बेरोजगारों को कॉकरोच कहना क्या सही:पूर्व CJI बोले- जज भी इंसान, कोई शब्द निकल जाता है, सोशल मीडिया पर गलत मतलब निकाला जाता है
भारत के 52वें Chief Justice of India (चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया) बीआर गवई का शुक्रवार को अंतिम कार्य दिवस रहा। अपने आखिरी कार्यकाल के दौरान उन्होंने न्यायपालिका की स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता, भ्रष्टाचार, सोशल मीडिया और रिटायरमेंट के बाद जजों की भूमिका जैसे कई अहम मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की मूल संरचना का हिस्सा है और इसे हर हाल में सुरक्षित रखना जरूरी है।
उन्होंने 2021 के Tribunal Reforms Law (ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स कानून) का जिक्र करते हुए कहा कि इसकी कई प्रमुख धाराओं को इसी संवैधानिक सिद्धांत के आधार पर रद्द किया गया था। बीआर गवई ने कहा कि संविधान का सम्मान हर संस्था और नागरिक का कर्तव्य है और न्यायपालिका की जिम्मेदारी केवल फैसले देना नहीं बल्कि जनता का भरोसा बनाए रखना भी है।
धर्मनिरपेक्षता पर खुलकर बोले बीआर गवई:
इंटरव्यू के दौरान जब उनसे Bageshwar Dham (बागेश्वर धाम) के धीरेंद्र शास्त्री से मुलाकात को लेकर उठी आलोचनाओं पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनका पालन-पोषण धर्मनिरपेक्ष माहौल में हुआ है। उन्होंने बताया कि उनके पिता रा.सु. गवई विभिन्न विचारधाराओं और धर्मों के लोगों से जुड़े रहते थे।
उन्होंने कहा कि उनके घर में अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक विचारधाराओं के लोग आते थे, जिनमें Sharad Pawar (शरद पवार), Uttamrao Patil (उत्तमराव पाटिल) और Bapusaheb Kaldate (बापूसाहेब कालदाते) जैसे नाम शामिल थे। बीआर गवई ने कहा कि इसी कारण वे मंदिर, मस्जिद, दरगाह और गुरुद्वारे सभी जगह जाते हैं और हर धर्म का सम्मान करते हैं।
उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान ने हर नागरिक को उपासना और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार दिया है। उनके अनुसार धर्मनिरपेक्षता भारतीय संविधान की मूल भावना है और उसका पालन करना सभी के लिए आवश्यक है।
न्यायपालिका और भ्रष्टाचार पर रखी राय:
देश में सामने आ रहे भ्रष्टाचार के मामलों पर पूछे गए सवाल के जवाब में पूर्व CJI बीआर गवई ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कोई भी संस्था भ्रष्टाचार से पूरी तरह अछूती नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अन्य क्षेत्रों की तुलना में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के मामले कम देखने को मिलते हैं।
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका लगातार खुद में सुधार के प्रयास करती रहती है। उनके मुताबिक जजों को मिला पद सत्ता संचालन के लिए नहीं बल्कि जनता की सेवा और विश्वास कायम रखने के लिए होता है। उन्होंने कहा कि संविधान सर्वोपरि है और उसका सम्मान हर व्यक्ति को करना चाहिए।
रिटायरमेंट के बाद राजनीति पर दिया जवाब:
जब उनसे पूछा गया कि क्या जजों को सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी या राजनीतिक पद स्वीकार करना चाहिए, तो उन्होंने इसे व्यक्तिगत निर्णय बताया। हालांकि उन्होंने अपनी निजी राय साझा करते हुए कहा कि यदि किसी जज को सरकार से किसी पद की उम्मीद नहीं होती, तो उसके काम पर किसी प्रकार का दबाव नहीं रहता।
बीआर गवई ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2019 में Supreme Court (सुप्रीम कोर्ट) में जज बनने के समय ही यह तय कर लिया था कि रिटायरमेंट के बाद कोई सरकारी पद स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि वे अपनी स्वतंत्रता को पूरी तरह बनाए रखना चाहते थे और उसी सिद्धांत पर आगे बढ़े।
सोशल मीडिया और विवादित टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया:
Supreme Court (सुप्रीम कोर्ट) में बेरोजगारों को लेकर ‘कॉकरोच’ और ‘पैरासाइट’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल से जुड़े विवाद पर भी बीआर गवई ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को आवश्यकता से अधिक बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया।
उन्होंने कहा कि जज भी इंसान होते हैं और सुनवाई के दौरान कभी-कभी अनजाने में कुछ शब्द निकल जाते हैं, जिनका कोई गलत उद्देश्य नहीं होता। उनके मुताबिक सोशल मीडिया पर बिना पूरे संदर्भ को समझे ऐसे शब्दों को अलग तरीके से प्रस्तुत किया जाता है, जिससे विवाद खड़े हो जाते हैं।
उन्होंने माना कि सोशल मीडिया के कई फायदे हैं, लेकिन इसके नुकसान भी हैं। उनके अनुसार किसी भी बयान या टिप्पणी को उसके पूरे संदर्भ के साथ समझना जरूरी है।
परिवार और निजी जीवन पर भी की चर्चा:
बीआर गवई ने अपने निजी जीवन को लेकर भी बातचीत की। उन्होंने कहा कि जज के रूप में काम करते हुए वे परिवार को पर्याप्त समय नहीं दे पाए। उन्होंने बताया कि आमतौर पर लोग समझते हैं कि जज का काम केवल सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक होता है, लेकिन वास्तविकता इससे काफी अलग है।
उन्होंने कहा कि अदालत में सुनवाई से पहले मामलों का गहराई से अध्ययन करना पड़ता था और सप्ताहांत में भी कई सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होना पड़ता था। रिटायरमेंट के बाद अब वे अपने पुराने शौक पूरे कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें टेनिस खेलना और तैराकी करना पसंद है।
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