वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय (Veer Bahadur Singh Purvanchal University), जौनपुर (Jaunpur) में मनोविज्ञान विषय की अध्ययन परिषद (Board of Studies of Psychology) का नवीन गठन किया गया है। विश्वविद्यालय की कुलपति एवं वैज्ञानिक प्रो. वंदना सिंह (Prof. Vandana Singh) के आदेश पर गठित इस नई परिषद में पी.जी. कॉलेज (P.G. College), गाज़ीपुर (Ghazipur) के मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष एवं विभाग प्रभारी डॉ. मनोज कुमार सिंह (Dr. Manoj Kumar Singh) को अध्ययन परिषद का संयोजक नियुक्त किया गया है।
डॉ. मनोज कुमार सिंह को मिली महत्वपूर्ण जिम्मेदारी:
विश्वविद्यालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार, अनुदानित स्नातक एवं अनुदानित परास्नातक मनोविज्ञान विभाग, पी.जी. कॉलेज (P.G. College), गाज़ीपुर (Ghazipur) के विभागाध्यक्ष एवं विभाग प्रभारी डॉ. मनोज कुमार सिंह को अध्ययन परिषद का संयोजक बनाया गया है। उनके नेतृत्व में परिषद विश्वविद्यालय के निर्धारित शैक्षणिक दायित्वों के साथ-साथ विषय के विकास और पाठ्यक्रम में आवश्यक सुधारों पर भी कार्य करेगी।
दो वरिष्ठ शिक्षाविद बने बाह्य सदस्य:
नई अध्ययन परिषद में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (Banaras Hindu University) के मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर एवं कार्मिक प्रबंधन और औद्योगिक संबंध विभाग के चेयरपर्सन प्रो. संदीप कुमार (Prof. Sandeep Kumar) को बाह्य सदस्य नामित किया गया है। इसके अलावा दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University) के मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. धनंजय कुमार (Prof. Dhananjay Kumar) को भी अध्ययन परिषद का बाह्य सदस्य नियुक्त किया गया है।
आंतरिक सदस्यों को भी किया गया शामिल:
अध्ययन परिषद में विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विषय के विद्वान सहायक आचार्यों को भी स्थान दिया गया है। परिषद के आंतरिक सदस्यों में डॉ. रविशंकर वर्मा (Dr. Ravishankar Verma), डॉ. अनीता सिंह (Dr. Anita Singh), डॉ. दया सिंधु (Dr. Daya Sindhu) तथा डॉ. आनंद कुमार श्रीवास्तव (Dr. Anand Kumar Srivastava) शामिल हैं। ये सभी सदस्य विषय से संबंधित शैक्षणिक और पाठ्यक्रम संबंधी कार्यों में अपनी भूमिका निभाएंगे।
पाठ्यक्रम को अधिक व्यावहारिक बनाने पर रहेगा जोर:
अध्ययन परिषद के संयोजक डॉ. मनोज कुमार सिंह ने कहा कि नई परिषद विश्वविद्यालय के अधिनियम, अध्यादेश और परिनियमावली के अंतर्गत निर्धारित कार्यों का निर्वहन करेगी। इसके साथ ही विशेष रूप से मनोविज्ञान विषय के पाठ्यक्रम को समयानुकूल, अद्यतन और अधिक व्यावहारिक बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा। उनका कहना है कि परिषद का उद्देश्य युवाओं को मनोविज्ञान विषय के प्रति अधिक आकर्षित करना और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना भी होगा।
रोजगार की संभावनाओं पर दिया जोर:
डॉ. मनोज कुमार सिंह ने कहा कि मनोविज्ञान विषय में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद युवाओं के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा तथा अन्य कई क्षेत्रों में रोजगार और सेवा के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि मनोविज्ञान की बेहतर समझ मानव के संज्ञान, संवेग और व्यवहार को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे व्यक्ति के व्यक्तित्व, जीवन कौशल और कार्यक्षमता का विकास होता है।
राष्ट्र निर्माण में उपयोगी होगी मनोविज्ञान शिक्षा:
डॉ. मनोज कुमार सिंह के अनुसार, मनोविज्ञान विषय की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल शैक्षणिक विकास तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह व्यक्ति को सफल, स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने के लिए भी तैयार करती है। उन्होंने कहा कि विषय की गहन समझ व्यक्ति को समाज और राष्ट्र निर्माण में बेहतर योगदान देने के योग्य बनाती है। नई अध्ययन परिषद इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए अपने कार्यों को आगे बढ़ाएगी।
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