भारत-रूस सहयोग से रोजगार सृजन पर उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक, नए अवसरों पर बना रोडमैप
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। भारत-रूस सहयोग के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में प्रदेश के कुशल कामगारों को रूस में रोजगार उपलब्ध कराने पर सहमति बनी। इस बैठक में रोजगार सृजन, पारदर्शिता और युवाओं की सुरक्षा जैसे अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
उच्चस्तरीय बैठक का उद्देश्य और चर्चा:
06 मई 2026 को लखनऊ (Lucknow) में आयोजित इस बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार के श्रम एवं सेवायोजन विभाग (Labour and Employment Department) के मंत्री अनिल राजभर (Anil Rajbhar) और मॉस्को सरकार के डिपार्टमेंट फॉर एक्सटर्नल इकोनॉमिक एंड इंटरनेशनल रिलेशंस (Department for External Economic and International Relations) के मंत्री चेरेमिन सेर्गेई (Cheremin Sergey) के बीच संवाद हुआ। बैठक का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन के तहत प्रदेश के युवाओं को वैधानिक और सुव्यवस्थित तरीके से रूस की विभिन्न कंपनियों में रोजगार दिलाना था। दोनों पक्षों ने भारत और रूस के पारंपरिक संबंधों को मजबूत करने और कुशल मानव संसाधन की वैश्विक उपलब्धता पर सकारात्मक चर्चा की।
रूस में रोजगार के व्यापक अवसर:
बैठक के दौरान मॉस्को (Moscow) सरकार की ओर से बताया गया कि शहर में ही विभिन्न क्षेत्रों में पांच लाख से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं, जबकि रूस के अन्य हिस्सों में भी बड़ी संख्या में कुशल श्रमिकों की आवश्यकता है। विशेष रूप से निर्माण कार्य, इलेक्ट्रीशियन, प्लम्बर और कारपेंटर जैसे तकनीकी क्षेत्रों में कार्यबल की मांग पर जोर दिया गया। यह जानकारी उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोलने वाली मानी जा रही है।
आर्थिक फोरम में सहभागिता का आमंत्रण:
इस क्रम में सेंट पीटर्सबर्ग (Saint Petersburg) में आयोजित होने वाले आगामी आर्थिक फोरम में उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित किया गया है। मंत्री अनिल राजभर (Anil Rajbhar) ने इस आमंत्रण को स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया कि राज्य सरकार इस पहल में सक्रिय भागीदारी निभाएगी। इस फोरम के माध्यम से भविष्य की कार्ययोजना और सहयोग के नए आयामों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
युवाओं की सुरक्षा और पारदर्शिता पर जोर:
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि कुछ युवाओं के बीच यह भ्रांति है कि रूस में रोजगार के लिए जाने पर उन्हें सेना में शामिल किया जा सकता है। इस पर मॉस्को सरकार के मंत्री चेरेमिन सेर्गेई (Cheremin Sergey) ने आश्वस्त किया कि पूरी प्रक्रिया वैधानिक, पारदर्शी और सुरक्षित होगी तथा किसी भी प्रकार की बाध्यता नहीं होगी। युवाओं को बिना किसी डर के इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया।
भाषा प्रशिक्षण की पहल:
रूसी पक्ष की ओर से यह सुझाव भी दिया गया कि रोजगार के इच्छुक युवाओं को रूसी भाषा का ज्ञान होना आवश्यक है। इस पर उत्तर प्रदेश सरकार के श्रम एवं सेवायोजन विभाग (Labour and Employment Department) ने बताया कि वर्तमान में जापानी और जर्मन भाषाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है और जल्द ही रूसी भाषा को भी प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा, जिससे युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर अवसर मिल सकें।
अधिकारियों की सहभागिता और समन्वय:
इस बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से प्रमुख सचिव डॉ. शणमुगा सुंदरम, निदेशक नेहा प्रकाश, अपर निदेशक प्रमोद कुमार पुंडीर और जिला सेवायोजन अधिकारी मनीषा अत्री सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं मॉस्को सरकार की ओर से डारिया पुस्तावालोवा और डॉ. जॉर्ज जरिकत भी शामिल हुए। बैठक का समन्वय बीएसएल कंसल्टिंग (BSL Consulting) नोएडा के संस्थापक अरुण ज़ुरेल द्वारा किया गया।
यह पहल उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर प्रदान करने के साथ-साथ भारत और रूस के बीच आर्थिक और श्रम सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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