‘बाबरी’ के लिए चाहिए 300 करोड़, मिले 1.5 करोड़:जहां मस्जिद बननी थी, वहां क्रिकेट खेल रहे बच्चे; 7 साल में नक्शा तक पास नहीं

नवंबर 2019 में आए Supreme Court (सुप्रीम कोर्ट) के फैसले के बाद Ayodhya (अयोध्या) विवाद के दो प्रमुख रास्ते तय हुए थे। विवादित 2.77 एकड़ भूमि Ram Lalla (रामलला) को सौंप दी गई, जबकि नई मस्जिद के निर्माण के लिए Dhannipur (धन्नीपुर) में पांच एकड़ जमीन आवंटित की गई। जहां एक ओर राम मंदिर का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, वहीं धन्नीपुर में प्रस्तावित मस्जिद का निर्माण अब तक शुरू नहीं हो सका है। वर्तमान में भूमि खाली पड़ी है, चारों ओर तारबंदी है और उस पर घास उग आई है। स्थानीय स्तर पर बच्चे वहां क्रिकेट खेलते दिखाई देते हैं।

मस्जिद के साथ अस्पताल और संग्रहालय की भी थी योजना:

प्रस्तावित परियोजना केवल मस्जिद तक सीमित नहीं थी। इसके साथ अस्पताल और संग्रहालय के निर्माण की भी योजना बनाई गई थी। इसके लिए करीब 300 करोड़ रुपये की आवश्यकता बताई गई, लेकिन अब तक केवल लगभग डेढ़ करोड़ रुपये का ही चंदा एकत्र हो सका। पर्याप्त धनराशि उपलब्ध न होने और आवश्यक सरकारी मंजूरियां नहीं मिलने के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। अब संबंधित ट्रस्ट छोटी मस्जिद के निर्माण की दिशा में विचार कर रहा है।

स्थानीय लोगों की उम्मीदें समय के साथ हुईं कमजोर:

करीब तीन हजार आबादी वाले Dhannipur (धन्नीपुर) गांव में लगभग 60 प्रतिशत मुस्लिम आबादी रहती है। गांव के अधिकांश लोग मस्जिद निर्माण के विषय पर खुलकर बोलने से बचते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब फैसला आया था, तब गांव में उम्मीद जगी थी कि मस्जिद के साथ अस्पताल और अन्य सुविधाएं भी विकसित होंगी, जिससे क्षेत्र के लोगों को बेहतर चिकित्सा और रोजगार के अवसर मिलेंगे। हालांकि वर्षों बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से लोगों की उम्मीदें कमजोर पड़ गई हैं।

फंड की कमी बनी सबसे बड़ी वजह:

Sunni Central Waqf Board (सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड) को Supreme Court (सुप्रीम कोर्ट) के फैसले के बाद नई मस्जिद निर्माण की जिम्मेदारी मिली थी। इसके लिए Indo-Islamic Cultural Foundation (इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन) का गठन किया गया। वर्ष 2021 में फाउंडेशन ने लोगों से आर्थिक सहयोग की अपील भी की, लेकिन अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया। फाउंडेशन के अनुसार अब तक करीब डेढ़ करोड़ रुपये ही जुटाए जा सके हैं, जबकि मूल परियोजना के लिए कहीं अधिक धनराशि की जरूरत है। इसी कारण पहले छोटी मस्जिद के निर्माण पर विचार किया जा रहा है।

लोगों की भागीदारी भी नहीं बढ़ सकी:

परियोजना से जुड़े लोगों का कहना है कि शुरुआत में मस्जिद निर्माण को लेकर उत्साह था, लेकिन समय बीतने के साथ लोगों की भागीदारी कम होती गई। उनका मानना है कि प्रस्तावित स्थल Ayodhya (अयोध्या) शहर से लगभग 25 किलोमीटर दूर होने के कारण लोगों का जुड़ाव अपेक्षा के अनुरूप नहीं बन पाया। स्थानीय स्तर पर भी इस परियोजना को लेकर पहले जैसा उत्साह अब दिखाई नहीं देता।

सरकारी मंजूरियां भी नहीं मिल सकीं:

परियोजना के सामने केवल आर्थिक चुनौती ही नहीं रही, बल्कि आवश्यक प्रशासनिक मंजूरियां भी समय पर नहीं मिल सकीं। बड़े सार्वजनिक परिसर के निर्माण के लिए अलग-अलग विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) और अन्य तकनीकी स्वीकृतियां आवश्यक होती हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार भूमि उपयोग परिवर्तन, विभिन्न विभागों की मंजूरी और नक्शे से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी न होने के कारण निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सका। संबंधित पक्षों का कहना है कि परियोजना की प्रक्रिया अब भी अधूरी है।

फिलहाल छोटी मस्जिद बनाने की तैयारी:

परियोजना से जुड़े लोगों के अनुसार वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए पहले छोटी मस्जिद का निर्माण शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए सीमित संसाधनों के साथ आगे बढ़ने पर विचार किया जा रहा है। वहीं, गांव के लोगों का कहना है कि यदि भविष्य में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी हो जाती हैं तो निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद की जा सकती है।

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