बिहार में अनंत सिंह के बयान से सियासी घमासान, जेडीयू नेता शक्ति सिंह ने नीतीश कुमार पर लगाए गंभीर आरोप
बिहार में विधान परिषद चुनाव के बीच मोकामा के विधायक अनंत सिंह के बयान को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से जुड़े इस मामले में पार्टी प्रवक्ता शक्ति सिंह ने नीतीश कुमार और अनंत सिंह को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। शक्ति सिंह का दावा है कि नीतीश कुमार के कहने पर अनंत सिंह ने नौ लोगों की हत्या करवाई थी। यह विवाद अनंत सिंह के उस बयान के बाद सामने आया, जिसमें उन्होंने नीतीश कुमार के साथ अपने पुराने संबंधों का जिक्र करते हुए कहा था कि उन्होंने उनके साथ रहते हुए अपने नौ लोगों की हत्या करवाई। इस बयान को लेकर बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
शक्ति सिंह ने अनंत सिंह के बयान पर उठाए सवाल:
जेडीयू प्रवक्ता शक्ति सिंह ने अनंत सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पिछले 20 वर्षों के दौरान सत्ता में रहते हुए क्या-क्या हुआ, यह अब सामने आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अनंत सिंह ने खुद अपने नौ लोगों की हत्या करवाने की बात कही है। शक्ति सिंह के मुताबिक, इस पूरे मामले की जिम्मेदारी उन लोगों पर भी आती है, जिनके संरक्षण में कथित तौर पर ऐसी घटनाएं हुईं।
उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता में बने रहने के लिए कई लोगों की बलि चढ़ाई गई। शक्ति सिंह ने अनंत सिंह के बयान का हवाला देते हुए मामले को गंभीर बताया और कहा कि पुराने घटनाक्रम को लेकर जवाबदेही तय होनी चाहिए। हालांकि, उनके बयान में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती।
अनंत सिंह ने साक्षात्कार में क्या कहा था?:
विवाद की शुरुआत मोकामा विधायक अनंत सिंह के एक साक्षात्कार से हुई। समाचार एजेंसी आईएएनएस (IANS) को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने नीतीश कुमार के साथ अपने पुराने संबंधों का उल्लेख किया था। अनंत सिंह ने कहा था कि उनके जितने बलिदान किसने दिए हैं। उन्होंने उस समय का जिक्र किया, जब उनके अनुसार नीतीश कुमार की राजनीतिक स्थिति आज जैसी नहीं थी।
अनंत सिंह ने अपने बयान में कहा कि नीतीश कुमार के साथ रहते हुए उन्होंने अपने नौ लोगों की हत्या करवाई। उनके इस कथन के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया। शक्ति सिंह ने इसी बयान को आधार बनाकर नीतीश कुमार और अनंत सिंह के पुराने संबंधों को लेकर सवाल उठाए हैं।
2004 की लदमा मुठभेड़ का भी हुआ जिक्र:
अनंत सिंह के बयान के संदर्भ में वर्ष 2004 में पटना जिले के बाढ़ थाना क्षेत्र के लदमा गांव में हुई पुलिस मुठभेड़ का उल्लेख किया जा रहा है। उस समय अनंत सिंह के गिरोह और विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस घटना में अनंत सिंह के गिरोह से जुड़े आठ लोगों की मौत हुई थी। वहीं, गोली लगने से घायल एसटीएफ जवान रघुवंश प्रताप सिंह की पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) ले जाते समय मौत हो गई थी।
इस मुठभेड़ में मारे गए लोगों की पहचान भीम सिंह, डेनी, चिंटू कुमार, गणेश कुमार, बाल्मीकि सिंह, सुनील कुमार, रजनीश और सुरेंद्र कहार उर्फ बिट्ठल के रूप में बताई गई थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ये लोग पटना जिले के भीतरी इलाकों में हत्या, अपहरण, डकैती, लूट और रंगदारी से जुड़े एक दर्जन से अधिक मामलों में पुलिस को वांछित थे।
छापेमारी में पांच लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी:
मुठभेड़ के बाद पुलिस ने अनंत सिंह के पैतृक गांव लदमा में दिनभर छापेमारी की थी। इस दौरान पांच लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई थी। गिरफ्तार किए गए लोगों में बिमल महतो, गुड्डू राम, कुमार भैरव, नंदन कुमार और सुनील राम के नाम शामिल थे।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने गांव से चार अर्ध-स्वचालित राइफलें, दो दो नाली बंदूकें, दो देसी पिस्तौल और कारतूस बरामद किए थे। बरामद कारतूसों में 70 खाली और 25 जिंदा कारतूस शामिल बताए गए थे।
अनंत सिंह के घर में सुरंग मिलने की बात:
मुठभेड़ के बाद पुलिस ने अनंत सिंह के दो मंजिला घर पर भी छापा मारा था। उस दौरान घर में एक सुरंग होने की बात सामने आई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वहां से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था और हथियार भी बरामद किए गए थे।
उस समय पुलिस ने बताया था कि अपराधी हथियारों और गोला-बारूद के साथ घर में बनी सुरंग में छिपते थे। बताया गया था कि यह सुरंग एक तालाब तक जाती थी। वर्ष 2004 की इस घटना का जिक्र अब अनंत सिंह के बयान और उस पर दी गई राजनीतिक प्रतिक्रिया के संदर्भ में किया जा रहा है।
विधान परिषद चुनाव के बीच बढ़ा राजनीतिक विवाद:
बिहार में विधान परिषद चुनाव के बीच अनंत सिंह के बयान और शक्ति सिंह की प्रतिक्रिया ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। अनंत सिंह ने अपने पुराने संबंधों और कथित बलिदानों का जिक्र किया, जबकि शक्ति सिंह ने उनके बयान को लेकर नीतीश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
इस मामले में बयान और आरोपों को अलग-अलग समझना जरूरी है। शक्ति सिंह के दावे अपने आप में किसी आरोप को प्रमाणित नहीं करते। घटना से जुड़ी जिम्मेदारी और तथ्यों पर निष्कर्ष संबंधित साक्ष्यों तथा आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
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