अमेठी के तिलोई में श्रीराम कथा के नवम दिवस पर उमड़ा भक्ति का सैलाब
अमेठी (Amethi) के तिलोई स्थित आरबीएस इंटर कॉलेज (RBS Inter College) परिसर में राज्यमंत्री की ओर से आयोजित श्रीराम कथा के नवम दिवस पर श्रद्धालु भक्ति में सराबोर नजर आए। कथा व्यास आचार्य शांतनु जी महाराज ने भगवान श्रीराम के वनवास से लेकर लंका विजय और अयोध्या वापसी तक के प्रसंगों का वर्णन किया। कथा के दौरान माता शबरी की भक्ति, हनुमान जी की सेवा, विभीषण की शरणागति और भगवान श्रीराम के राजतिलक की कथा सुनकर श्रोतागण भावविभोर हो गए। वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पूजन और आरती भी की गई। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, गणमान्य लोगों और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।

अरण्य कांड के प्रसंगों से शुरू हुई कथा:
श्रीराम कथा के नवम दिवस पर कथा व्यास आचार्य शांतनु जी महाराज ने अरण्य कांड के प्रसंगों का वर्णन किया। उन्होंने जयंत के मानभंग की कथा सुनाते हुए बताया कि नारद जी के समझाने पर जयंत भगवान के पास पहुंचा और क्षमा मांगी। भगवान ने उसे क्षमा कर दिया। इसके बाद भगवान श्रीराम के महर्षि अत्रि और माता अनुसुइया के आश्रम पहुंचने का प्रसंग सुनाया गया। माता अनुसुइया ने माता सीता को स्त्री धर्म से जुड़ी अनेक बातें बताईं।
कथा व्यास ने आगे ऋषियों द्वारा भगवान को अस्थियों के ढेर दिखाए जाने का प्रसंग सुनाया। इसके बाद भगवान श्रीराम की उस प्रतिज्ञा का वर्णन किया, जिसमें उन्होंने धरती को निशाचरों से मुक्त करने का संकल्प लिया था। इन प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के जीवन और उनके आदर्शों से परिचित कराया गया।

शबरी की भक्ति और हनुमान जी की सेवा का वर्णन:
कथा के दौरान सुपर्णखा के प्रसंग के साथ गिद्धराज जटायु की मार्मिक कथा भी सुनाई गई। इसके बाद माता शबरी के प्रसंग का वर्णन करते हुए आचार्य शांतनु जी महाराज ने उन्हें धैर्य और प्रतीक्षा की प्रतिमूर्ति बताया। उन्होंने भगवान श्रीराम द्वारा शबरी को दिए गए नवधा भक्ति के उपदेश का भी विस्तार से वर्णन किया।
इसके बाद हनुमान जी के माध्यम से भगवान श्रीराम की सुग्रीव से भेंट का प्रसंग सुनाया गया। कथा व्यास ने हनुमान जी की भक्ति, समर्पण और सेवा भावना का वर्णन किया। श्रद्धालुओं ने इन प्रसंगों को भक्तिभाव के साथ सुना और पूरा वातावरण राममय हो गया।
सीता की खोज से लंका विजय तक की कथा:
आचार्य शांतनु जी महाराज ने माता सीता की खोज में हनुमान जी की भूमिका का वर्णन किया। इसके बाद नल-नील के सहयोग और वानर सेना के परिश्रम से समुद्र पर सेतु निर्माण का प्रसंग सुनाया गया। कथा में विभीषण की शरणागति और लंका में हुए भीषण युद्ध का भी विस्तार से वर्णन किया गया।
भगवान श्रीराम द्वारा रावण के उद्धार और विभीषण को लंका का राजपद सौंपे जाने का प्रसंग सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए। इसके बाद भगवान श्रीराम के माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ पुष्पक विमान से अयोध्या लौटने की कथा सुनाई गई। कथा व्यास ने बताया कि भगवान के आगमन पर अयोध्या में उत्सव का माहौल था और पूरी नगरी रोशनी से जगमगा रही थी।
भगवान श्रीराम के राजतिलक पर गूंजे बधाई गीत:
अयोध्या वापसी के प्रसंग के बाद भगवान श्रीराम के राजतिलक की कथा सुनाई गई। कथा के अनुसार, भगवान ने भरत जी को अपने हाथों से स्नान कराया और गुरु वशिष्ठ ने उनका राजतिलक किया। इस दौरान ब्राह्मणों ने आशीर्वाद दिया और राजतिलक की बधाइयां गाई जाने लगीं। इन प्रसंगों के साथ कथा स्थल का वातावरण भक्तिमय हो गया और श्रद्धालु भक्ति में डूबे नजर आए।

यजमान ने किया पूजन, जनप्रतिनिधियों ने की आरती:
श्रीराम कथा के दौरान यजमान अंकिता सिंह और बबलू सिंह ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजन किया। दातागंज, बदायूं के विधायक राजीव कुमार सिंह सहित अन्य लोगों ने आरती-पूजन कर कथा व्यास से आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर राज्यमंत्री ने कथा व्यास को प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम का संचालन धर्मेश मिश्रा ने किया। आयोजन में पूर्व केंद्रीय मंत्री राजा संजय सिंह, राजा राकेश प्रताप सिंह, रानी उपासना सिंह, कुंवर मृगांकेश्वर शरण सिंह, उत्कर्ष शरण सिंह, अर्चना सिंह, कृतिका सिंह, मुन्ना सिंह और अखंड प्रताप सिंह सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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रिपोर्टर: वीरेंद्र सिंह