पोलिश PM भारत आए,मोदी ने ‘गुड महाराजा’ का जिक्र किया:दूसरे विश्व युद्ध के बाद उन्होंने पोलैंड के 1,000 बच्चों को गुजरात में शरण दी थी
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क (Donald Tusk) ने गुरुवार को दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से मुलाकात की। टस्क 21 से 23 अक्टूबर तक भारत के दौरे पर हैं। इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच पुराने और ऐतिहासिक संबंधों की झलक भी देखने को मिली। प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान जामनगर के महाराजा दिग्विजयसिंहजी रणजीतसिंहजी जडेजा का उल्लेख किया, जिन्हें पोलैंड में ‘गुड महाराजा’ के नाम से सम्मान दिया जाता है। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने पोलैंड के करीब 1,000 बच्चों को भारत में शरण दी थी। भारत में पोलिश बच्चों को मिला था सहारा:
1939 में जर्मनी और सोवियत संघ के हमलों के बाद पोलैंड पर कब्जा हो गया था। इस दौरान बड़ी संख्या में पोलिश नागरिक बेघर हो गए, जिनमें हजारों बच्चे भी शामिल थे। ऐसे कठिन समय में भारत ने पोलिश नागरिकों को शरण देकर उनकी सहायता की। भारत में मिली इस मदद ने दोनों देशों के बीच मानवीय संबंधों की मजबूत नींव रखी। 1942 में नवानगर रियासत के महाराजा दिग्विजयसिंहजी ने जामनगर के पास बालाचड़ी में करीब 1,000 पोलिश बच्चों को आश्रय दिया। उनके रहने, खाने, पढ़ाई और इलाज की व्यवस्था की गई। बच्चों को अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़े रहने का अवसर भी मिला। इसी मानवीय पहल के कारण पोलैंड में महाराजा को ‘डोब्री महाराजा’ यानी ‘गुड महाराजा’ कहा जाने लगा। पोलिश शरणार्थियों को भारत के अन्य हिस्सों में भी जगह मिली। 1943 में कोल्हापुर रियासत के वलीवडे शिविर में करीब 5,000 पोलिश शरणार्थी रहे। यहां उनके लिए स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। 1945 में दूसरा विश्व युद्ध समाप्त होने के बाद पोलिश नागरिक अपने देश लौटने लगे। 1948 तक अधिकांश शरणार्थी पोलैंड वापस जा चुके थे। महाराजा दिग्विजयसिंहजी को पोलैंड में मिला सम्मान:
पोलिश नागरिकों की मदद के लिए महाराजा दिग्विजयसिंहजी को पोलैंड में विशेष सम्मान मिला। उनके निधन के बाद उन्हें पोलैंड के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल ‘कमांडर्स क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया गया। वर्ष 1989 में उनके योगदान को याद करते हुए पोलैंड की राजधानी वारसॉ में उनके नाम पर ‘गुड महाराजा स्क्वायर’ बनाया गया। प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड टस्क की मुलाकात में इस ऐतिहासिक प्रसंग का जिक्र दोनों देशों के पुराने संबंधों की अहमियत को दर्शाता है। 16 साल बाद भारत दौरे पर आए डोनाल्ड टस्क:
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क करीब 16 साल बाद भारत आए हैं। इससे पहले उन्होंने वर्ष 2010 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान भारत का दौरा किया था। इस बार उनके साथ करीब 100 पोलिश कंपनियों का कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी आया है। पोलैंड का लक्ष्य वर्ष 2030 तक भारत के साथ सालाना कारोबार को दोगुना करना है। दिल्ली में अपने कार्यक्रम पूरे करने के बाद टस्क 23 अक्टूबर को बेंगलुरु जाएंगे। वहां वे सूचना प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों तथा कारोबारियों से मुलाकात करेंगे। इस दौरे को दोनों देशों के बीच व्यापार और तकनीकी सहयोग बढ़ाने के प्रयासों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चार क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत करने की तैयारी:
1. रक्षा क्षेत्र में संयुक्त उत्पादन की संभावनाएं:
भारत और पोलैंड रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। दोनों देश हथियारों और रक्षा उपकरणों के डिजाइन, विकास तथा उत्पादन में मिलकर काम कर सकते हैं। इसके लिए आपसी भरोसा बढ़ाने के साथ गोपनीय जानकारी की सुरक्षा से जुड़े समझौतों की जरूरत होगी। रक्षा क्षेत्र में सहयोग से दोनों देशों के बीच औद्योगिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं। 2. वर्ष 2030 तक कारोबार दोगुना करने का लक्ष्य:
पोलैंड भारत के साथ सालाना कारोबार को वर्ष 2030 तक दोगुना करना चाहता है। इसी उद्देश्य से करीब 100 कंपनियों का प्रतिनिधिमंडल भारत आया है। ये कंपनियां भारतीय बाजार में कारोबार बढ़ाने और नई साझेदारियों की संभावनाएं तलाशेंगी। भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता भी दोनों पक्षों के कारोबारी संबंधों को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है। 3. अंतरिक्ष और तकनीकी क्षेत्र में सहयोग:
भारत और पोलैंड के बीच अंतरिक्ष, सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल तकनीक और बैटरी पुनर्चक्रण जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं हैं। पोलैंड की खाद्य प्रसंस्करण, खनन और मशीनरी के क्षेत्र में भी अच्छी पकड़ है। डोनाल्ड टस्क नई दिल्ली में भारत-पोलैंड व्यापार मंच में हिस्सा लेंगे। इसके बाद 23 अक्टूबर को बेंगलुरु में तकनीक और अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों तथा कारोबारियों के साथ उनकी मुलाकात प्रस्तावित है। 4. यूक्रेन में शांति के प्रयासों पर भी चर्चा:
पोलैंड भारत को उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में देखता है। दोनों देश यूक्रेन में शांति की कोशिशों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी साथ काम करना चाहते हैं। प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क का यह दौरा ऐतिहासिक संबंधों को याद करने के साथ-साथ रक्षा, व्यापार, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्रों में भारत-पोलैंड साझेदारी को आगे बढ़ाने का अवसर है।
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