कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ, 26 लोगों की हत्या कर दी गयी. जिसमे दो विदेशी थे और 24 भारतीय. 1 मुस्लिम था जो घोड़ा चलाता था, हिन्दू पर्यटकों की जान बचाने के लिए आतंकवादियों से लड़ गया, जो शायद मुस्लिम थे, उन आतंकवादियों ने घोड़े वाले को मार दिया, जो मुस्लिम था. अन्य पर्यटकों से आतंकवादियों ने उनका धर्म पुछा, जो हिन्दू थे. हजारों की संख्या में पर्यटक पहलगाम पहुंचे थे, जहाँ घूम रहे थे वहां सुरक्षा नहीं थी, स्थानीय लोगों ने आतंकवादियों से उन्हें बचाया, होटल वालों और गाड़ी वालों ने पैसा नहीं लिया, बच्चों को गोदी में छुपाकर दौड़ते हुए उन्हें घटना स्थल से दूर ले गये. बच्चा हिन्दू था, बचाने वाला मुस्लिम और पर्यटकों को मारने वाला आतंकवादी.
इतनी छोटी सी बात समझ में नहीं आती कि आतंकवादियों ने देश के उस जख्म को कुरेदा जिसमे दर्द ही दर्द है. उन्होंने केवल 26 की हत्या नहीं की, धर्म पूछकर करोंड़ों भारतीयों में नफरत फैलाने के लिए ऐसा वायरस छोड़ा कि गृह युद्ध हो जाए. लेकिन गर्व है इस देश नागरिकों पर जिन्होंने एकता दिखाते हुए, उनके नापाक मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया.
जब कोई समाज प्रगति की ओर बढ़ता है तो उसे दो चीजों का सामना करना पड़ता है, एक सही और दूसरा गलत. वो कहते हैं न एक सिक्क्के के दो पहलु होते हैं. अब साइबर क्राइम को ही ले लीजिये, एक तरफ जहाँ डिजिटल पेमेंट से हम स्मार्ट और समय की रफ़्तार के साथ आगे बढ़ रहे हैं तो वहीँ गलत करने वाले इसी का इस्तेमाल कर लोगों को लूट रहे हैं. अपराध करने वालों तरीका बदल गया है लेकिन नियत नहीं बदली. लेकिन इस बदलते समाज के बिच कुछ तो अच्छा हो रहा है कि लोग जागरूक बन रहे हैं. अब डिजिटल दुनिया में कोई गलत का प्रचार कर बरगला रहा है तो वहीँ सच भी आसानी से सामने आ रहा है. सच को छुपाना मुश्किल सा होता जा रहा है.
कश्मीर की वादियाँ भी कुछ ऐसी ही कहानियां बयां कर रही हैं…
पहलगाम हमले को लेकर सबसे बड़ा सवाल था कश्मीर के लोगों का क्या कहना है? कई तस्वीरें सामने आयीं… कश्मीर के लोगों ने आतंकवादियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और एक आवाज आई जिसने पुरे देश को शुकून दिया, वो आवाज थी कि हम भारतीय हैं…
जिस जमीन पर हमला हुआ है, वो कश्मीर की जमीन है और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है… राजनीति तो देश के अन्दर सत्ता पाने के लिए होती है लेकिन जब बात देश के सम्मान की हो तो राजनीति नहीं देश के दुश्मनों पर एक्शन होता है… मनोज सिन्हा के इस अंदाज ने यह सपष्ट सन्देश दिया है.
देश में हुए आतंकवादी हमले के खिलाफ पूरा देश जाति और धर्म के पहचान पर नहीं बल्कि भारतीय बनकर एक साथ खड़ा है, लेकिन अफ़सोस कुछ लोग हैं जिनको नफरती कीड़े ने इतना तगड़ा काटा है कि जहर कम ही नहीं हो रहा है. अरे भैया सोशल मीडिया पर आपके हिन्दू मुस्लिम के नफरत वाले पोस्ट को कहीं आतंकवादी इस्तेमाल न कर लें और ये बता कर कि देखो कैसे ये लोग दुसरे धर्म से नफरत करते हैं? नए जेहादी पैदा कर दें. सोचो भैया, क्यों आतंकवादियों के झांसे में आ रहे हो? इन्होने भारतीयों को आपस में लड़ाने के लिए ही धर्म पुछा होगा. ये बात तो अब टीवी चैनल भी कर रहे हैं, जिसके नफरत को आप ज्यादा देखते हो. नहीं समझ में आ रहा है तो कम से कम देश के प्रधानमंत्री की बात सुनों कि उनके मन में क्या है? उन्ही की इस बात से सीखो…
अब सभी की निगाहें LG मनोज सिन्हा पर टिकी हैं… आज जिस तरह कश्मीरी भारतीय होने पर गर्व कर रहे हैं ये सन्देश सुखद है…