4 जुलाई से ईरान (Iran) के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई (Ali Khamenei) की अंतिम विदाई से जुड़ी रस्में शुरू हो गई हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उनका जनाजा तेहरान (Tehran), कोम (Qom), नजफ (Najaf) और इराक (Iraq) के कर्बला (Karbala) शहर से होते हुए 9 जुलाई को मशहद (Mashhad) पहुंचेगा, जहां उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। बताया जा रहा है कि इस दौरान 100 से अधिक देशों के नेताओं की मौजूदगी रहने की संभावना है, जबकि तीन करोड़ से अधिक लोगों के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।
कई शहरों से होकर निकलेगा जनाजा:
जानकारी के अनुसार, अंतिम यात्रा को कई महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक शहरों से होकर निकाला जाएगा। तेहरान से शुरू होने वाला यह सफर कोम, नजफ और कर्बला से गुजरते हुए मशहद पहुंचेगा। इन सभी स्थानों का शिया समुदाय में विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इसी वजह से अंतिम यात्रा को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
दुनियाभर की नजर इस आयोजन पर:
बताया जा रहा है कि अंतिम विदाई कार्यक्रम में 100 से अधिक देशों के नेताओं के शामिल होने की संभावना है। इसके अलावा दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग भी इस अवसर पर पहुंच सकते हैं। अनुमान है कि तीन करोड़ से ज्यादा लोग ‘शियाओं के रहबर’ कहे जाने वाले अली खामेनेई के अंतिम दर्शन करेंगे। इस कारण यह आयोजन वैश्विक स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
शिया समुदाय में मातम का विशेष महत्व:
अली खामेनेई की अंतिम विदाई के साथ शिया मुसलमानों की धार्मिक परंपराओं और मातम की परंपरा पर भी चर्चा तेज हो गई है। शिया समुदाय में शोक और मातम को धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी कारण अंतिम यात्रा और उससे जुड़ी रस्मों में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
कर्बला की शहादत से जोड़ा जा रहा संदर्भ:
जानकारी के अनुसार, अली खामेनेई की हत्या को लेकर कुछ लोग इसे कर्बला की शहादत के संदर्भ में भी देख रहे हैं। इसी वजह से इस पूरे घटनाक्रम को शिया समुदाय के बीच विशेष भावनात्मक महत्व के साथ जोड़ा जा रहा है। इस विषय पर विभिन्न स्तरों पर चर्चा भी जारी है।
आखिरी दीदार के लिए बड़ी तैयारियां:
अंतिम यात्रा को लेकर संबंधित स्थानों पर व्यापक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और अतिथियों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए आयोजन की तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया गया है। अंतिम यात्रा के दौरान लाखों लोगों के अलग-अलग चरणों में शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।
चर्चा का केंद्र बना अंतिम विदाई समारोह:
अली खामेनेई की अंतिम विदाई का यह आयोजन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। बड़ी संख्या में लोगों की संभावित भागीदारी और विभिन्न देशों के नेताओं की मौजूदगी के कारण यह कार्यक्रम वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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