केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देश की राजनीति में नए शिक्षा मंत्री को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद यह पहला मौका माना जा रहा है जब किसी केंद्रीय मंत्री को व्यापक विरोध-प्रदर्शन के बाद पद छोड़ना पड़ा है। इससे पहले वर्ष 2018 में तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर ने इस्तीफा दिया था, लेकिन वह मामला ‘मी टू’ आंदोलन के दौरान लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा था।

अभिजीत दीपके बोले- इस्तीफा हुआ, लेकिन आंदोलन जारी रहेगा
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे अभिजीत दीपके ने कहा कि केवल मंत्री का इस्तीफा उनकी अंतिम मांग नहीं है। उन्होंने कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक अन्य मांगें पूरी नहीं होतीं।
दीपके ने कहा कि जिन छात्रों ने आत्महत्या की, उनके परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। साथ ही प्रदर्शन के दौरान कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाए। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “मंत्री का इस्तीफा तो हो गया है, लेकिन हमारी दो और मांगे हैं। हम ऐसे नहीं जाएंगे।”
सोनम वांगचुक ने बताया लोकतंत्र की जीत
सोनम वांगचुक ने अस्पताल से सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे लोकतंत्र की जीत बताया। उन्होंने लिखा कि यह प्रत्यक्ष लोकतंत्र, शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है। उन्होंने CJP और Gen Z को बधाई देते हुए देशभर के उन नागरिकों का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने आंदोलन का समर्थन किया।
नए शिक्षा मंत्री की दौड़ में तीन नाम चर्चा में
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में तीन नेताओं के नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं।
1. जयंत चौधरी
वर्तमान में शिक्षा राज्य मंत्री हैं और उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पोते होने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के जाट मतदाताओं के बीच उनकी राजनीतिक पकड़ को देखते हुए उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।
2. सुकांत मजूमदार
वर्तमान में शिक्षा राज्य मंत्री हैं और पश्चिम बंगाल के बालूरघाट से लोकसभा सांसद हैं। माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा के राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
3. राघव चड्ढा
मई 2026 में आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों को भाजपा में शामिल कराने के बाद उनका नाम भी चर्चा में है। अगले वर्ष पंजाब विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए राजनीतिक दृष्टि से उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
मंत्रालय फिलहाल प्रधानमंत्री के पास भी रह सकता है
इन नामों के अलावा एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि नए कैबिनेट मंत्री की नियुक्ति होने तक शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सीधे प्रधानमंत्री के पास रखा जाए। माना जा रहा है कि NEET समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों के बाद मंत्रालय की निगरानी को और मजबूत बनाने के लिए ऐसा कदम उठाया जा सकता है।
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