देवरिया (Deoria)। अयोध्या (Ayodhya) में 25 नवम्बर को होने वाले राम मंदिर (Ram Mandir) के मुख्य शिखर पर ध्वजारोहण कार्यक्रम को लेकर जहां देशभर में उत्साह और तैयारियों का माहौल है, वहीं देवरहा बाबा आश्रम मंच मईल (Deoraha Baba Ashram Manch Mail) में निराशा और नाराज़गी का वातावरण बन गया है। कारण—इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में देशभर के साधु-संतों और पीठाधीश्वरों को आमंत्रित किए जाने के बावजूद आश्रम के पीठाधीश्वर श्यामसुंदर दास को निमंत्रण नहीं भेजा गया है। इस निर्णय ने आश्रम के अनुयायियों और भक्तों में भी असंतोष की भावना पैदा कर दी है।
ध्वजारोहण कार्यक्रम की बड़ी तैयारियाँ:
अयोध्या में प्रस्तावित इस ध्वजारोहण कार्यक्रम को भव्य स्तर पर आयोजित किया जा रहा है। मंदिर के मुख्य शिखर पर ध्वज फहराने का कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाएगा। इस कार्यक्रम में 6000 से अधिक विशिष्ट अतिथियों को बुलाया गया है, जिनमें आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, उप्र की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित देश के प्रतिष्ठित संत और संत समाज के बड़े नाम शामिल रहेंगे। कार्यक्रम को ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
निमंत्रण न मिलने से उत्पन्न असंतोष:
पीठाधीश्वर श्यामसुंदर दास ने बताया कि उन्हें इस कार्यक्रम के लिए निमंत्रण न मिलने से गहरा दुख पहुंचा है। उन्होंने कहा कि यह आश्रम देवरहा बाबा की तपोस्थली है, जिनकी भविष्यवाणी राम मंदिर निर्माण के संबंध में दशकों पहले ही की गई थी। आश्रम का राम मंदिर आंदोलन से पुराना और महत्वपूर्ण संबंध रहा है, जिसके बावजूद उन्हें नजरअंदाज किया जाना आहत करने वाला है।
देवरहा बाबा की भविष्यवाणी का उल्लेख:
पीठाधीश्वर ने कहा कि देवरहा बाबा ने बहुत पहले यह भविष्यवाणी की थी कि एक समय ऐसा आएगा जब सर्व-सहमति से राम मंदिर का निर्माण होगा। उनके ही निर्देश पर उस समय के मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह द्वारा मंदिर का ताला खुलवाया गया था। इस ऐतिहासिक घटना का उल्लेख करते हुए श्यामसुंदर दास ने कहा कि राम मंदिर की नींव में इस तपोस्थली की आध्यात्मिक भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता।
भूमि पूजन में भेजी गई थी आश्रम की मिट्टी:
पीठाधीश्वर ने याद दिलाया कि राम मंदिर के भूमि पूजन कार्यक्रम के दौरान सबसे पहले इसी तपोस्थली की पवित्र मिट्टी अयोध्या भेजी गई थी। यह बात स्वयं आश्रम और संत समाज के लिए गौरव का विषय रही है। लेकिन इस बार कार्यक्रम में आमंत्रण न भेजा जाना कहीं न कहीं उपेक्षा का बोध कराता है।
पिछले कार्यक्रम में मिला था निमंत्रण:
उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व में आयोजित प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में आश्रम को सम्मानपूर्वक निमंत्रण मिला था, जिससे संत समाज को सम्मानित होने का अनुभव हुआ था। लेकिन इस बार की चुप्पी और निमंत्रण न भेजने का निर्णय आश्चर्य और निराशा पैदा कर रहा है।
नाराज़गी के बावजूद संयमित प्रतिक्रिया:
पीठाधीश्वर श्यामसुंदर दास ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि आश्रम का उद्देश्य सदैव धर्म, समाज और देश की सेवा करना रहा है। ऐसी परिस्थितियों में भी वे संयम रखते हुए राम मंदिर ध्वजारोहण की सफलता और भव्यता की कामना करते हैं।
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