राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके सहित उनके दो साथियों को रविवार को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को कुछ शर्तों के साथ 50-50 हजार रुपये के मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही तीनों को अगले एक वर्ष तक शांति व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश दिया गया है।
मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लेने के करीब 12 घंटे बाद देर रात छोड़ दिया। उन्हें शनिवार सुबह लगभग 8 बजे गुरुग्राम स्थित उनके आवास से उस समय हिरासत में लिया गया था, जब वह कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रात में रिहा कर दिया, लेकिन साथ ही सख्त हिदायत भी दी। दिल्ली पुलिस के अनुसार, यदि ध्रुव राठी दोबारा बिना अनुमति जंतर-मंतर जाने या किसी विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का प्रयास करते हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी पड़ी भारी!
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान मेट्रो सेवाएं बंद करने, इंटरनेट बाधित करने और लोगों को हिरासत में लेने से संबंधित याचिकाओं पर रविवार को सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ ने सुनवाई की। अदालत ने स्पष्ट किया कि मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से चलनी चाहिए, इंटरनेट सेवाओं में बाधा नहीं आनी चाहिए और लोगों की आवाजाही पर रोक नहीं लगाई जानी चाहिए।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने मेट्रो और ट्रेन सेवाएं बंद नहीं करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद शनिवार को आदेश का उल्लंघन किया गया। इस पर अदालत ने केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए मंगलवार तक जवाब देने को कहा। साथ ही पूछा कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने की। केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा।
केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दिल्ली में इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी गई हैं और सभी मेट्रो स्टेशन तथा ट्रेनें पूरी तरह चालू हैं। उन्होंने अदालत को यह आश्वासन भी दिया कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों के कामकाज में किसी तरह की बाधा नहीं आने दी जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास से धारा 163 के नोटिस हटाने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि उसके परिसर और आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू होने की जानकारी देने वाले बोर्ड या नोटिस यदि अब तक नहीं हटाए गए हैं, तो उन्हें तत्काल हटा दिया जाए। अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतों में आने-जाने को लेकर किसी भी तरह की आशंका या भ्रम की स्थिति नहीं रहनी चाहिए।
प्रतिबंधित क्षेत्रों से बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को हिरासत में न लें
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में अवैध हिरासत पर रोक लगाने के संबंध में निर्देश दिया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंधित क्षेत्रों से बाहर शांतिपूर्ण और बिना हथियार के प्रदर्शन कर रहे लोगों को हिरासत में नहीं लिया जाए।
मेट्रो बंद करने के मामले में केंद्र और अधिकारियों को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने और लोगों को हिरासत में लेने से जुड़े मामले में अवमानना याचिका पर केंद्र सरकार तथा संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया। अदालत ने अधिकारियों से हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने को कहा कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। इसके अलावा, पहले जारी किए गए आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट भी मांगी गई।
अदालत ने अधिकारियों को मंगलवार तक अंतरिम जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
DMRC से बंद मेट्रो स्टेशनों का नक्शा मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को ऐसा नक्शा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जिसमें प्रदर्शन के दौरान बंद किए गए और चालू रहे मेट्रो स्टेशनों की जानकारी हो।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि शनिवार रात 10 बजे तक दिल्ली के सभी मेट्रो स्टेशन दोबारा खोल दिए गए थे। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी गई हैं।
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