अयोध्या (Ayodhya) स्थित राम मंदिर (Ram Mandir) में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। यह प्रकरण सामने आने के बाद देशभर में इसकी चर्चा हो रही है। ट्रस्ट अपने स्तर पर जांच, छापेमारी और कथित रकम की रिकवरी की कार्रवाई कर रहा है, लेकिन अब तक इस मामले में पुलिस में एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। इसी कारण कई तरह के सवाल उठ रहे हैं कि मंदिर परिसर में स्थापित दानपेटियों में आने वाले चढ़ावे की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी।
मंदिर से जुड़े प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन को लेकर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय (Champat Rai), ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा (Dr. Anil Mishra) और परिसर व्यवस्थापक गोपाल राव (Gopal Rao) के नाम चर्चा में हैं। मंदिर संचालन के लिए 15 सदस्यीय ट्रस्ट का गठन किया गया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर व्यवस्था और संचालन की जिम्मेदारी में चंपत राय की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
सीसीटीवी में रिकॉर्ड हुई कथित घटना:
बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले चढ़ावे की गिनती करने वाली टीम में एक नया कर्मचारी शामिल किया गया था। आरोप है कि 7 जून 2026 को उसने नोटों की एक गड्डी छिपा ली। यह पूरी घटना सीसीटीवी (CCTV) कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। बाद में पूछताछ के दौरान कथित रूप से चढ़ावे की रकम में अनियमितताओं से जुड़ी कई बातें सामने आईं।
9 जून को मामला सार्वजनिक होने के बाद यह तेजी से सुर्खियों में आ गया। इसके बाद समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार और ट्रस्ट पर सवाल खड़े किए।
एफआईआर नहीं होने पर उठ रहे प्रश्न:
मामला सामने आने के बाद यह भी चर्चा का विषय बना कि कथित अनियमितताओं की जानकारी मिलने के बावजूद पुलिस में शिकायत क्यों दर्ज नहीं कराई गई। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि अन्य ट्रस्टियों को मामले की जानकारी समय रहते नहीं दी गई।
हालांकि, इन आरोपों को लेकर संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं और मामले की सत्यता किसी सक्षम जांच एजेंसी द्वारा की जाने वाली जांच पर निर्भर करेगी।
मुख्य आरोपी के रूप में टिन्नू यादव का नाम चर्चा में:
इस पूरे मामले में रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव (Tinnu Yadav) का नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहा है। आरोप लगाने वाले लोगों का कहना है कि वह मंदिर परिसर की कई व्यवस्थाओं से जुड़ा हुआ था और प्रभावशाली लोगों के करीबी के रूप में जाना जाता था।
12 जून को चंपत राय (Champat Rai) ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपना पक्ष भी रखा। इसी बीच धर्म सेना (Dharma Sena) के संस्थापक संतोष दुबे (Santosh Dubey) ने सार्वजनिक रूप से कई सवाल उठाए। उन्होंने ट्रस्ट से जुड़े लोगों की आय, खर्च और व्यवस्थाओं को लेकर पारदर्शिता की मांग की।
पूर्व लेखाकार ने लगाए गंभीर आरोप:
राम मंदिर (Ram Mandir) के पूर्व लेखाकार महिपाल सिंह (Mahipal Singh) ने दावा किया कि चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ियां कोई नई बात नहीं हैं। उनके अनुसार यह स्थिति वर्ष 2020-21 से चल रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में भी उन्होंने कथित अनियमितताओं की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी थी।
महिपाल सिंह का आरोप है कि शिकायत के बाद कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ही जिम्मेदारियों से हटा दिया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले सोना, चांदी और अन्य कीमती आभूषणों का पूरा रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से नहीं रखा जाता था।
पत्रकार ने भी उठाए सवाल:
अयोध्या (Ayodhya) के वरिष्ठ पत्रकार इंदुभूषण पांडेय (Indubhushan Pandey) का कहना है कि यदि महिपाल सिंह के आरोप गलत हैं तो ट्रस्ट या संबंधित अधिकारियों की ओर से स्पष्ट खंडन सामने आना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में एक दानपेटी की गिनती के दौरान कथित तौर पर बड़ी गड़बड़ी सामने आने का दावा किया गया था, जिसकी भी चर्चा होती रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि 21 मार्च को हुई बैठक में 1 अप्रैल 2025 से 28 फरवरी 2026 तक का आय-व्यय विवरण प्रस्तुत किया गया था, जिसमें चढ़ावे में प्राप्त गहनों का कोई अलग उल्लेख नहीं था। बैठक में केवल कुल दान राशि का उल्लेख किया गया था।
टिन्नू यादव ने आरोपों को बताया निराधार:
जब इस मामले में टिन्नू यादव (Tinnu Yadav) से संपर्क किया गया तो उन्होंने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यह केवल उनकी छवि खराब करने का प्रयास है। उनका कहना था कि यदि किसी के पास कोई प्रमाण है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी और उनके परिवार की संपत्ति से संबंधित विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं।
गोपाल राव की भूमिका पर भी सवाल:
पूर्व लेखाकार महिपाल सिंह के दावों के बाद परिसर व्यवस्थापक गोपाल राव (Gopal Rao) की भूमिका को लेकर भी प्रश्न उठाए जा रहे हैं। आरोप लगाने वाले लोगों का कहना है कि यदि पहले से जानकारी थी तो सीसीटीवी फुटेज की विस्तृत जांच और कर्मचारियों से पूछताछ क्यों नहीं कराई गई।
बजरंग दल (Bajrang Dal) के संस्थापक विनय कटियार (Vinay Katiyar) ने भी इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए संबंधित लोगों से पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका पर भी चर्चा:
ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा (Dr. Anil Mishra) को भी मंदिर के वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला माना जाता है। आरोप लगाने वाले पक्षों का कहना है कि चढ़ावे और उससे जुड़े वित्तीय मामलों की निगरानी में उनकी भी जिम्मेदारी थी। साथ ही यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि उनके कुछ रिश्तेदार मंदिर में कर्मचारी के रूप में कार्यरत हैं।
हालांकि, इन सभी आरोपों की पुष्टि किसी आधिकारिक जांच रिपोर्ट से नहीं हुई है। मामले को लेकर विभिन्न पक्षों के दावे और प्रतिदावे सामने आ रहे हैं तथा आगे की स्थिति जांच और संबंधित प्रक्रियाओं के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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