उत्तर प्रदेश के डिग्री कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों के लिए राज्य सरकार ने नई स्वास्थ्य सुविधा की शुरुआत की है। Agra (आगरा) में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री Yogi Adityanath (योगी आदित्यनाथ) ने रविवार को ‘मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस योजना’ का शुभारंभ किया। इस योजना के लागू होने से प्रदेश के विश्वविद्यालयों, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी डिग्री कॉलेजों के लगभग 1.28 लाख शिक्षकों तथा उनके परिवारों सहित करीब 10 लाख लोगों को कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी। योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को हर वर्ष पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाएगा।
शिक्षकों के लिए बीमा सुरक्षा का भी ऐलान:
कार्यक्रम के दौरान Yogi Adityanath (योगी आदित्यनाथ) ने शिक्षकों के लिए दुर्घटना और जीवन बीमा से जुड़ी नई सुविधाओं की भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने Punjab National Bank (PNB) (पंजाब नेशनल बैंक) के साथ समझौता किया है। इसके तहत शिक्षकों को 1.50 करोड़ रुपये तक का दुर्घटना बीमा, तीन करोड़ रुपये तक का हवाई दुर्घटना बीमा, अस्पताल में भर्ती होने पर 60 हजार रुपये तक का कैश बेनिफिट तथा 12 लाख रुपये तक का टर्म लाइफ इंश्योरेंस उपलब्ध कराया जाएगा।
सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग पर दिया संदेश:
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से छात्रों को सोशल मीडिया के सही उपयोग के प्रति जागरूक करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है और इससे दूरी बनाना संभव नहीं है। इसलिए इसका उपयोग समाज और देशहित में होना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे छात्रों को फर्जी अकाउंट, भ्रामक सूचनाओं और गलत जानकारियों से सतर्क रहने के लिए प्रेरित करें तथा सही और गलत की पहचान करना सिखाएं।
18 दिन पहले शुरू हुई थी पहली योजना:
मुख्यमंत्री ने इससे पहले Varanasi (वाराणसी) से प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के लगभग 12 लाख शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइयों के लिए भी कैशलेस इलाज योजना की शुरुआत की थी। अब इसी दिशा में डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों को भी स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में शामिल किया गया है।
हर परिवार को मिलेगा पांच लाख रुपये तक इलाज:
नई योजना के तहत जैसे ही पात्र शिक्षक का कार्ड बनेगा, उसी दिन से वह और उसके परिवार के सदस्य सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा प्राप्त कर सकेंगे। अस्पताल में भर्ती होने से लेकर दवाइयों, उपचार और डिस्चार्ज तक का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के उपचार का लाभ मिलेगा।
गंभीर बीमारियों का भी होगा उपचार:
इस योजना के अंतर्गत सरकारी और निजी सूचीबद्ध अस्पतालों में 1900 से अधिक बीमारियों के इलाज के पैकेज उपलब्ध होंगे। इनमें कैंसर, हृदय रोग, किडनी से जुड़ी समस्याएं और बड़ी सर्जरी जैसे गंभीर उपचार भी शामिल हैं। योजना का संचालन SACHIS (साचीज) संस्था करेगी और इसमें Ayushman Bharat (आयुष्मान भारत) योजना की निर्धारित उपचार दरें लागू रहेंगी।
भारतीय परंपरा में शिक्षक का सर्वोच्च स्थान:
अपने संबोधन में Yogi Adityanath (योगी आदित्यनाथ) ने कहा कि भारत की संस्कृति में शिक्षक का स्थान हमेशा सर्वोच्च रहा है। उन्होंने कहा कि जब दुनिया के कई हिस्से अज्ञान के दौर में थे, तब भारत में Takshashila (तक्षशिला) और Nalanda (नालंदा) जैसे विश्वविख्यात विश्वविद्यालय स्थापित हो चुके थे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि तक्षशिला, जो वर्तमान में Pakistan (पाकिस्तान) में स्थित है, अविभाजित भारत का हिस्सा रही है और उसका नाम भगवान राम के भाई भरत के पुत्र तक्ष के नाम पर पड़ा था।
गुरु केवल ज्ञान नहीं, सही दृष्टि भी देता है:
मुख्यमंत्री ने वैद्य जीवक से जुड़ा एक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि शिक्षा पूर्ण होने के बाद जीवक को उनके गुरु ने ऐसी वनस्पति खोजने के लिए कहा, जिसमें औषधीय गुण न हों। कई दिनों तक खोज करने के बाद भी उन्हें ऐसी कोई वनस्पति नहीं मिली। तब उन्होंने अपने गुरु से कहा कि ऐसी कोई वनस्पति नहीं है जिसमें औषधीय गुण न हों। इस पर गुरु ने उन्हें परीक्षा में सफल घोषित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रसंग बताता है कि एक सच्चा गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देता, बल्कि अपने शिष्य को सही दृष्टिकोण भी प्रदान करता है।
हर छात्र की क्षमता पहचानने की जरूरत:
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक छात्र में कोई न कोई विशेष क्षमता होती है और उसे पहचानने का कार्य शिक्षक का है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को विद्यार्थियों से लगातार संवाद बनाए रखना चाहिए, उनकी बात सुननी चाहिए और सही मार्गदर्शन देकर उन्हें उचित दिशा दिखानी चाहिए। इससे छात्रों में सकारात्मक परिवर्तन आएगा और बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे।
शैक्षणिक माहौल पर भी जताई चिंता:
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षण संस्थानों का शैक्षणिक वातावरण पहले जैसा नहीं रह गया है। किसी भी व्यक्ति में योग्यता का अभाव नहीं होता, बल्कि आवश्यकता उस योग्यता को पहचानने और निखारने वाले शिक्षक की होती है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी छात्र भटकाव का शिकार न बने।
फर्जी सूचनाओं से सतर्क रहने की सलाह:
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज लोग समाचार पत्र, टेलीविजन और स्मार्टफोन के माध्यम से जानकारी प्राप्त करते हैं। बड़ी संख्या में युवा YouTube (यूट्यूब) और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं। ऐसे में अधिक सामग्री या अधिक व्यूज वाली हर जानकारी सही हो, यह आवश्यक नहीं है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट बनाकर गलत सूचनाएं फैलाना संभव है, जिससे समाज में भ्रम और तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है। सही तथ्यों की जानकारी न होने पर व्यवस्था और भविष्य दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
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