लखनऊ: KGMU नेत्र विभाग जांच में बड़ा खुलासा: 244 ऑपरेशन में सिर्फ एक आयुष्मान मरीज, HRF लेंस उपयोग भी कम
KGMU (King George’s Medical University) के नेत्र रोग विभाग में दवाओं और मोतियाबिंद ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले लेंस को निजी दुकानों से लिखवाने के आरोपों की जांच में लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं। जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई है कि विभाग के एक डॉक्टर ने पिछले छह महीनों में 244 मोतियाबिंद ऑपरेशन किए, लेकिन इनमें से केवल एक ही ऑपरेशन आयुष्मान भारत योजना के तहत किया गया। यह तथ्य जांच एजेंसियों के लिए गंभीर सवाल खड़े कर रहा है और पूरे मामले की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं।
जांच में सामने आए आंकड़े:
रिकॉर्ड के आधार पर जांच अधिकारियों ने पाया कि विभाग में मोतियाबिंद ऑपरेशन और अन्य सर्जरियों का बड़ा हिस्सा भुगतान आधारित रहा। सामान्य प्रक्रिया के अनुसार, लगभग 50 प्रतिशत मोतियाबिंद ऑपरेशन आयुष्मान भारत (Ayushman Bharat) और अन्य सरकारी कैशलेस योजनाओं के अंतर्गत होते हैं, लेकिन जांच में सामने आए आंकड़े इससे अलग स्थिति दर्शा रहे हैं। 244 ऑपरेशन में केवल एक मरीज का आयुष्मान योजना के तहत शामिल होना जांच को और अधिक संदिग्ध बना रहा है।
HRF लेंस उपयोग में अनियमितता:
जांच में यह भी सामने आया है कि हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (HRF) के तहत उपलब्ध कराए गए लेंसों के उपयोग में भी अपेक्षित अनुपालन नहीं किया गया। रिकॉर्ड के अनुसार HRF (HRF) लेंसों का उपयोग केवल लगभग 70 प्रतिशत मामलों में ही हुआ, जबकि निर्धारित मानक 95 से 100 प्रतिशत के बीच होना चाहिए। अधिकारियों का कहना है कि HRF प्रणाली के तहत लगभग सभी प्रकार के लेंस उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे मरीजों को बाहर से सामग्री खरीदने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए थी। इसके बावजूद कम उपयोग ने जांच को और गंभीर बना दिया है।
आयुष्मान योजना के आंकड़े:
जांच रिपोर्ट में यह तथ्य भी दर्ज किया गया है कि सामान्य परिस्थितियों में विभाग में करीब आधे मोतियाबिंद ऑपरेशन आयुष्मान भारत (Ayushman Bharat) और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत किए जाते हैं। ऐसे में केवल एक मरीज का इस योजना के अंतर्गत ऑपरेशन होना प्रशासनिक स्तर पर कई सवाल खड़े कर रहा है। रिकॉर्ड की तुलना में सामने आए यह अंतर जांच का प्रमुख आधार बन गया है।
एक डॉक्टर पर केंद्रित जांच:
सूत्रों के अनुसार, विभाग के अन्य चिकित्सकों की तुलना में एक डॉक्टर पर HRF से उपलब्ध लेंसों के कम उपयोग के आरोप प्रमुख रूप से सामने आए हैं। जांच समिति इस पहलू की गहराई से पड़ताल कर रही है और सभी संबंधित रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। विभागीय स्तर पर यह भी देखा जा रहा है कि क्या प्रक्रियाओं का पालन सही तरीके से किया गया या इसमें किसी प्रकार की अनदेखी हुई है।
मरीजों को बाहर भेजने की आशंका:
जांच एजेंसियां इस बिंदु की भी जांच कर रही हैं कि कहीं मरीजों को भुगतान आधारित सर्जरी की ओर तो नहीं मोड़ा गया और उन्हें निजी दुकानों से लेंस और दवाएं खरीदने के लिए मजबूर तो नहीं किया गया। इस पहलू को जांच में सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे सीधे तौर पर मरीजों पर आर्थिक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
शिकायत से शुरू हुई कार्रवाई:
यह पूरा मामला तब सामने आया जब गोरखपुर के एक मरीज की शिकायत मुख्यमंत्री जनता दर्शन तक पहुंची। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अस्पताल में उपलब्ध दवाओं और लेंसों के बावजूद मरीजों को बाहर से सामग्री खरीदने के लिए कहा गया। इस शिकायत के बाद ही जांच समिति का गठन किया गया और रिकॉर्ड खंगालने की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसके बाद कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।
प्रशासन की प्रतीक्षा में रिपोर्ट:
KGMU (King George’s Medical University) के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने जानकारी दी है कि जांच अभी जारी है। समिति ऑपरेशन रिकॉर्ड, मरीजों के दस्तावेज और विभागीय अभिलेखों का विस्तृत परीक्षण कर रही है। उन्होंने बताया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी।
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