रिपोर्ट: सऊद अंसारी
Lucknow: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने 4 अक्टूबर को लखनऊ (Lucknow) में नमामि गंगे (Namami Gange) और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग (Minor Irrigation) की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जल संकट को प्रदेश की प्राथमिक चिंता बताते हुए कहा कि चेकडैम, तालाब और ब्लास्टकूप निर्माण केवल पानी रोकने का साधन नहीं है, बल्कि यह समेकित जल प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने निर्देश दिए कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की तरह जनांदोलन बनाकर चेकडैम, तालाब और ब्लास्टकूप का निर्माण और जीर्णोद्धार किया जाए।
चेकडैम और सिंचाई क्षमता में बढ़ोतरी:
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में अब तक 6,448 चेकडैमों (Check Dam) का निर्माण किया गया है। प्रत्येक चेकडैम से औसतन 20 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता विकसित होती है। कुल मिलाकर इन चेकडैमों से 1,28,960 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता सृजित हुई है और हर साल 10,000 हेक्टेयर मीटर से अधिक भूजल रिचार्ज हो रहा है। इस प्रयास से अन्नदाता किसान वर्ष में दो से तीन फसल लेने में सक्षम हुए हैं।
तालाबों और ब्लास्टकूप का जीर्णोद्धार:
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षा जल संचयन और भूजल रिचार्जिंग के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2022-23 से अब तक 1,002 चेकडैमों की डी-सिल्टिंग और मरम्मत कर उनकी क्षमता में वृद्धि की गई है। प्रदेश के 1 से 5 हेक्टेयर के 16,610 तालाबों (Ponds) में से 1,343 का पुनर्विकास और जीर्णोद्धार किया गया। वर्ष 2017-2025 तक 6,192 ब्लास्टकूप (Blast Kupp) के माध्यम से 18,576 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता सृजित की गई। मुख्यमंत्री ने कुम्हारों (Potters) को 1 अप्रैल से 15 जून तक तालाब से मुफ्त मिट्टी निकालने की छूट देने का निर्देश दिया ताकि तालाब वर्षा जल संचयन और रिचार्ज के लिए तैयार हो सकें।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य:
मुख्यमंत्री ने कहा कि 100 वर्ग मीटर से बड़े सभी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग (Rain Water Harvesting) की सुविधा अनिवार्य होनी चाहिए। यह शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जल संरक्षण को मजबूत करेगा। उन्होंने बताया कि यह कदम भविष्य में जल संकट को कम करने में निर्णायक साबित होगा।
अतिदोहित और क्रिटिकल क्षेत्रों में सुधार:
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में प्रदेश में 82 अतिदोहित (Overexploited) और 47 क्रिटिकल (Critical) क्षेत्र थे। सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप 2024 में यह घटकर 50 अतिदोहित और 45 क्रिटिकल क्षेत्र रह गए हैं। उन्होंने कहा कि आगे आने वाले वर्षों में इन क्षेत्रों को पूरी तरह सामान्य श्रेणी में लाने के लिए और तेजी से काम किया जाएगा।
जनांदोलन और सामूहिक भागीदारी:
मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे “एक पेड़ मां के नाम” अभियान ने वृक्षारोपण को जनांदोलन का रूप दिया, वैसे ही चेकडैम और तालाब निर्माण को भी जनभागीदारी से संचालित किया जाए। इससे न केवल जल संकट से निपटने में मदद मिलेगी, बल्कि कृषि, मत्स्य पालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
अधिकारियों को निर्देश:
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आदेश दिया कि हर जिले में तालाबों, ब्लास्टकूपों और चेकडैमों का फोटोग्राफिक डॉक्यूमेंटेशन किया जाए। साथ ही जनता को जागरूक करने के लिए सोशल मीडिया और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अभियान चलाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जल संरक्षण और भूजल रिचार्जिंग को लेकर प्रदेश सरकार का संकल्प अटल है और इसे समाज की भागीदारी से एक सफल मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
निष्कर्ष:
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह कदम न केवल जल संरक्षण और भूजल रिचार्जिंग के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि और मत्स्य पालन के विकास में भी सहायक होगा। ‘एक पेड़ मां’ की तरह यह “जल बचाओ अभियान” जनभागीदारी के माध्यम से बड़े स्तर पर चलाया जाएगा और प्रदेश में जल संकट को कम करने की दिशा में निर्णायक साबित होगा।
“एक पेड़ मां” की तरह “जल बचाओ अभियान”
