लखनऊ आग हादसे में बिछड़े बच्चे 8 घंटे बाद मिले, पिता खुशी से फूट-फूटकर रोया
लखनऊ (Lucknow) के विकास नगर (Vikas Nagar) इलाके में लगी भीषण आग ने कई परिवारों की जिंदगी को झकझोर दिया। 15 अप्रैल को हुई इस घटना में 250 से अधिक झुग्गी-झोपड़ियां जलकर राख हो गईं। इसी अफरा-तफरी के बीच कई परिवारों के बच्चे लापता हो गए थे। उन्हीं में से एक रहमान (Rehman) का परिवार भी था, जिनके दोनों छोटे बच्चे आग के दौरान बिछड़ गए थे। कई घंटों की बेचैनी और डर के बाद जब देर रात उनके बच्चे मिल गए, तो परिवार के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था।
आग के बीच बिछड़े, फिर मिली जिंदगी:
रहमान ने बताया कि जैसे-जैसे आग फैलती जा रही थी, वैसे-वैसे उम्मीद भी कम होती जा रही थी। वह और उनकी पत्नी अपने बच्चों को हर जगह ढूंढ़ते रहे, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल रहा था। हालात इतने भयावह थे कि उन्हें लगा कि शायद उन्होंने अपने बच्चों को हमेशा के लिए खो दिया। इसी दौरान सूचना मिली कि बच्चे आग की दूसरी ओर सुरक्षित हैं। देर रात जब दोनों बच्चे मिल गए, तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
गलती से चार बच्चों के लापता होने की बात:
घटना के बाद रहमान ने पहले चार बच्चों के लापता होने की बात कही थी। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपने बच्चों के गुम होने के गहरे सदमे में थे, जिसकी वजह से उन्होंने गलती से ऐसा कह दिया। उन्होंने बताया कि उनके दो ही बच्चे लापता हुए थे, जिनका नाम समीर और आलिया है।
डर और बेबसी में बीते पल:
बच्चों के लापता होने के दौरान परिवार पूरी तरह से टूट गया था। रहमान ने बताया कि उस समय सबसे बड़ा डर यही था कि कहीं बच्चे आग की चपेट में न आ गए हों। चारों ओर अफरा-तफरी और चीख-पुकार का माहौल था, जिससे स्थिति और भयावह हो गई थी। बच्चों के सुरक्षित मिलने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली।
पहले ही खो चुके थे बड़ा बेटा:
रहमान ने बताया कि कुछ महीने पहले ही उन्होंने अपने बड़े बेटे को बीमारी के कारण खो दिया था, जिसकी उम्र लगभग 12 साल थी। ऐसे में अगर इन दोनों बच्चों के साथ भी कुछ अनहोनी हो जाती, तो परिवार यह सदमा सह नहीं पाता। उन्होंने कहा कि उनकी पूरी दुनिया उनके बच्चों में ही बसती है और उनके सुरक्षित मिलने से उन्हें नई जिंदगी मिल गई है।
बच्चों की मासूम खुशी और सपना:
पिता से मिलने के बाद छोटा बेटा रहीम बेहद खुश नजर आया। उसने बताया कि वह अपने माता-पिता से अलग होकर बहुत डर गया था और लगातार रो रहा था। अब जब वह परिवार के साथ है, तो खुद को सुरक्षित महसूस कर रहा है। उसने कहा कि उसे पुलिस बहुत पसंद है और वह बड़ा होकर पुलिस बनना चाहता है।
आग में दो मासूमों की दर्दनाक मौत:
इस हादसे में जहां कुछ परिवारों को राहत मिली, वहीं कुछ के लिए यह घटना गहरा दुख लेकर आई। आग में दो छोटी बच्चियों की जलकर मौत हो गई। उनकी पहचान सतीश कुमार (Satish Kumar) की बेटियों के रूप में हुई, जो बाराबंकी (Barabanki) के काशी पुरवा इलाके के निवासी हैं। बड़ी बेटी श्रुति करीब 2 साल की थी, जबकि दूसरी बच्ची महज 2 महीने की थी।
मौके का दर्दनाक दृश्य:
घटना स्थल पर मिले निशानों से यह अंदाजा लगाया गया कि दोनों बच्चियां एक साथ सो रही थीं और आग की चपेट में आ गईं। पोस्टमार्टम हाउस में उनकी स्थिति बेहद खराब थी, जिससे पहचान करना भी मुश्किल हो गया। बच्चियों के शव देखकर परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और वे बेसुध हो गए।
हादसे ने छोड़े गहरे जख्म:
विकास नगर की इस घटना ने कई परिवारों को बेघर कर दिया है। जहां एक ओर कुछ लोगों को अपने खोए हुए परिजन वापस मिल गए, वहीं कई परिवारों ने अपनों को हमेशा के लिए खो दिया। यह हादसा उन लोगों के जीवन में गहरा घाव छोड़ गया है, जिसे भरने में लंबा समय लगेगा।
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