अयोध्या: धीरज धर्म मित्र अरु नारी… चढ़ावा चोरी पर चंपत राय ने चिट्ठी से तोड़ी चुप्पी

अयोध्या स्थित Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust (श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट) में चढ़ावा चोरी मामले के बीच पूर्व महासचिव Champat Rai (चंपत राय) ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने अपने X (एक्स) अकाउंट पर रामभक्तों के नाम एक हस्तलिखित पत्र साझा किया और Ramcharitmanas (रामचरितमानस) की प्रसिद्ध चौपाई लिखते हुए कहा कि धैर्य, धर्म, मित्र और स्त्री की वास्तविक परीक्षा विपत्ति के समय होती है। पत्र में उन्होंने लोगों से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि SIT (एसआईटी) की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद वह अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों का क्रमवार जवाब देंगे।

चौपाई के जरिए दिया संदेश:

अपने पत्र में Champat Rai (चंपत राय) ने लिखा कि संकट के समय यह स्पष्ट हो जाता है कि कौन साथ खड़ा रहता है और कौन नहीं। उन्होंने कहा कि पूरे मामले में जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय जांच पूरी होने का इंतजार किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि अंतिम जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद पूरे घटनाक्रम की सच्चाई स्पष्ट हो जाएगी। उन्होंने अपने समर्थकों और रामभक्तों से संयम बनाए रखने की भी अपील की।

रिपोर्ट लीक होने पर भी उठाए सवाल:

पूर्व महासचिव ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि ट्रस्ट की 6 जुलाई को हुई समीक्षा बैठक में SIT (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी, जिसे उन्होंने “परम गोपनीय” बताया। उनका कहना है कि इसके बावजूद रिपोर्ट सार्वजनिक हो गई, जिस पर भी सवाल उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद वह इस पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष विस्तार से रखेंगे।

45 वर्षों के सार्वजनिक जीवन का किया उल्लेख:

Champat Rai (चंपत राय) ने अपने पत्र में लिखा कि उन्हें अक्टूबर 1991 में संगठन द्वारा Ayodhya (अयोध्या) भेजा गया था और उनका लगभग 45 वर्षों का सार्वजनिक जीवन पूरी तरह पारदर्शी रहा है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां उन्होंने कार्य किया, वहां उनका जीवन खुली किताब की तरह रहा है। पत्र के अंत में उन्होंने सभी लोगों को आदरपूर्वक नमन भी किया।

कथित जवाब में कई गंभीर सवाल:

इस बीच, चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही SIT (एसआईटी) को दिए गए Champat Rai (चंपत राय) के कथित जवाब भी चर्चा में हैं। हालांकि, इन दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इन कथित जवाबों में उन्होंने ट्रस्ट के पूर्व सदस्य Anil Mishra (अनिल मिश्रा), बैंक के साथ हुए MOU (एमओयू) और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए हैं।

उन्होंने दावा किया कि बैंक के साथ हुए MOU (एमओयू) की उन्हें जानकारी नहीं थी और उस पर उनके हस्ताक्षर भी नहीं हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि बिना उनकी जानकारी के बैंक के साथ करार किया गया। उन्होंने 6 फरवरी 2025 के दिशा-निर्देश पत्र पर भी हस्ताक्षर होने से इनकार किया और कहा कि इसकी जानकारी उन्हें काफी बाद में मिली।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठाए प्रश्न:

कथित जवाब में Champat Rai (चंपत राय) ने यह भी कहा कि दानपात्र की गणना के दौरान तय सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाली वर्दी का नियम लागू नहीं किया गया, जबकि गणना कार्य में हाउसकीपिंग स्टाफ को लगाया गया, जो निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप नहीं था। इसके अलावा CCTV (सीसीटीवी), लोहे के दरवाजों और अन्य सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए तथा संबंधित बैंक अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगे जाने की बात कही।

गोविंद देव गिरि ने रखी अपनी बात:

मामले को लेकर Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust (श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट) के कोषाध्यक्ष Govind Dev Giri (गोविंद देव गिरि) ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार Champat Rai (चंपत राय) का इस पूरे मामले से कोई चारित्रिक संबंध नहीं हो सकता। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि चंपत राय पर्याप्त सतर्क नहीं रहे। उनका कहना था कि जिस व्यक्ति को ड्राइवर के रूप में रखा गया, उसके पास कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां थीं और उसी स्तर पर चूक हुई। उन्होंने आशंका जताई कि ड्राइवर का बाहरी लोगों से संपर्क हो सकता है।

प्रबंधन में सुधार की तैयारी:

Govind Dev Giri (गोविंद देव गिरि) ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ट्रस्ट की व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक CEO (सीईओ) नियुक्त करने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे, ताकि सभी कार्यों की बेहतर निगरानी सुनिश्चित की जा सके। वहीं चढ़ावा चोरी मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

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