कौशांबी (Kaushambi) में पुलिस और एक पत्रकार के बीच हुए विवाद ने गंभीर रूप ले लिया, जब एक इंस्पेक्टर पर कवरेज कर रहे पत्रकार को अपशब्द कहने, धमकी देने और अवैध रूप से हिरासत में रखने के आरोप लगे। मामला सराय अकिल थाना (Sarai Akil Police Station) क्षेत्र की कनैली चौकी (Kanaili Outpost) का बताया जा रहा है, जहां पत्रकार आदित्य सिंह (Aditya Singh) के साथ कथित तौर पर मारपीट और अभद्र व्यवहार किया गया। आरोप है कि इंस्पेक्टर वीर प्रताप सिंह (Vir Pratap Singh) ने उन्हें जान से मारने और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। इस घटना के बाद पत्रकार संगठनों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद उन्हें रिहा किया गया।
मामला कैसे शुरू हुआ:
जानकारी के अनुसार, स्थानीय पत्रकार आदित्य सिंह (Aditya Singh) बुधवार शाम लगभग 5:30 बजे खबर कवरेज के लिए कनैली चौकी (Kanaili Outpost) पहुंचे थे। वहां एक महिला पेड़ काटे जाने की शिकायत लेकर आई थी। महिला द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र की फोटो पत्रकार ने खींच ली, जिस पर चौकी इंचार्ज जितेंद्र सिंह नाराज हो गए। आरोप है कि उन्होंने वीडियो बनाकर पत्रकार को धमकाया कि उनके खिलाफ चोरी का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। इसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस हो गई, जिसके बाद पत्रकार वहां से चले गए।
चौकी में विवाद और धमकी:
आरोप है कि इसके बाद चौकी इंचार्ज जितेंद्र सिंह ने पूरी जानकारी इंस्पेक्टर वीर प्रताप सिंह (Vir Pratap Singh) को दी। रात करीब 9:30 बजे पत्रकार को उनके घर के पास चौराहे से पुलिसकर्मी जबरन उठाकर कनैली चौकी (Kanaili Outpost) ले आए। पीड़ित का कहना है कि वहां पहले से इंस्पेक्टर मौजूद थे। इसके बाद इंस्पेक्टर और चौकी इंचार्ज ने कथित रूप से उनके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी और गंभीर धमकियां दीं। आरोप है कि इंस्पेक्टर ने कहा कि एससी-एसटी एक्ट (SC-ST Act) में झूठा मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया जाएगा और राइफल से गोली मारने जैसी धमकी भी दी गई।
रात में जबरन हिरासत:
पीड़ित पत्रकार का आरोप है कि उन्हें बिना किसी लिखित मुकदमे या एफआईआर के थाने में रखा गया। उन्हें बुधवार रात से लेकर गुरुवार पूरे दिन और फिर रात तक हिरासत में रखा गया। इस दौरान उन्हें बार-बार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दी गई। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने लाठियों से भी मारपीट की, जिससे उनके सिर, पीठ और पैरों में चोटें आईं। पत्रकार का कहना है कि पूरी अवधि में उन्हें बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के हिरासत में रखा गया।
थाने में मारपीट और आरोप:
आरोपों के अनुसार, इंस्पेक्टर वीर प्रताप सिंह (Vir Pratap Singh) ने गाली-गलौज करते हुए यह भी कहा कि कई पत्रकारों को पहले भी ठीक किया गया है और उनकी औकात दिखाई गई है। पीड़ित का कहना है कि उन्हें जाति को लेकर भी अपमानित किया गया और गंभीर धमकियां दी गईं। साथ ही यह भी आरोप है कि उन पर दबाव बनाने के लिए गलत केस में फंसाने की बात कही गई। इस पूरे मामले का एक ऑडियो भी सामने आने की बात कही जा रही है, जिसने विवाद को और बढ़ा दिया है।
पत्रकार संगठनों का हस्तक्षेप:
घटना की जानकारी मिलने के बाद पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधि पुलिस अधीक्षक कार्यालय (SP Office) पहुंचे और मामले की शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने पत्रकार की अवैध हिरासत और कथित मारपीट पर कार्रवाई की मांग की। पुलिस अधीक्षक सत्य प्रकाश (SP Satya Prakash) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित थाने से बात की, जिसके बाद शुक्रवार को पत्रकार को रिहा कर दिया गया।
पृष्ठभूमि में अवैध खनन रिपोर्टिंग:
पीड़ित पत्रकार आदित्य सिंह (Aditya Singh) ने आरोप लगाया है कि उन्होंने हाल ही में यमुना नदी (Yamuna River) में चल रहे अवैध खनन और ओवरलोडिंग पर खबर प्रकाशित की थी। उनका कहना है कि इसी रिपोर्टिंग से संबंधित अधिकारी उनसे नाराज थे और उसी के चलते यह कार्रवाई की गई। हालांकि, यह सभी आरोप जांच का विषय हैं और आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा है।
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