सतलुज रिलीज होते ही क्यों गायब हुई? कौन थे जसवंत सिंह खालड़ा, जानिए पूरी कहानी

साल 1995 में Amritsar (अमृतसर) से सामने आया एक मामला आज भी चर्चा का विषय बना हुआ है। मानवाधिकार कार्यकर्ता Jaswant Singh Khalra (जसवंत सिंह खालड़ा) ने उस समय दावा किया था कि पुलिस ने 25 हजार से अधिक लोगों की हत्या के बाद उनके शवों का लावारिस के रूप में अंतिम संस्कार कर दिया। इन दावों के कुछ महीनों बाद ही उनका अपहरण कर लिया गया और उनकी हत्या कर दी गई। आज तक उनका शव बरामद नहीं हो सका है। इसी घटनाक्रम पर आधारित फिल्म हाल ही में ZEE5 (जी5) पर रिलीज हुई, लेकिन 48 घंटे के भीतर उसे प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया।

फिल्म और विवाद की चर्चा:

फिल्म के मुख्य अभिनेता Diljit Dosanjh (दिलजीत दोसांझ) ने सोशल मीडिया पर फिल्म का एक वीडियो साझा करते हुए लिखा कि फिल्म की कहानी उसी घटनाक्रम से प्रेरित है, जो Jaswant Singh Khalra (जसवंत सिंह खालड़ा) के साथ हुआ था। इसके बाद फिल्म और उससे जुड़े विषय पर चर्चा तेज हो गई।

क्या था जसवंत सिंह खालड़ा का दावा?:

1990 के दशक में Punjab (पंजाब) में खालिस्तान आंदोलन के दौरान कई लोगों के लापता होने की घटनाएं सामने आई थीं। उस समय Jaswant Singh Khalra (जसवंत सिंह खालड़ा) ने कथित रूप से लापता लोगों, पुलिस हिरासत में हुई मौतों और श्मशान घाटों में लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के रिकॉर्ड का अध्ययन किया। उनका दावा था कि बड़ी संख्या में लोगों के शव बिना पहचान और बिना आवश्यक प्रक्रिया पूरी किए जला दिए गए।

उन्होंने जनवरी 1995 में प्रेस वार्ता कर कई दस्तावेज और रिकॉर्ड प्रस्तुत किए। उनके अनुसार, कई शवों की पहचान से जुड़े संकेत मौजूद होने के बावजूद उन्हें लावारिस बताकर अंतिम संस्कार किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में लोगों की गैर-कानूनी तरीके से हत्या की गई।

अपहरण और जांच का घटनाक्रम:

सितंबर 1995 में Amritsar (अमृतसर) स्थित उनके घर के बाहर से उनका कथित रूप से अपहरण कर लिया गया। इसके बाद उनकी पत्नी Paramjit Kaur (परमजीत कौर) ने शिकायत दर्ज कराई और मामले की जांच की मांग की। बाद में अदालत के निर्देश पर CBI (सीबीआई) ने जांच शुरू की।

जांच एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय पुलिस अधिकारियों पर अपहरण और हत्या के आरोप लगाए गए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखने के बाद उनकी हत्या कर शव नहर में फेंक दिया गया। हालांकि उनका शव आज तक बरामद नहीं हो सका।

गवाहों की गवाही और न्यायिक कार्रवाई:

मामले की जांच के दौरान कई गवाह सामने आए। जांच में शामिल गवाहों के बयानों के आधार पर संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई। बाद में निचली अदालत ने कुछ आरोपियों को सजा सुनाई। इसके बाद Punjab and Haryana High Court (पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट) ने कुछ दोषियों की सजा बढ़ाकर उम्रकैद कर दी। बाद में Supreme Court (सुप्रीम कोर्ट) ने भी हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

फिल्म हटने पर फिर शुरू हुई बहस:

इस पूरे घटनाक्रम पर आधारित फिल्म को पहले लंबे समय तक थिएटर में रिलीज नहीं किया जा सका। बाद में इसे ZEE5 (जी5) पर जारी किया गया, लेकिन रिलीज के लगभग 48 घंटे के भीतर ही प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। वहीं, फिल्म से जुड़े लोगों का कहना है कि यह एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है, जिसने कथित तौर पर लापता लोगों और उनके परिवारों के लिए आवाज उठाई थी।

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