Ghazipur: नपा चेयरमैन सरिता अग्रवाल को शासन से कारण बताओं नोटिस जारी
गाजीपुर (Ghazipur) नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष सरिता अग्रवाल (Sarita Agrawal) को वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में शासन ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। लखनऊ (Lucknow) के नगर विकास विभाग-6 की ओर से 7 अक्टूबर को जारी नोटिस में 18 शिकायतों की जांच का उल्लेख किया गया है। इनमें से सात मामलों में प्रारंभिक जांच के दौरान आरोप सही पाए गए हैं। मामला सड़क और नाली निर्माण कार्यों में निर्धारित निविदा से अधिक भुगतान और सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना धनराशि जारी किए जाने से संबंधित है।
18 शिकायतों में सात मामलों की जांच में आरोप सही:
नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित शिकायतों की जांच की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुल 18 शिकायतों की जांच के बाद सात मामलों में प्रारंभिक जांच के दौरान आरोप सही पाए गए। इन मामलों में निर्माण कार्यों के भुगतान और वित्तीय प्रक्रिया के पालन को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
जांच में सामने आया कि सड़क और नाली निर्माण के कुछ कार्यों में निर्धारित निविदा की राशि से अधिक भुगतान किया गया। इसके अलावा, सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना भुगतान किए जाने का मामला भी सामने आया है। इन मामलों में राज्य वित्त आयोग से प्राप्त धनराशि के भुगतान से संबंधित प्रकरण भी शामिल है।
सड़क और नाली निर्माण के भुगतान में अनियमितता:
प्रारंभिक जांच के दौरान निर्माण कार्यों में भुगतान की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। आरोप है कि कुछ कार्यों के लिए तय निविदा राशि से अधिक भुगतान किया गया। साथ ही, संबंधित अधिकारी की अनुमति के बिना भी धनराशि का भुगतान किए जाने की बात सामने आई है।
इन बिंदुओं को लेकर शासन ने नगर पालिका अध्यक्ष से जवाब मांगा है। कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने का उद्देश्य संबंधित पक्ष से स्पष्टीकरण प्राप्त करना है, ताकि मामले में आगे की प्रक्रिया निर्धारित की जा सके। फिलहाल, जांच में सामने आए आरोपों पर अध्यक्ष का पक्ष उपलब्ध नहीं कराया गया है।
15 दिन में जवाब देने का निर्देश:
नगर विकास विभाग-6 की ओर से जारी नोटिस में अध्यक्ष सरिता अग्रवाल को 15 दिन के भीतर अपना जवाब देने का निर्देश दिया गया है। यह नोटिस विशेष सचिव उदय भानु त्रिपाठी की ओर से जारी किया गया है।
नोटिस में कहा गया है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर जवाब नहीं मिलने पर उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916 की धारा 48 का उल्लेख किया गया है।
जिलाधिकारी को भी सौंपी गई जिम्मेदारी:
शासन ने जिलाधिकारी को निर्देश दिया है कि दो दिन के भीतर नोटिस अध्यक्ष को उपलब्ध कराया जाए और इसकी जानकारी शासन को दी जाए। इस निर्देश के तहत नोटिस की तामील और संबंधित सूचना भेजने की प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
अब मामले में अध्यक्ष की ओर से दिए जाने वाले जवाब के बाद आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी। प्रारंभिक जांच में सात मामलों में आरोप सही पाए जाने के आधार पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। हालांकि, मामले में अंतिम निर्णय और आगे की कार्रवाई संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
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