मोबाइल चार्ज करने के बाद अधिकतर लोग फोन तो चार्जर से अलग कर लेते हैं, लेकिन चार्जर का स्विच ऑन ही छोड़ देते हैं। यह आदत लगभग हर घर में देखने को मिलती है। इसे लेकर लंबे समय से अलग-अलग राय सामने आती रही हैं। कुछ लोग इसे बिजली की बर्बादी मानते हैं, जबकि कई लोग इसे सामान्य बात कहकर नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि विज्ञान और उपलब्ध आंकड़े इस विषय पर क्या कहते हैं। क्या बिना फोन जुड़े प्लग में ऑन पड़ा चार्जर वास्तव में बिजली की खपत करता है या नहीं, आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
‘वैम्पायर पावर’ क्या होती है?:
जब किसी चार्जर को प्लग में लगाकर उसका स्विच ऑन रखा जाता है, लेकिन उससे कोई मोबाइल फोन कनेक्ट नहीं होता, तब भी वह पूरी तरह निष्क्रिय नहीं होता। इस दौरान होने वाली बिजली की खपत को तकनीकी भाषा में ‘वैम्पायर ड्रा’ (Vampire Draw), ‘फैंटम लोड’ (Phantom Load) या ‘नो-लोड पावर’ (No-load Power) कहा जाता है।
आधुनिक स्मार्टफोन चार्जर के भीतर छोटा ट्रांसफॉर्मर और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट मौजूद होते हैं। स्विच ऑन रहने की स्थिति में ये सर्किट घर की लगभग 220 वोल्ट बिजली को मोबाइल के उपयोग योग्य कम वोल्टेज, जैसे 5 वोल्ट या 9 वोल्ट में बदलने की प्रक्रिया के लिए सक्रिय रहते हैं। यही कारण है कि फोन कनेक्ट न होने के बावजूद चार्जर थोड़ी मात्रा में बिजली की खपत करता रहता है।
कितनी होती है बिजली की खपत?:
एक अच्छी गुणवत्ता वाले सामान्य चार्जर की बात करें तो बिना फोन जुड़े केवल ऑन रहने की स्थिति में वह लगभग 0.1 से 0.5 वॉट प्रति घंटा बिजली खर्च करता है।
यदि ऐसा चार्जर पूरे वर्ष, यानी 365 दिन और 24 घंटे लगातार प्लग में ऑन रहे, तो उसकी कुल बिजली खपत लगभग 1 से 4 यूनिट (kWh) तक पहुंच सकती है।
भारत में बिजली की औसत दर लगभग 6 से 8 रुपये प्रति यूनिट मानी जाए, तो एक चार्जर को पूरे साल खाली ऑन छोड़ने पर लगभग 10 से 30 रुपये तक का अतिरिक्त खर्च आ सकता है। यानी आर्थिक नुकसान बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन बिजली की अनावश्यक खपत से पूरी तरह इनकार भी नहीं किया जा सकता।
सिर्फ बिजली नहीं, सुरक्षा भी अहम मुद्दा:
हालांकि खाली चार्जर के कारण बिजली का खर्च सीमित होता है, लेकिन इससे जुड़े सुरक्षा संबंधी जोखिम अधिक महत्वपूर्ण माने जाते हैं। लंबे समय तक लगातार ऑन रहने से चार्जर के अंदर मौजूद इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स गर्म हो सकते हैं, जिससे समय के साथ उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होने और जल्दी खराब होने की आशंका बढ़ जाती है।
इसके अलावा यदि चार्जर निम्न गुणवत्ता का है या स्थानीय स्तर पर निर्मित उत्पाद है, तो लगातार करंट प्रवाहित होने की स्थिति में ओवरहीटिंग का खतरा बढ़ सकता है। बिजली के वोल्टेज में अचानक उतार-चढ़ाव (Spike) होने पर ऐसे चार्जर में शॉर्ट सर्किट या आग लगने जैसी घटनाओं की संभावना भी बनी रह सकती है।
बच्चों और पालतू जानवरों के लिए भी सावधानी जरूरी:
यदि चार्जर प्लग में ऑन हो और उसकी केबल का सिरा नीचे की ओर लटक रहा हो, तो छोटे बच्चे या पालतू जानवर उसके संपर्क में आ सकते हैं। ऐसी स्थिति में केबल को मुंह में लेने या उससे खेलने के कारण हल्का बिजली का झटका लगने जैसी आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए उपयोग के बाद चार्जर को प्लग से हटाना या कम से कम उसका स्विच बंद करना अधिक सुरक्षित माना जाता है।
निष्कर्ष:
उपलब्ध वैज्ञानिक तथ्यों और आंकड़ों के अनुसार, बिना फोन जुड़े प्लग में ऑन रखा गया चार्जर थोड़ी मात्रा में बिजली की खपत करता है। आर्थिक रूप से यह खर्च बहुत अधिक नहीं होता, लेकिन लंबे समय तक ऐसा करने से चार्जर की उम्र पर प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही ओवरहीटिंग, वोल्टेज में उतार-चढ़ाव और बच्चों या पालतू जानवरों की सुरक्षा जैसे पहलुओं को देखते हुए उपयोग के बाद चार्जर का स्विच बंद करना या उसे प्लग से निकाल देना बेहतर और सुरक्षित आदत मानी जाती है।
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