वाराणसी (Varanasi) के नहिया गांव (Nehia Village) में भगवा और नीले झंडे को लेकर शुरू हुआ विवाद शुक्रवार को हिंसक झड़प में बदल गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पथराव में पुलिस अधिकारियों समेत सात पुलिसकर्मी घायल हो गए। मौके पर तैनात पुलिस को हालात काबू करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा। घटना के बाद पूरे इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है और गांव में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।
विवाद के बाद गांव में तनावपूर्ण माहौल:
शनिवार सुबह से ही नहिया गांव (Nehia Village) में पीएसी (PAC) और पांच थानों की पुलिस फोर्स तैनात है। गांव की दलित बस्तियों में पुलिस की आवाजाही से माहौल और अधिक सख्त दिखाई दे रहा है। सुरक्षा कारणों से गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और कई ग्रामीणों के घरों में बाहर निकलने से बचने की स्थिति देखी जा रही है। पुलिस ने गांव के प्रवेश द्वार पर सीसीटीवी (CCTV) कैमरे भी लगवा दिए हैं ताकि स्थिति पर नजर रखी जा सके।
झंडा विवाद से शुरू हुआ मामला:
यह पूरा विवाद वाराणसी (Varanasi) मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर बाबतपुर-चौबेपुर मार्ग पर स्थित नहिया गांव (Nehia Village) से जुड़ा है। गांव के प्रवेश द्वार पर बाबा बटुक भैरव धाम (Baba Batuk Bhairav Dham) लिखा हुआ है और पास में संत रविदास मंदिर (Sant Ravidas Temple) भी स्थित है। स्थानीय लोगों के अनुसार, रामनवमी के दौरान यहां भगवा झंडा लगाया जाता रहा है, लेकिन इस वर्ष 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती (Dr. B.R. Ambedkar Jayanti) के जुलूस के दौरान उसे हटाकर नीला झंडा लगा दिया गया।
झंडे हटाने और नारेबाजी से बढ़ा तनाव:
आरोप है कि 15 अप्रैल को भगवा झंडा हटाए जाने के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव और बढ़ गया। इसके बाद अलग-अलग समूहों ने एक-दूसरे के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। 16 अप्रैल को बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान हाईवे (Highway) पर करीब डेढ़ घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही। दोनों पक्ष अपनी-अपनी परंपराओं और धार्मिक स्थानों के अधिकार को लेकर आमने-सामने आ गए।
सोशल मीडिया और बाहरी हस्तक्षेप का आरोप:
ग्रामीणों का कहना है कि यह विवाद मूल रूप से स्थानीय नहीं था, बल्कि बाहरी लोगों और सोशल मीडिया (Social Media) के जरिए इसे और भड़काया गया। कुछ संगठनों और राजनीतिक समूहों द्वारा वीडियो साझा किए जाने के बाद बड़ी संख्या में लोग गांव पहुंचे, जिससे स्थिति और अधिक बिगड़ गई। ग्रामीणों के अनुसार यदि शुरुआत में ही प्रशासन ने हस्तक्षेप किया होता तो हालात इतने गंभीर नहीं होते।
हिंसा और पुलिस पर हमला:
17 अप्रैल को स्थिति तब और बिगड़ गई जब भीड़ अचानक उग्र हो गई और पुलिस के समझाने पर पथराव शुरू कर दिया गया। इस घटना में एसीपी विदुष सक्सेना (ACP Vidush Saxena), इंस्पेक्टर, दरोगा समेत सात पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा। घटना के बाद पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
FIR दर्ज, गिरफ्तारी की कार्रवाई जारी:
गोसाईपुर चौकी इंचार्ज विपिन पांडेय (Vipin Pandey) की तहरीर पर पुलिस ने 11 नामजद और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन पर हत्या के प्रयास, सरकारी कार्य में बाधा और दंगा जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने 6 से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी शुरू कर दी है और अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।
गांव में सुरक्षा कड़ी, लोग घरों में कैद:
घटना के बाद नहिया गांव (Nehia Village) में भारी पुलिस बल की तैनाती जारी है। दलित बस्तियों में विशेष निगरानी रखी जा रही है और पुलिस की आवाजाही लगातार बनी हुई है। गिरफ्तारी के डर से कई लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। पूरे गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
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