ट्रम्प ने भारत पर 100% टैरिफ लगाने वाला कानून रोका:बोले- हमें फायदा, रूस से कर चुका डीजल खरीद डील; अमेरिका को 6 फायदे हो सकते हैं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने से जुड़े कानून को फिलहाल रोक दिया है। शुक्रवार को उन्होंने इस फैसले से संबंधित आदेश पर हस्ताक्षर किए और इसे अमेरिका के हित में बताया। प्रस्तावित कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने का प्रावधान था। इसमें भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देश शामिल थे। ऐसे में ट्रम्प के इस फैसले को रूस से ऊर्जा व्यापार और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रूस की कमाई रोकने के लिए बनाया गया था कानून:
रूस पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े इस कानून का उद्देश्य उसकी आर्थिक आय के स्रोतों को सीमित करना था, ताकि यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध के लिए रूस को धन जुटाने में कठिनाई हो। इसके तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भी आर्थिक दबाव बनाने की व्यवस्था की गई थी। हालांकि, ट्रम्प ने फिलहाल इस दिशा में सख्त कदम उठाने से परहेज किया है। खास बात यह है कि उन्होंने 9 अक्टूबर को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के साथ डीजल खरीदने से संबंधित समझौते की घोषणा की थी। रूस से डीजल खरीदने पर लगी पाबंदियों में अप्रैल 2027 तक छूट दिए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। 30 दिन के भीतर लेना था प्रतिबंधों पर फैसला:
रूस पर प्रतिबंध लगाने से संबंधित विधेयक को लिंडसे ग्राहम एक्ट (Lindsey Graham Act) के नाम से जाना जाता है। ट्रम्प ने 18 सितंबर 2026 को इस विधेयक पर हस्ताक्षर किए थे। इससे पहले 16 सितंबर को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने इसे 262 के मुकाबले 159 मतों से मंजूरी दी थी। विधेयक पर हस्ताक्षर के बाद ट्रम्प को 30 दिनों के भीतर यह फैसला करना था कि रूस पर प्रतिबंध लगाए जाएं या नहीं। हालांकि, निर्धारित समय सीमा पूरी होने से पहले ही उन्होंने प्रतिबंधों और आयात शुल्क से जुड़े कदमों को फिलहाल रोकने का निर्णय लिया। इस फैसले को लेकर अमेरिका में राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा शुरू हो गई है। भारत के कच्चे तेल आयात में रूस की बड़ी हिस्सेदारी:
रूस पर प्रस्तावित प्रतिबंध भारत के लिए भी महत्वपूर्ण थे, क्योंकि देश अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। अगस्त 2026 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी लगभग 45 प्रतिशत थी। इस दौरान भारत ने रूस से प्रतिदिन औसतन 20.8 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था। ऐसे में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने की आशंका भारत के लिए चिंता का विषय बन सकती थी। इससे तेल आयात की लागत बढ़ने का खतरा रहता। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल (Randhir Jaiswal) ने शुक्रवार को कहा था कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए तेल की उपलब्धता और वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर निर्णय लेता है। भारत पहले भी अमेरिकी अधिकारियों के सामने इस विषय को उठा चुका है। वैश्विक संकट के बीच तेल आपूर्ति की चुनौती:
जानकारों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका के बीच रूस से तेल की आपूर्ति कम करना वैश्विक बाजार पर असर डाल सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है। ऐसी परिस्थितियों में अमेरिका के लिए रूस पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का फैसला आसान नहीं है। तेल की आपूर्ति और कीमतों के बीच संतुलन बनाए रखना अमेरिका सहित कई देशों के लिए अहम बना हुआ है। मध्यावधि चुनाव से पहले महंगाई की चिंता:
ट्रम्प ने रूस को प्रतिबंधों से राहत देने का फैसला ऐसे समय लिया है, जब अमेरिका में तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ रही है। यूक्रेन की ओर से रूस की तेल रिफाइनरियों पर किए गए हमलों के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित होने की बात कही गई है। इससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है। ट्रम्प चाहते हैं कि तेल की कीमतों में कमी आए, जिससे अमेरिका में पेट्रोल सस्ता हो सके। नवंबर में अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होने हैं। इन चुनावों में महंगाई और पेट्रोल की कीमतें मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे हो सकते हैं। यदि रिपब्लिकन पार्टी को चुनाव में नुकसान होता है, तो संसद में उसका बहुमत प्रभावित हो सकता है। ऐसे में तेल की कीमतों को नियंत्रित रखना ट्रम्प प्रशासन के लिए राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुतिन के साथ समझौते पर यूक्रेन ने जताई नाराजगी:
ट्रम्प की ओर से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ डीजल खरीदने के समझौते की घोषणा के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) ने नाराजगी जताई। यूरोपीय अधिकारियों ने भी इस फैसले का विरोध किया। इसी सप्ताह अमेरिकी संसद के दोनों प्रमुख दलों के कुछ सदस्यों ने ट्रम्प से रूसी डीजल की बिक्री पर दी गई छूट वापस लेने की मांग की थी। उनका मानना था कि रूस को ऊर्जा कारोबार से मिलने वाली आय सीमित करने के उद्देश्य से उठाए गए कदमों में ढील नहीं दी जानी चाहिए। अमेरिकी सांसदों ने फैसले की आलोचना की:
रूस पर प्रतिबंध लगाने से संबंधित विधेयक को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों दलों का समर्थन मिला था। इसके बावजूद ट्रम्प के कानून को फिलहाल रोकने के फैसले की कुछ अमेरिकी सांसदों ने आलोचना की है। न्यूयॉर्क टाइम्स (The New York Times) की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ सांसदों को पहले से आशंका थी कि ट्रम्प कानून के तहत रूस के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करेंगे। अब प्रतिबंधों को लेकर उनके फैसले ने अमेरिका की रूस नीति, ऊर्जा व्यापार और यूक्रेन युद्ध से जुड़े आर्थिक दबावों पर बहस को फिर तेज कर दिया है।
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