Video:बलिया: कटहल नाले का विकास या किसानों का विनाश? 27 गांवों की फसलें पानी में डूबीं, अन्नदाताओं पर रोजी-रोटी का संकट
उत्तर प्रदेश के बलिया (Ballia) जनपद के शंकरपुर (Shankarpur) गांव और आसपास के क्षेत्रों में कटहल नाला (Kathal Nala) के सुंदरीकरण कार्य को लेकर किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। क्षेत्र के किसानों का आरोप है कि विकास और सुंदरीकरण के नाम पर किए जा रहे कार्यों के कारण नाले का प्राकृतिक जल प्रवाह प्रभावित हो गया है, जिससे बड़े पैमाने पर जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है। इसका सीधा असर किसानों की खेती और आजीविका पर पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले समय में हालात और अधिक गंभीर हो सकते हैं।
27 गांवों में जलभराव से बढ़ी परेशानी:
स्थानीय लोगों के अनुसार कटहल नाला क्षेत्र के जल निकासी का प्रमुख प्राकृतिक माध्यम रहा है। लेकिन सुंदरीकरण कार्य के दौरान नाले के प्राकृतिक बहाव में रुकावट आने से करीब 27 गांवों का पानी आगे नहीं निकल पा रहा है। इसके चलते पानी खेतों में जमा हो रहा है और सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि जलमग्न हो चुकी है।
किसानों का कहना है कि जिन खेतों में हर वर्ष फसलें लहलहाती थीं, वे अब तालाब जैसी स्थिति में दिखाई दे रहे हैं। लगातार पानी भरे रहने से खेती योग्य भूमि का उपयोग नहीं हो पा रहा है और ग्रामीणों की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं।
फसलों को नुकसान, खेती पर संकट:
जलभराव की स्थिति का सबसे अधिक प्रभाव किसानों की फसलों पर पड़ा है। किसानों के अनुसार लंबे समय से खेतों में पानी भरा होने के कारण पहले से लगी फसलें खराब हो चुकी हैं। वहीं नई बुआई का कार्य भी प्रभावित हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि खेती ही उनकी आय का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में खेतों का लंबे समय तक जलमग्न रहना उनके लिए आर्थिक संकट पैदा कर रहा है। किसानों के सामने भविष्य की खेती को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। उनका कहना है कि यदि पानी की निकासी नहीं हुई तो आगामी मौसम की खेती भी प्रभावित हो सकती है।
प्रशासन से समाधान की मांग:
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि कटहल नाला के सुंदरीकरण कार्य के साथ-साथ जल निकासी की प्रभावी व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि विकास कार्यों का उद्देश्य लोगों को सुविधा प्रदान करना होना चाहिए, लेकिन वर्तमान स्थिति में क्षेत्र के किसान भारी नुकसान झेल रहे हैं।
किसानों का मानना है कि यदि नाले के प्राकृतिक प्रवाह को सुचारु किया जाए और पानी निकासी के वैकल्पिक उपाय किए जाएं तो जलभराव की समस्या से राहत मिल सकती है। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप कर समस्या के समाधान की मांग की है।
सुरहा क्षेत्र के किसान भी चिंतित:
सुरहा (Surha) क्षेत्र के किसानों ने भी जलभराव को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। किसानों का कहना है कि हजारों एकड़ भूमि पहले से ही जल प्लावन की समस्या से प्रभावित है और इस वर्ष भी ऐसी ही स्थिति बनने की आशंका बनी हुई है। उनका आरोप है कि क्षेत्र में जल निकासी का प्रमुख प्राकृतिक माध्यम कटहल नाला पूरी तरह जाम होने के कारण हालात लगातार बिगड़ रहे हैं।
किसानों के अनुसार खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से खेती प्रभावित हो रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ रहा है। इस समस्या को लेकर क्षेत्र के किसान लगातार आवाज उठा रहे हैं।
किसानों की बैठक में बनी रणनीति:
समस्या के समाधान को लेकर क्षेत्र के वरिष्ठ किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जलभराव और कटहल नाला की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। किसानों ने एकजुट होकर अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाने का निर्णय लिया।
बैठक में मौजूद किसानों ने कहा कि जब तक जल निकासी की व्यवस्था नहीं होती और समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। किसानों ने एकता बनाए रखते हुए अपनी आवाज को मजबूती से उठाने का संकल्प भी दोहराया।
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रिपोर्टर: अमित कुमार