इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने कक्षा 12 की दो छात्राओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया है। यह मामला मुरादाबाद (Moradabad) के बिलारी थाना क्षेत्र (Bilari Police Station Area) से जुड़ा है, जहां यूपी धर्मांतरण विरोधी कानून (UP Prohibition of Unlawful Conversion Law, 2021) के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। छात्राओं पर आरोप है कि उन्होंने अपनी सहपाठी को बुर्का पहनने के लिए मजबूर किया और उसे इस्लाम धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जताई चिंता:
इस मामले की सुनवाई जस्टिस जेजे मुनीर (Justice JJ Munir) और जस्टिस तरुण सक्सेना (Justice Tarun Saxena) की खंडपीठ ने की। कोर्ट ने युवाओं के बीच धर्म या मान्यता को दूसरों पर थोपने की प्रवृत्ति को “चिंताजनक” बताया। अदालत ने कहा कि समाज में कुछ लोग धर्म का प्रचार करने के बजाय उसे दूसरों पर थोपने की कोशिश करते हैं, जिसे रोकने के लिए वर्ष 2021 का यह कानून लागू किया गया है।
युवाओं की भूमिका पर अदालत की टिप्पणी:
कोर्ट ने अपने अवलोकन में कहा कि युवाओं का यह समय शिक्षा और कौशल विकास के लिए होता है, न कि किसी प्रकार की कट्टरता या दबावपूर्ण गतिविधियों में शामिल होने के लिए। जस्टिस जेजे मुनीर (Justice JJ Munir) और जस्टिस तरुण सक्सेना (Justice Tarun Saxena) की पीठ ने कहा कि यदि युवाओं में ऐसा रुझान पाया जाता है तो यह और भी अधिक गंभीर विषय बन जाता है, क्योंकि यह उनके भविष्य और समाज दोनों को प्रभावित कर सकता है।
प्रथम दृष्टया मामला और जांच की आवश्यकता:
अदालत ने कहा कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर यह मामला प्रथम दृष्टया (Prima Facie) गंभीर प्रतीत होता है और इसकी विस्तृत जांच आवश्यक है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी ठोस साक्ष्य के आधार पर शुरू की गई जांच को शुरुआती चरण में ही समाप्त करना उचित नहीं होगा, क्योंकि इससे कानून का उद्देश्य कमजोर हो सकता है।
सीसीटीवी फुटेज और जांच सामग्री पर टिप्पणी:
खंडपीठ ने यह भी उल्लेख किया कि मामले में पीड़िता सीसीटीवी (CCTV) फुटेज में देखी गई है, जिसमें उसे बुर्का पहनाने का प्रयास किया गया था। अदालत ने कहा कि जांच के दौरान पर्याप्त सामग्री एकत्र की गई है, जिससे यह मामला गंभीर प्रतीत होता है और गहन जांच की आवश्यकता है। इसी आधार पर एफआईआर रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया गया।
कानून के तहत कार्रवाई पर अदालत का रुख:
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यह देखना जल्दबाजी होगी कि आरोपित कृत्य यूपी धर्मांतरण निषेध अधिनियम, 2021 (UP Prohibition of Unlawful Conversion Act, 2021) के तहत दंडनीय प्रलोभन या अनुचित प्रभाव की श्रेणी में आते हैं या नहीं। सभी परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि एफआईआर को रद्द करने का कोई आधार नहीं बनता।
मामला मुरादाबाद से जुड़ा:
यह पूरा मामला मुरादाबाद (Moradabad) के बिलारी थाना क्षेत्र (Bilari Police Station) में दर्ज एफआईआर से संबंधित है। पीड़िता के भाई ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि उसकी बहन को अलीना (Alina) और शबिया (Shabia) सहित पांच मुस्लिम सहपाठियों ने ट्यूशन सेंटर में बुर्का पहनने और धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया।
शिकायत और लगाए गए आरोप:
शिकायत के अनुसार, पीड़िता मुरादाबाद में कक्षा 12 की छात्रा है और वह शाहकुंज कॉलोनी (Shahkunj Colony) स्थित ट्यूशन सेंटर जाती थी। आरोप है कि दिसंबर 2025 में एक विशेष घटना के दौरान उसे जबरन बुर्का पहनाया गया और इस्लाम धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही यह भी आरोप है कि उसे मांसाहारी भोजन के लिए भी प्रेरित करने की कोशिश की गई।
परिवार का आरोप और सामाजिक प्रभाव:
पीड़िता के भाई ने पुलिस को दी तहरीर में कहा कि उसकी बहन का ब्रेनवॉश (Brainwash) किया गया और उसे लगातार धर्म परिवर्तन के लिए उकसाया गया। उनका आरोप है कि सहपाठियों ने उसकी सोचने-समझने की क्षमता पर प्रभाव डाला। मामले में पांच छात्राओं के खिलाफ गंभीर आरोप दर्ज हैं, जिनमें अलीना (Alina) और शबिया (Shabia) भी शामिल हैं।
अंतरिम आदेश भी रद्द:
हाईकोर्ट ने आरोपी शबिया (Shabia) के पक्ष में पारित अंतरिम आदेश को भी रद्द कर दिया है। अदालत के इस निर्णय के बाद मामले की जांच अब आगे जारी रहेगी और सभी पहलुओं पर पुलिस विस्तृत जांच करेगी।
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