अमेठी: नौ लाख का आरओ फ्रीजर बना सफेद हाथी, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग
जायस नगर पालिका क्षेत्र में स्वच्छ एवं शीतल पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगाया गया आरओ फ्रीजर इन दिनों लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। अमेठी के जायस (Jais, Amethi) में कोतवाली गेट के समीप सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में करीब आठ से नौ लाख रुपये की लागत से लगाए गए इस आरओ फ्रीजर से लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार उपकरण ठीक से संचालित नहीं हो रहा है, जिसके चलते मरीजों, तीमारदारों और आम नागरिकों को स्वच्छ एवं ठंडे पानी की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
स्वच्छ पेयजल के उद्देश्य पर उठे सवाल:
स्वच्छ भारत अभियान के तहत नगर पालिका जायस (Nagar Palika Jais) क्षेत्र में लोगों को स्वच्छ और शीतल पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आरओ फ्रीजर लगाया गया था। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों के साथ आम नागरिकों को इसका लाभ मिलना था। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि आरओ फ्रीजर के सही तरीके से संचालित नहीं होने के कारण योजना का उद्देश्य पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है।
लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर आम नागरिकों को आसानी से स्वच्छ और ठंडा पानी मिलना चाहिए, वहां स्वयं आरओ फ्रीजर की व्यवस्था ही सुचारु नहीं है। ऐसे में लाखों रुपये की लागत से लगाए गए उपकरण के उपयोग और रखरखाव को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
आठ से नौ लाख रुपये की लागत पर सवाल:
स्थानीय लोगों के अनुसार आरओ फ्रीजर को लगाने में करीब आठ से नौ लाख रुपये की लागत आई थी। इतनी बड़ी धनराशि खर्च किए जाने के बाद भी यदि लोगों को पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है तो योजना पर सवाल खड़े होना लाजिमी है। नागरिकों ने आरओ फ्रीजर के संचालन और रखरखाव की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
लोगों का कहना है कि सरकारी धन से लगाए गए किसी भी उपकरण का उद्देश्य तभी पूरा हो सकता है, जब उसका नियमित संचालन और उचित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए। आरओ फ्रीजर के बंद या खराब स्थिति में रहने से लोगों को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है।
रखरखाव और जांच की मांग:
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि स्वच्छ एवं शीतल पेयजल उपलब्ध कराने के नाम पर सरकारी धन खर्च किया गया, लेकिन धरातल पर इसका अपेक्षित लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि यदि लाखों रुपये की लागत से लगाया गया आरओ फ्रीजर खराब होकर बंद पड़ा है तो इसकी गुणवत्ता, स्थापना, भुगतान और रखरखाव से जुड़े पहलुओं की जांच होनी चाहिए।
लोगों ने इस मामले में संबंधित अधिकारियों से स्थिति का संज्ञान लेने और आरओ फ्रीजर को दुरुस्त कराकर आम जनता के लिए चालू कराने की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि अस्पताल परिसर में आने वाले लोगों के लिए पेयजल की सुविधा महत्वपूर्ण है और इसके लिए लगाए गए उपकरण का नियमित रूप से संचालित होना जरूरी है।
नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल:
आरओ फ्रीजर की खराब स्थिति को लेकर नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल उपकरण स्थापित करना नहीं, बल्कि उसका नियमित संचालन कर आम जनता को सुविधा उपलब्ध कराना होना चाहिए।
अब देखने वाली बात यह होगी कि नगर पालिका जायस (Nagar Palika Jais) प्रशासन और संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और करीब आठ से नौ लाख रुपये की लागत से लगाए गए आरओ फ्रीजर को कब तक दुरुस्त कराकर लोगों के लिए चालू कराया जाता है।
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रिपोर्टर: वीरेंद्र सिंह