लखनऊ में छोटे राज्यों के गठन की मांग, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच स्थापित करने पर जोर
देश में छोटे राज्यों के गठन की मांग को लेकर पिछले 35 से 40 वर्षों से प्रयास कर रहे फेडरेशन ऑफ न्यू स्मॉलर स्टेट्स ने एक बार फिर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। राजधानी लखनऊ के यूपी प्रेस क्लब में संगठन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष रामपाल मंडी ने कहा कि छोटे राज्यों का गठन प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी बनाने और क्षेत्रीय विकास को गति देने का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। उन्होंने कहा कि बड़े राज्यों में आबादी और भौगोलिक विस्तार के कारण प्रशासनिक चुनौतियां बढ़ जाती हैं। ऐसे में छोटे राज्यों के गठन से जनता तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाने और स्थानीय समस्याओं का समाधान करने में मदद मिल सकती है। इस दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उच्च न्यायालय की पीठ स्थापित करने की मांग भी फिर उठाई गई। 35 से 40 वर्षों से छोटे राज्यों के गठन की मांग:
फेडरेशन ऑफ न्यू स्मॉलर स्टेट्स पिछले लगभग 35 से 40 वर्षों से देश में छोटे राज्यों के गठन की मांग को लेकर प्रयासरत है। संगठन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष रामपाल मंडी ने कहा कि छोटे राज्यों का निर्माण केवल प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव का विषय नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और क्षेत्रीय विकास को गति देना भी है। उन्होंने छोटे राज्यों के गठन को प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में जरूरी बताया। उनका कहना है कि शासन की व्यवस्था जितनी सुगम होगी, आम जनता तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाने और लोगों की समस्याओं का समाधान करने में उतनी ही आसानी हो सकती है। उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, झारखंड और तेलंगाना का दिया उदाहरण:
रामपाल मंडी ने उत्तराखंड (Uttarakhand), छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh), झारखंड (Jharkhand) और तेलंगाना (Telangana) जैसे राज्यों के गठन का उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों के निर्माण के पीछे लंबे समय से चली आ रही मांगें और प्रयास रहे हैं। छोटे राज्यों के समर्थकों ने भी इनके गठन की मांग को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि केंद्र में सरकार किसी भी राजनीतिक दल की रही हो, छोटे राज्यों के गठन का मुद्दा देश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में लगातार चर्चा का विषय बना रहा है। संगठन का मानना है कि इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, ताकि विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार विकास और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके। बड़े राज्य के कारण प्रशासनिक चुनौतियों का मुद्दा:
रामपाल मंडी ने कहा कि उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) जनसंख्या के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्यों में शामिल है। इतनी बड़ी आबादी वाले प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था संचालित करना एक बड़ी चुनौती है। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को शासन, सचिवालय, शिक्षा और अन्य प्रशासनिक सुविधाओं तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि छोटे राज्यों के गठन से प्रशासनिक कार्यों को अधिक सुगम बनाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इससे क्षेत्रीय जरूरतों पर अधिक ध्यान देने और आम जनता की समस्याओं का समय पर समाधान करने में मदद मिल सकती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उच्च न्यायालय की पीठ की मांग:
इस दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उच्च न्यायालय की पीठ स्थापित करने की मांग भी फिर उठाई गई। इस मांग का उद्देश्य क्षेत्र के लोगों को न्यायिक सुविधाओं तक पहुंचने में होने वाली कठिनाइयों को कम करना है। संगठन की ओर से छोटे राज्यों के गठन और क्षेत्रीय स्तर पर सुविधाओं के विस्तार को विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों के रूप में सामने रखा गया। रामपाल मंडी ने छोटे राज्यों के गठन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था को जनता की जरूरतों के अनुरूप बनाने और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए इस विषय पर विचार किया जाना चाहिए। क्षेत्रीय विकास और जनसुविधाओं पर जोर:
फेडरेशन ऑफ न्यू स्मॉलर स्टेट्स की ओर से उठाई गई मांग का मुख्य आधार प्रशासनिक पहुंच, जनसुविधाओं में सुधार और क्षेत्रीय विकास है। संगठन का कहना है कि छोटे राज्यों के गठन पर विचार करने से शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं। संगठन ने छोटे राज्यों के गठन की मांग को फिर सामने रखकर इस विषय पर चर्चा तेज करने पर जोर दिया है। वहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उच्च न्यायालय की पीठ स्थापित करने की मांग भी क्षेत्रीय सुविधाओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में उठाई गई।
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कानूनी सूचना: इस खबर में संगठन की ओर से व्यक्त विचारों और मांगों को प्रस्तुत किया गया है। छोटे राज्यों के गठन और उच्च न्यायालय की पीठ से संबंधित बातें संगठन के पक्ष के रूप में दी गई हैं।
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रिपोर्टर: संतोष कुमार