राजधानी लखनऊ (Lucknow) के विकासनगर क्षेत्र में हुई भीषण आग की घटना को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ खंडपीठ ने गंभीर रुख अपनाया है। 250 से अधिक झोपड़ियों के जलने के मामले में अदालत ने प्रशासन से कई अहम सवाल पूछे हैं और संबंधित अधिकारियों को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले की सुनवाई जनहित याचिका के तहत की जा रही है, जिसमें पीड़ितों की स्थिति और प्रशासनिक लापरवाही पर प्रश्न उठाए गए हैं।
हाईकोर्ट ने मांगा विस्तृत जवाब:
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ बेंच ने जिलाधिकारी और नगर निगम को निर्देश दिया है कि वे 30 मई तक विस्तृत जवाबी शपथपत्र प्रस्तुत करें। साथ ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी और मुख्य अग्निशमन अधिकारी से भी शपथपत्र मांगा गया है। अदालत ने सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता से यह जानना चाहा कि वर्षों से सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कैसे होता रहा और इस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
अतिक्रमण और सुविधाओं पर उठे सवाल:
न्यायालय ने यह भी पूछा कि लगभग 20 वर्षों से पीडब्ल्यूडी की जमीन पर बड़ी संख्या में लोग कैसे बस गए। इसके साथ ही अदालत ने यह जानकारी भी मांगी कि इन लोगों को बिजली और कुकिंग गैस के कनेक्शन किन कंपनियों के माध्यम से दिए गए और प्रशासन ने इस स्थिति को नजरअंदाज क्यों किया। अदालत ने संकेत दिया कि पूरे मामले की गहन जांच कराई जा सकती है।
पीड़ितों को राहत देने के निर्देश:
अदालत ने प्रशासन को निर्देशित किया कि अग्निकांड से प्रभावित लोगों के लिए तत्काल राहत कार्य सुनिश्चित किए जाएं। इसमें भोजन, रहने की व्यवस्था और चिकित्सा सुविधाएं शामिल हैं। कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी और राहत आयुक्त को भी इस मामले में पक्षकार बनाने का आदेश दिया है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की बात कही है।
अग्निकांड की भयावह घटना:
15 अप्रैल को लखनऊ (Lucknow) के विकासनगर इलाके में शाम के समय भीषण आग लग गई थी। इस आग में 250 से अधिक झोपड़ियां जलकर राख हो गईं और कई गैस सिलेंडर फटने से स्थिति और भयावह हो गई। घटना के दौरान आसपास के इलाकों में दहशत फैल गई और एहतियात के तौर पर कई घरों को खाली कराया गया।
फायर ब्रिगेड ने पाया काबू:
आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियों को मौके पर लगाया गया। करीब पांच घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग को नियंत्रित किया जा सका। इस दौरान सुरक्षा के मद्देनजर क्षेत्र की बिजली आपूर्ति भी बंद कर दी गई थी।
जनहानि और राहत कार्य:
हादसे के बाद पुलिस ने दो मासूम बच्चों के शव बरामद किए, जिससे पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। प्रभावित परिवारों को अस्थायी तौर पर कम्यूनिटी सेंटर और रैन बसेरों में ठहराया गया है, जहां भोजन और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
प्रशासनिक जवाबदेही पर जोर:
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने स्पष्ट किया है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों को रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। अदालत के निर्देशों के बाद अब इस मामले में प्रशासन की भूमिका और जवाबदेही पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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