर्ग से आने वाले मदन यादव एमएलसी चुनाव लड़ रहे थे, तब उन्हें केवल 632 वोट मिले थे।
राधेमोहन सिंह ने सवाल किया कि उस समय पीडीए और समाजवादी पार्टी के अन्य समर्थकों के वोट कहां चले गए थे। उन्होंने इस उदाहरण के जरिए पार्टी के मौजूदा रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पहले के चुनावों में ऐसे परिणाम सामने आए, तब पार्टी नेतृत्व ने पीडीए, संविधान और पार्टी के प्रति निष्ठा जैसे मुद्दों को इसी तरह क्यों नहीं उठाया।
पीडीए और नैतिकता के मुद्दे पर साधा निशाना:
राधेमोहन सिंह ने सुनील यादव के चुनाव लड़ने और उन्हें मैदान से हटने के कथित अनुरोध को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जब पहले जिला पंचायत और विधान परिषद चुनावों में वोटों को लेकर सवाल उठे थे, तब पार्टी नेतृत्व और सांसद अफजाल अंसारी ने समान रूप से नैतिकता तथा पीडीए की बात क्यों नहीं की।
उनका कहना था कि अब सुनील यादव चुनाव लड़ रहे हैं तो पार्टी निष्ठा और पीडीए का हवाला दिया जा रहा है। पूर्व सांसद ने इसे दोहरे मापदंड का मामला बताते हुए सपा नेतृत्व से पुराने चुनावों को लेकर स्पष्टीकरण देने की मांग की। ये सवाल और आरोप उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।
संविधान और लाल टोपी को लेकर भी टिप्पणी:
पूर्व सांसद ने अपने बयान में लाल टोपी, पार्टी के झंडे और संविधान की रक्षा के मुद्दे पर भी समाजवादी पार्टी को घेरा। उन्होंने कहा कि जो लोग आज इन प्रतीकों और मुद्दों के सहारे राजनीति कर रहे हैं, उन्हें यह भी बताना चाहिए कि जिला पंचायत सदस्यों के राजनीतिक भविष्य से जुड़े फैसलों के दौरान उनकी नैतिकता कहां थी।
राधेमोहन सिंह ने अपने राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने भी जिला पंचायत सदस्य के स्तर से अपनी यात्रा शुरू की थी और आगे चलकर संसद तक पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा नेतृत्व ने नए जनप्रतिनिधियों के राजनीतिक भविष्य को नुकसान पहुंचाया और राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दी।
वोट चोरी के आरोपों पर सपा से जवाब की मांग:
राधेमोहन सिंह ने भाजपा पर वोट चोरी के आरोप लगाने से पहले समाजवादी पार्टी को गाजीपुर में हुए पुराने चुनावों से जुड़े सवालों पर जवाब देने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि पिछले चुनावों में वोटों के अंतर और पीडीए प्रत्याशियों के प्रदर्शन को लेकर उठे सवालों पर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
एमएलसी चुनाव से पहले दिए गए इस बयान से गाजीपुर की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का माहौल तेज हो गया है। एक ओर सुनील यादव की निर्दलीय उम्मीदवारी चर्चा में है, वहीं दूसरी ओर पूर्व सांसद ने समाजवादी पार्टी के नेतृत्व और अफजाल अंसारी से पुराने चुनावों को लेकर सवाल पूछे हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों पर समाजवादी पार्टी या अफजाल अंसारी की प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।
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