CJP Protest: बर्बरता का आरोप, Rahul Gandhi का एक्शन – पुलिसकर्मी के ख़िलाफ़ केरल में FIR…
दिल्ली में छात्राओं के साथ कथित मारपीट और प्राथमिकी दर्ज करने को लेकर पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। एक राजनीतिक बयान में दावा किया गया है कि दिल्ली पुलिस ने छात्राओं के साथ मारपीट की और घटना के संबंध में प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार कर रही है। बयान के अनुसार, केरल की अथिरा और राजस्थान की रितु सहित कई अन्य छात्राओं के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। इस मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बात कही गई है।
दिल्ली पुलिस पर प्राथमिकी दर्ज नहीं करने का आरोप: जारी बयान में आरोप लगाया गया है कि छात्राओं के साथ कथित मारपीट के मामले में दिल्ली पुलिस प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार कर रही है। बयान में केरल की अथिरा और राजस्थान की रितु का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। दावा है कि इन दोनों युवतियों के साथ कई अन्य लोगों को भी पुलिस की मारपीट का सामना करना पड़ा। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में दिल्ली पुलिस का पक्ष इस बयान में शामिल नहीं है।
केरल और राजस्थान के नेताओं से संपर्क: बयान में कहा गया है कि मामले को लेकर केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला (Ramesh Chennithala) और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasra) से बातचीत की गई है। इसके साथ ही दावा किया गया है कि केरल में इस घटना को लेकर शून्य प्राथमिकी (Zero FIR) पहले ही दर्ज की जा चुकी है। बयान के मुताबिक, मामले को आगे बढ़ाने और कथित रूप से जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कानूनी रास्ते अपनाए जाएंगे।
कानूनी कार्रवाई के लिए हर विकल्प अपनाने की बात: बयान में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ केरल और राजस्थान में कानूनी कार्रवाई की जाएगी और अदालतों का भी रुख किया जाएगा। इसमें कहा गया है कि कथित पुलिस कार्रवाई को बिना चुनौती दिए नहीं छोड़ा जाएगा। यह रुख ऐसे समय सामने आया है, जब छात्राओं के साथ कथित मारपीट और प्राथमिकी दर्ज करने के सवाल को लेकर पुलिस की जवाबदेही पर चिंता जताई जा रही है। फिलहाल, उपलब्ध बयान में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ किसी कानूनी कार्रवाई के अंतिम परिणाम का उल्लेख नहीं है।
दांडी मार्च के बाद धरासना सत्याग्रह का उल्लेख: बयान में वर्ष 1930 के धरासना सत्याग्रह (Dharasana Satyagraha) का भी जिक्र किया गया है। इसमें बताया गया है कि सरोजिनी नायडू (Sarojini Naidu) ने निहत्थे सत्याग्रहियों का नेतृत्व किया था, जो पुलिस की लाठियों का सामना करने पहुंचे थे। बयान के अनुसार, उस दौरान सत्याग्रहियों ने पलटकर हाथ नहीं उठाया और इस घटना पर दुनिया की नजर गई। इस ऐतिहासिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि पुलिस शारीरिक चोट पहुंचा सकती है, लेकिन सत्याग्रह की भावना को नहीं तोड़ सकती। बयान में इस उदाहरण के जरिए मौजूदा विरोध-प्रदर्शन में शामिल युवाओं के साहस और दृढ़ संकल्प को रेखांकित किया गया है।
युवाओं और छात्राओं के समर्थन में संदेश: बयान में कहा गया है कि भारत के युवा, विशेषकर युवा महिलाएं, निडर हैं और लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट होकर खड़ी हैं। इसमें प्रदर्शन कर रहे युवाओं के प्रति समर्थन व्यक्त किया गया है। साथ ही, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) का नाम लेते हुए दिल्ली पुलिस की कथित कार्रवाई की आलोचना की गई है। यह पूरा मामला छात्राओं के साथ कथित मारपीट, प्राथमिकी दर्ज करने और संबंधित पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़े आरोपों पर केंद्रित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और दिल्ली पुलिस का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध कराए गए बयान में शामिल नहीं है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाएं महत्वपूर्ण होंगी।
इस बयान से संबंधित पूरा कार्यक्रम देखने के लिए यह वीडियो लिंक साझा किया गया है: https://youtu.be/GnBaFZi8onM?si=rwO1VhPpJQzojOuq
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