21 जुलाई की दोपहर करीब साढ़े तीन बजे Rahul Gandhi (राहुल गांधी), Priyanka Gandhi (प्रियंका गांधी) और Mallikarjun Kharge (मल्लिकार्जुन खड़गे) कुछ Congress (कांग्रेस) नेताओं के साथ पैदल ही प्रधानमंत्री Narendra Modi (नरेंद्र मोदी) के आवास की ओर बढ़ गए। इस कार्यक्रम की जानकारी पहले से न पुलिस को थी और न ही मीडिया को। करीब तीन घंटे 20 मिनट बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को वहां से हटाकर धरना समाप्त कराया। इस घटनाक्रम के बाद छात्र आंदोलन, संसद और राष्ट्रीय राजनीति को लेकर नई चर्चाएं तेज हो गईं।
20 जुलाई से पहले कांग्रेस की रणनीति:
Cockroach Janata Party (कॉकरोच जनता पार्टी- CJP) ने 20 जून से Jantar Mantar (जंतर-मंतर) पर प्रदर्शन शुरू किया था। इस आंदोलन में Aam Aadmi Party (आम आदमी पार्टी) और TMC सहित कई विपक्षी दलों के नेता पहुंचे, लेकिन Congress (कांग्रेस) ने शुरुआती दौर में दूरी बनाए रखी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस को आशंका थी कि पेपर लीक जैसे अहम मुद्दे पर CJP का आंदोलन उसकी राजनीतिक भूमिका को प्रभावित कर सकता है।
17 जुलाई को Rahul Gandhi (राहुल गांधी) ने Dehradun (देहरादून) में NEET पेपर लीक को लेकर “छात्रों की गूंज” कार्यक्रम आयोजित किया। पहले यह कार्यक्रम परेड ग्राउंड में प्रस्तावित था, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के कारण इसे एक स्कूल में आयोजित किया गया। स्थान परिवर्तन से पहले कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच टकराव भी हुआ। राहुल गांधी ने छात्रों को संबोधित करते हुए पेपर लीक के मुद्दे पर विस्तार से अपनी बात रखी, हालांकि इस कार्यक्रम को अपेक्षित चर्चा नहीं मिली।
जंतर-मंतर को लेकर बदला कांग्रेस का रुख:
मानसून सत्र शुरू होने से पहले Congress Parliamentary Party (कांग्रेस संसदीय दल) की बैठक के बाद CJP को लेकर कांग्रेस का रुख नरम होता दिखाई दिया। 17 जुलाई को Rajya Sabha (राज्यसभा) सांसद Pawan Khera (पवन खेड़ा) ने Jantar Mantar (जंतर-मंतर) पहुंचकर Sonam Wangchuk (सोनम वांगचुक) से मुलाकात की।
इसके बाद 20 जुलाई को Mallikarjun Kharge (मल्लिकार्जुन खड़गे) के कक्ष में हुई बैठक में संसद की रणनीति पर चर्चा हुई। रिपोर्ट्स के अनुसार, उस समय यह तय किया गया था कि संसद में राम मंदिर का मुद्दा उठाया जाए, जबकि NEET और CJP के आंदोलन पर अधिक जोर न दिया जाए। हालांकि 20 जुलाई को जैसे-जैसे CJP का प्रदर्शन तेज हुआ, कांग्रेस के रुख में भी बदलाव देखने को मिला।
लाठीचार्ज के बाद कांग्रेस हुई आक्रामक:
संसद से बाहर निकलने के बाद Priyanka Gandhi (प्रियंका गांधी) ने कहा कि छात्र अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं और उन पर आंसू गैस तथा बल प्रयोग किया जाना निंदनीय है। वहीं Rahul Gandhi (राहुल गांधी) ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए कहा कि छात्रों के वैध सवालों के जवाब में लाठी और हिरासत दी गई, जबकि पेपर लीक के आरोपी खुले घूम रहे हैं। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan (धर्मेंद्र प्रधान) पर भी सवाल उठाए।
21 जुलाई की सुबह राहुल गांधी और प्रियंका गांधी घायल छात्रों से मिलने अस्पताल पहुंचे। इसके बाद उनकी अगली रणनीति Jantar Mantar (जंतर-मंतर) जाने के बजाय सीधे प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देने की रही।
पीएम आवास के बाहर धरने की योजना:
रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने की योजना बेहद गोपनीय तरीके से बनाई गई थी। कांग्रेस नेताओं को Mallikarjun Kharge (मल्लिकार्जुन खड़गे) के जन्मदिन की शुभकामनाएं देने के बहाने उनके आवास बुलाया गया, जो प्रधानमंत्री आवास के नजदीक स्थित है। इसके बाद दोपहर करीब साढ़े तीन बजे सभी नेता पैदल प्रधानमंत्री आवास की ओर पहुंचे और धरने पर बैठ गए।
कुछ ही देर में Kerala (केरल) के मुख्यमंत्री VD Satheesan (वीडी सतीशन) तथा Karnataka (कर्नाटक) से DK Shivakumar (डीके शिवकुमार) भी वहां पहुंच गए। सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री Jitendra Singh (जितेंद्र सिंह) बातचीत के लिए पहुंचे, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए धरना समाप्त करा दिया।
विश्लेषकों ने बताई राजनीतिक वजह:
राजनीतिक विश्लेषक Rasheed Kidwai (रशीद किदवई) का कहना है कि राहुल गांधी छात्रों की आवाज उठाने का राजनीतिक संदेश सीधे कांग्रेस के साथ जोड़ना चाहते हैं। उनके अनुसार राहुल गांधी ने सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार किया और उसके बाद छात्रों के पक्ष में आक्रामक रुख अपनाया।
वरिष्ठ पत्रकार Adesh Rawal (आदेश रावल) के अनुसार छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को राहुल गांधी गंभीर मुद्दे के रूप में उठा रहे हैं और पार्टी के नेताओं को भी छात्रों के मुद्दों पर सक्रिय रहने का संदेश दे रहे हैं। वहीं वरिष्ठ पत्रकार Harshvardhan Tripathi (हर्षवर्धन त्रिपाठी) का मानना है कि 20 जुलाई को बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बाद कांग्रेस ने आंदोलन की गंभीरता को समझा और सक्रिय भूमिका निभाई।
वरिष्ठ पत्रकार Neerja Chowdhury (नीरजा चौधरी) के अनुसार राहुल गांधी ने आंदोलन की मांगों का दायरा बढ़ाते हुए केवल शिक्षा मंत्री ही नहीं बल्कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के इस्तीफे की भी मांग की है।
आंदोलन के भविष्य पर अलग-अलग राय:
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम का असर केवल कांग्रेस और BJP (भारतीय जनता पार्टी) तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यदि राहुल गांधी लंबे समय तक इस मुद्दे पर सक्रिय रहते हैं तो राजनीतिक चर्चा का केंद्र उनके प्रदर्शन की ओर स्थानांतरित हो सकता है।
वहीं Harshvardhan Tripathi (हर्षवर्धन त्रिपाठी) का कहना है कि CJP कोई पारंपरिक राजनीतिक दल नहीं है और उसके भविष्य का आकलन उसके नेतृत्व की आगे की रणनीति पर निर्भर करेगा। Rasheed Kidwai (रशीद किदवई) का कहना है कि CJP को लेकर लोगों के बीच अलग-अलग धारणाएं हैं और उसकी नेतृत्व संरचना को लेकर स्पष्टता नहीं है।
इसी बीच 20 जुलाई के संसद मार्च के बाद Sonam Wangchuk (सोनम वांगचुक) ने अपना अनशन जारी रखा। प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने के बाद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से जवाब और इस्तीफे की मांग की। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। वहीं Abhijeet Deepke (अभिजीत दीपके) की अगुवाई में Jantar Mantar (जंतर-मंतर) पर फिर से लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई।
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