मंत्री राजभर बोले- आजम को अखिलेश यादव ने जेल भिजवाया:आगरा में विपक्ष के खिलाफ पोस्टर लगे, राहुल को जिन्ना का एजेंट बताया
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की रामपुर जेल में आजम खान से हुई मुलाकात पर सवाल उठाए हैं। वहीं, आगरा में विपक्षी नेताओं को लेकर लगाए गए विवादित पोस्टर चर्चा में हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने वोटों में कथित छेड़छाड़ को लेकर दस्तावेजों के आधार पर सवाल उठाने की बात कही है। इन घटनाक्रमों के बीच प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। आजम खान से मुलाकात पर ओपी राजभर का तंज:
मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव की रामपुर जेल में आजम खान से हुई मुलाकात को चुनावी कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल चुनावी जुमला है। राजभर ने सवाल उठाया कि यदि आजम खान लंबे समय से जेल में बंद हैं, तो अखिलेश यादव उनसे पहले मिलने क्यों नहीं गए। राजभर के मुताबिक, चुनाव नजदीक आने के बाद इस मुलाकात के जरिए मुस्लिम मतदाताओं को राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव आजम खान के हितैषी के रूप में खुद को पेश करना चाहते हैं, जबकि आजम खान की जेल में बंद होने की स्थिति के लिए वह सपा सरकार के कार्यकाल को जिम्मेदार ठहराते हैं। राजभर ने अपने बयान में कहा कि सरकार आजम खान ने बनवाई, लेकिन आर्थिक लाभ अखिलेश यादव ने उठाया और जेल आजम खान को जाना पड़ा। यह राजभर का राजनीतिक आरोप है। इस संबंध में अखिलेश यादव या समाजवादी पार्टी का पक्ष उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है। आगरा में विपक्षी नेताओं के खिलाफ विवादित पोस्टर:
आगरा में शमसाबाद रोड स्थित राजपुर चुंगी पर योगी यूथ ब्रिगेड की ओर से लगाए गए पोस्टर चर्चा में हैं। इन पोस्टरों में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं की तस्वीरें लगाई गई हैं। पोस्टर पर इन नेताओं के लिए ‘देश के गद्दार और जिन्ना के एजेंट’ जैसे आपत्तिजनक शब्द लिखे गए हैं। पोस्टर पर ‘योगी यूथ ब्रिगेड, आगरा’ का नाम भी दर्ज है। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार मुख्यमंत्री बनाने का संकल्प जताया गया है। पोस्टर में सीजेपी के अभिजीत दीपके की तस्वीर भी दिखाई गई है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक नेताओं को लेकर इस तरह के पोस्टर लगाए जाने से प्रदेश का सियासी माहौल चर्चा में आ गया है। हालांकि, पोस्टर में लगाए गए आरोप और आपत्तिजनक विशेषण संबंधित संगठन की ओर से व्यक्त किए गए राजनीतिक विचार हैं। इन्हें किसी नेता के खिलाफ प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वोटों में कथित छेड़छाड़ पर इमरान मसूद का बयान:
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने वोटों में कथित छेड़छाड़ को लेकर कहा कि उनकी पार्टी केवल आरोप नहीं लगा रही, बल्कि सबूत के तौर पर दस्तावेज पेश कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि दस्तावेजों में सामने आए तथ्यों को गलत बताया जा रहा है, तो उन्हें गलत साबित कैसे किया जाएगा। मसूद ने दावा किया कि 13 हजार वोटों के साथ छेड़छाड़ को सामान्य गलती नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि जब इतनी बड़ी संख्या में वोटों का मामला सामने हो, तो उसे महज गलती बताकर खारिज नहीं किया जाना चाहिए। उनके बयान में दस्तावेजों को सबूत के रूप में पेश करने की बात कही गई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि या संबंधित अधिकारियों का पक्ष शामिल नहीं है। स्नातक और शिक्षक मतदाताओं को विशेष अवकाश:
राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक, लखनऊ में ऐसे कर्मचारी जो विश्वविद्यालय से स्नातक हैं और स्नातक या शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के वैध मतदाता हैं, उन्हें मतदान के दिन विशेष आकस्मिक अवकाश दिया जाएगा। यह अवकाश 23 अक्टूबर को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए निर्धारित किया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य संबंधित मतदाताओं को मतदान का अवसर उपलब्ध कराना है। हालांकि, दी गई जानकारी में निर्वाचन क्षेत्र और अवकाश से जुड़ी विस्तृत प्रशासनिक शर्तों का उल्लेख नहीं है। 2027 के चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी:
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले नेताओं के बयान और राजनीतिक गतिविधियां चर्चा में हैं। एक ओर ओपी राजभर ने आजम खान से अखिलेश यादव की मुलाकात पर सवाल उठाए हैं, तो दूसरी ओर आगरा में लगाए गए पोस्टरों के जरिए विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया गया है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी वोटों में कथित छेड़छाड़ को लेकर दस्तावेजों का हवाला दिया है। इन घटनाक्रमों में अलग-अलग राजनीतिक दलों और संगठनों के आरोप तथा दावे सामने आए हैं। संबंधित मामलों में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना जरूरी है।
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