त्रिपुरा के DGP अनुराग धनखड़ का पार्थिव शरीर पहुंचा बागपत, राजकीय सम्‍मान के साथ आज होगा अंतिम संस्‍कार

Baghpat (बागपत) के Baraut (बड़ौत) में Tripura Police (त्रिपुरा पुलिस) के DGP Anurag Dhankhar (डीजीपी अनुराग धनखड़) को अंतिम विदाई देने के लिए बुधवार सुबह बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। सुबह करीब 9 बजे उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। इससे पहले मंगलवार देर रात जब उनका पार्थिव शरीर बड़ौत स्थित आवास पहुंचा तो परिवार का माहौल बेहद भावुक हो गया। मां, पत्नी और बेटे सहित परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। अंतिम दर्शन के लिए स्थानीय लोगों, शुभचिंतकों और अधिकारियों की भीड़ लगातार उनके आवास पर पहुंचती रही।

परिवार का भावुक कर देने वाला दृश्य:

मंगलवार रात पार्थिव शरीर घर पहुंचते ही मां रगबीरी खुद को रोक नहीं सकीं। वह “मेरे बच्चे… मेरे बच्चे…” कहते हुए बेटे के पार्थिव शरीर के पास पहुंचीं और उसके चेहरे तथा गाल को सहलाकर अंतिम बार दुलार किया। पत्नी कल्पना भी पार्थिव शरीर से लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़ीं। इस दौरान परिवार के अन्य सदस्य उन्हें संभालने का प्रयास करते रहे।

कनाडा से पहुंचे बेटे Abhishek (अभिषेक) ने भी पिता को अंतिम बार देखकर अपने आंसुओं पर काबू नहीं रख सके। वह “पापा… पापा…” कहते हुए पार्थिव शरीर से लिपट गए। परिवार के इस भावुक दृश्य को देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।

त्रिपुरा से बड़ौत तक पार्थिव शरीर लाया गया:

DGP Anurag Dhankhar (डीजीपी अनुराग धनखड़) का शव 20 जुलाई को Tripura (त्रिपुरा) पुलिस मुख्यालय में मिला था। पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार यह मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है। घटना की जानकारी मिलने के बाद उनके छोटे भाई तत्काल त्रिपुरा पहुंचे। Baghpat (बागपत) के SP Suraj Rai (एसपी सूरज राय) और ASP Praveen Kumar Chauhan (एएसपी प्रवीण कुमार चौहान) भी त्रिपुरा गए।

इसके बाद Tripura Police (त्रिपुरा पुलिस) के अधिकारियों के साथ उनका पार्थिव शरीर एयर एंबुलेंस के माध्यम से Delhi (दिल्ली) लाया गया। वहां से सड़क मार्ग के जरिए मंगलवार रात करीब 11 बजे Baraut (बड़ौत) स्थित उनके आवास पहुंचाया गया। Govind Ballabh Pant Hospital (गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल), Agartala (अगरतला) से पार्थिव शरीर लाने की प्रक्रिया पूरी की गई। मौके पर ASP Praveen Singh Chauhan (एएसपी प्रवीण सिंह चौहान) पुलिस बल के साथ मौजूद रहे।

गांव से शुरू हुआ था सफर:

DGP Anurag Dhankhar (डीजीपी अनुराग धनखड़) का जन्म Biharipur (बिहारीपुर) गांव में हुआ था। उनकी शुरुआती शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय में कक्षा पांच तक हुई। इसके बाद उन्होंने Sarurpur Kherki (सरूरपुर खेड़की) के इंटर कॉलेज से 12वीं की पढ़ाई पूरी की। आगे की पढ़ाई उन्होंने Janata Vaidik Mahavidyalaya (जनता वैदिक महाविद्यालय), Baraut (बड़ौत) से बीएससी (कृषि) विषय में की।

उनके मित्र Ramesh Kumar (रमेश कुमार) ने बताया कि दोनों ने 12वीं तक साथ पढ़ाई की थी। उनके अनुसार अनुराग धनखड़ वॉलीबॉल के अच्छे खिलाड़ी थे। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह Delhi (दिल्ली) चले गए और वहीं से अपने करियर की नई शुरुआत की।

बैंक की नौकरी से आईपीएस तक का सफर:

पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 1988 में अनुराग धनखड़ ने बैंक में फील्ड ऑफिसर के रूप में पहली नौकरी शुरू की। नौकरी के साथ-साथ उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी जारी रखी। वर्ष 1994 में उनका चयन IPS (आईपीएस) के लिए हुआ और इसके बाद उन्होंने पुलिस सेवा में अपना लंबा कार्यकाल शुरू किया।

करीब तीन दशक के करियर में उन्होंने CBI, BSF, CISF और United Nations Kosovo Peace Mission (संयुक्त राष्ट्र कोसोवो शांति मिशन) में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। CBI में उन्होंने पुलिस अधीक्षक, डीआईजी, संयुक्त निदेशक और अतिरिक्त निदेशक जैसे पदों पर कार्य किया। Punjab National Bank (पंजाब नेशनल बैंक) से जुड़े करीब 13 हजार करोड़ रुपये के घोटाले और Nirav Modi (नीरव मोदी) से जुड़े चर्चित मामलों की जांच का नेतृत्व भी उन्होंने किया। इसके अलावा CISF में आईजी (पर्सनल) रहने के साथ-साथ 1984 के सिख विरोधी दंगों की विशेष जांच टीम के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभाई।

परिवार और गांव से गहरा जुड़ाव:

अनुराग धनखड़ का पैतृक गांव Biharipur (बिहारीपुर) था, जहां उनका पुश्तैनी मकान आज भी मौजूद है। हालांकि करीब पांच वर्ष पहले उनका परिवार Baraut (बड़ौत) में रहने लगा था। परिजनों के अनुसार उनका गांव से हमेशा गहरा जुड़ाव बना रहा।

उनके परिवार में मां रगबीरी, पत्नी कल्पना और बेटा Abhishek (अभिषेक) हैं, जो Canada (कनाडा) में रहते हैं। बड़े भाई Vivek Dhankhar (विवेक धनखड़) भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हैं, जबकि छोटे भाई Raviraj Dhankhar (रविराज धनखड़) बड़ौत में खिलौनों की दुकान संचालित करते हैं। उनके चचेरे भाई Rajkumar Dhankhar (राजकुमार धनखड़) ने बताया कि गांव में आज भी उनका पैतृक मकान है, हालांकि वहां वर्तमान में कोई नहीं रहता। उन्होंने यह भी बताया कि अनुराग धनखड़ के पिता सतपाल धनखड़ लगातार दो बार ग्राम प्रधान चुने गए थे और उनके बाबा हीरा सिंह धनखड़ सुपरिटेंडेंट जेलर रहे थे।

निधन की खबर से बिगड़ी मां की तबीयत:

परिजनों के अनुसार बेटे के निधन की सूचना मिलते ही मां रगबीरी की तबीयत बिगड़ गई थी। सूचना मिलने के बाद परिवार के सदस्य तत्काल त्रिपुरा के लिए रवाना हो गए थे। उनके निधन की खबर से पूरे Baghpat (बागपत) क्षेत्र में शोक का माहौल है और अंतिम विदाई देने के लिए लोगों का आवास पर लगातार पहुंचना जारी रहा।

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