ED ने सुभाष चंद्रा के खिलाफ दर्ज किया मनी लॉन्ड्रिंग का केस, पढ़ें पूरा मामला
मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा (Subhash Chandra) की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate-ED) ने कथित कर्ज धोखाधड़ी से जुड़े मामले में उनके खिलाफ धन शोधन का मुकदमा दर्ज किया है। अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (LIC Housing Finance Limited) को करीब 1,322 करोड़ रुपये का नुकसान होने का आरोप है। यह मामला दो कर्जों से जुड़ा है, जिनकी कुल स्वीकृत राशि 980 करोड़ रुपये बताई गई है। यह जानकारी सोमवार, 2 नवंबर 2026 को सामने आई।
आरोप है कि सुभाष चंद्रा ने कर्ज प्राप्त करने के लिए अपनी कुल संपत्ति का मूल्य बढ़ा-चढ़ाकर दर्शाया था। इसके आधार पर कर्ज मंजूर कराए गए, लेकिन बाद में उनकी अदायगी में चूक हुई। फिलहाल ये आरोप जांच के दायरे में हैं और मामले में सुभाष चंद्रा की ओर से प्रतिक्रिया सामने आने का इंतजार है।
सीबीआई की प्राथमिकी के आधार पर ईडी की कार्रवाई:
अधिकारियों के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (Central Bureau of Investigation-CBI) की ओर से दर्ज प्राथमिकी के आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया है। इससे पहले लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड की शिकायत पर सीबीआई ने मुकदमा दर्ज किया था।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कर्ज मंजूर कराने के लिए सुभाष चंद्रा की ओर से जमा कराए गए संपत्ति संबंधी प्रमाणपत्रों पर भरोसा किया गया था। बाद में दोनों कर्जों के भुगतान में चूक होने के कारण वित्तीय संस्थान को भारी नुकसान होने का दावा किया गया।
दो कर्जों के जरिए 980 करोड़ रुपये की राशि:
लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड की शिकायत के मुताबिक, सुभाष चंद्रा की ओर से प्रस्तुत संपत्ति मूल्य प्रमाणपत्रों के आधार पर दो अलग-अलग कर्ज स्वीकृत किए गए थे। इनकी कुल राशि 980 करोड़ रुपये थी। कंपनी का दावा है कि इन कर्जों के भुगतान में चूक के चलते उसे करीब 1,322 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
पहला कर्ज 500 करोड़ रुपये का था, जिसे वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड (Vasant Sagar Properties Pvt. Ltd.) को दिया गया था। इस कर्ज में पैन इंडिया इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (Pan India Infra Projects Pvt. Ltd.) सह-ऋणी थी।
वहीं, दूसरा कर्ज 480 करोड़ रुपये का था, जिसे डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (Digital Subscriber Management and Consultancy Services Pvt. Ltd.) को मंजूर किया गया था। इसमें स्पिरिट इंफ्रापावर एंड मल्टीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड (Spirit Infrapower and Multiventures Pvt. Ltd.) सह-ऋणी थी।
संपत्ति का मूल्य 59 हजार करोड़ रुपये दर्शाने का आरोप:
सीबीआई की प्राथमिकी में शामिल शिकायत के अनुसार, 500 करोड़ रुपये की वसंत सागर सुविधा को अधिग्रहण, अतिरिक्त कर्ज और कारोबार के विस्तार के लिए गृह-इकाई ऋण के रूप में मंजूरी दी गई थी। इसके लिए 28 मार्च 2018 को सुभाष चंद्रा की ओर से निरंतर गारंटी दिए जाने की बात कही गई है।
दूसरी ओर, 480 करोड़ रुपये की डिजिटल सुविधा को किराया छूट आधारित ऋण के रूप में अलग खाते के तहत मंजूरी दी गई थी। इस कर्ज के लिए भी सुभाष चंद्रा की ओर से गारंटी दिए जाने का आरोप है।
शिकायत के मुताबिक, 28 मार्च 2018 को डीजेएम एंड कंपनी (DJM & Co.) की ओर से जारी संपत्ति मूल्य प्रमाणपत्र में सुभाष चंद्रा की कुल संपत्ति करीब 59,000 करोड़ रुपये बताई गई थी। इसके अतिरिक्त, डिजिटल कर्ज की मंजूरी के लिए 6 जुलाई 2018 को एमपीजे एंड कंपनी (MPJ & Co.) की ओर से जारी प्रमाणपत्र पर भी आंशिक रूप से भरोसा किया गया था। इसमें उनकी संपत्ति का मूल्य 40,562 करोड़ रुपये बताया गया था।
दिवाला प्रक्रिया में संपत्ति के मूल्य को लेकर सवाल:
सीबीआई की शिकायत में कहा गया है कि दिवाला एवं दिवालियापन संहिता, 2016 (Insolvency and Bankruptcy Code) के तहत चली कार्यवाही के दौरान सुभाष चंद्रा ने पहले जमा कराए गए प्रमाणपत्रों में दर्शाई गई संपत्ति के मूल्य से इनकार किया था।
प्राथमिकी के अनुसार, वर्ष 2024 में उन्होंने अपनी कुल संपत्ति 31.79 करोड़ रुपये बताई थी, जबकि वर्ष 2017-18 के दौरान इसे अधिकतम 40,000 करोड़ रुपये तक दर्शाया गया था। शिकायत में इन आंकड़ों के बीच बड़े अंतर को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
आरोप है कि कर्ज लेने वाली कंपनियों और उनके अधिकारियों तथा निदेशकों के साथ मिलीभगत कर कथित तौर पर गलत दस्तावेज तैयार किए गए। इन दस्तावेजों के माध्यम से संपत्ति का मूल्य बढ़ाकर दिखाया गया और उसके आधार पर कर्ज मंजूर कराया गया। शिकायत में कर्ज की राशि के कथित दुरुपयोग का आरोप भी लगाया गया है। हालांकि, इन सभी बिंदुओं की जांच होनी बाकी है।
22 हजार करोड़ के दावों के मुकाबले 6.5 करोड़ की वसूली:
यह मामला सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला प्रक्रिया से भी जुड़ा हुआ है। लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड उन कर्जदाताओं में शामिल था, जिन्होंने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की ओर से मंजूर पुनर्भुगतान योजना का राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) में विरोध किया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना के तहत सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत संपत्ति से कर्जदाताओं को करीब 22,006 करोड़ रुपये के दावों के मुकाबले केवल 6.5 करोड़ रुपये की वसूली की अनुमति दी गई थी।
ईडी की जांच में वित्तीय लेन-देन की पड़ताल:
प्रवर्तन निदेशालय की ओर से दर्ज मामले में अब कथित तौर पर गलत संपत्ति मूल्य प्रमाणपत्रों के आधार पर कर्ज हासिल करने, कर्ज की रकम के इस्तेमाल और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच की जा सकती है। मामले में सामने आए आरोपों और दस्तावेजों की जांच के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
फिलहाल यह मामला आरोपों और जांच के स्तर पर है। किसी भी व्यक्ति या संबंधित कंपनी को तब तक दोषी नहीं माना जा सकता, जब तक आरोप न्यायिक प्रक्रिया में साबित न हो जाएं।
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