संत प्रेमानंद महाराज (Premanand Maharaj) ने अपने सत्संग में भक्तों को निंदा, अपमान और विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यदि निर्दोष होने के बावजूद समाज में निंदा और तिरस्कार का सामना करना पड़े, तो बेचैन होने के बजाय इसे भगवान का कड़वा प्रसाद समझना चाहिए। इससे व्यक्ति के भीतर का अभिमान कम करने में मदद मिलती है। प्रेमानंद महाराज ने श्रद्धालुओं से कहा कि भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए मुश्किल समय में भी संयम और विश्वास बनाए रखना जरूरी है। उनका यह संदेश ऐसे समय सामने आया है, जब वृंदावन स्थित केली कुंज आश्रम (Keli Kunj Ashram) से जुड़े कुछ मामले चर्चा में हैं। यह वीडियो गुरुवार को उनके यूट्यूब चैनल ‘भजन मार्ग’ पर अपलोड किया गया।
निंदा और अपमान में भी धैर्य बनाए रखने का संदेश:
प्रेमानंद महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपना जीवन राधा-कृष्ण को समर्पित कर देता है, तो उसे उनकी इच्छा के अनुसार चलने का प्रयास करना चाहिए। व्यक्ति को दूसरों की निंदा करने से बचना चाहिए और यदि कोई उसकी आलोचना करता है, तो उसका सामना धैर्य और सहनशीलता के साथ करना चाहिए।
उन्होंने समझाया कि जीवन में आलोचना और अपमान जैसी परिस्थितियों में भी मन को शांत रखना जरूरी है। किसी की निंदा का जवाब निंदा से देने के बजाय मुस्कुराकर उसे सहन करना चाहिए। इसे भगवान की कृपा मानकर अपने व्यवहार को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
सुख-दुख और सम्मान-अपमान में मन स्थिर रखें:
संत प्रेमानंद महाराज ने कहा कि जीवन में सुख और दुख, सम्मान और अपमान जैसी परिस्थितियां आती रहती हैं। ऐसे समय में व्यक्ति को अपने मन को स्थिर रखने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने भक्तों को विपरीत परिस्थितियों में निराश होने के बजाय धैर्य और संयम बनाए रखने की सीख दी।
उनके अनुसार, भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने वाले व्यक्ति के लिए श्रद्धा और विश्वास बनाए रखना जरूरी है। परेशानी आने पर भगवान के प्रति आस्था कम नहीं होनी चाहिए। आलोचना और तिरस्कार का सामना करते हुए भी अपने आचरण में विनम्रता बनाए रखनी चाहिए।
दूसरों की आलोचना के बजाय अपने व्यवहार पर ध्यान दें:
प्रेमानंद महाराज ने श्रद्धालुओं को समझाया कि बड़ी से बड़ी परेशानी का सामना मजबूती से करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति आलोचना करता है, तो उसके जवाब में वैसा ही व्यवहार करने से बचना चाहिए। अपमान सहने और संयम बनाए रखने से व्यक्ति को अपने भीतर झांकने तथा अभिमान कम करने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि दूसरों की कमियां निकालने के बजाय अपने व्यवहार को सुधारने का प्रयास करना चाहिए। धैर्य, सहनशीलता और भगवान के प्रति विश्वास बनाए रखना ही भक्ति के मार्ग में महत्वपूर्ण है।
शिष्य की मौत के बाद चर्चा में आया केली कुंज आश्रम:
पिछले महीने केली कुंज आश्रम से जुड़े शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत का मामला चर्चा में आया था। दी गई जानकारी के अनुसार, 25 सितंबर को उन्होंने आश्रम की इमारत की चौथी मंजिल से कूदकर जान दे दी थी। अगले दिन 26 सितंबर को यमुना किनारे उनका अंतिम संस्कार किया गया था।
रसिक दुलारी शरण मूल रूप से मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले थे। बताया गया कि वह करीब दो साल पहले वृंदावन आए थे और प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेने के बाद उन्होंने अपना नाम दीपक लोधी से बदलकर रसिक दुलारी शरण रख लिया था। घटना के बाद उनकी मां ने आरोप लगाया था कि उन्हें अपने बेटे से मिलने नहीं दिया जाता था। ये आरोप परिवार की ओर से लगाए गए थे।
बेटे की तलाश में आश्रम के बाहर धरने पर बैठा था परिवार:
2 अक्टूबर को हाथरस के एक परिवार ने केली कुंज आश्रम के बाहर करीब सात घंटे तक धरना दिया था। परिवार का आरोप था कि उनके बेटे अनुज चौधरी ने तीन महीने पहले आश्रम में प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली थी, लेकिन उसके बाद वह घर नहीं लौटा।
मामले में अधिकारियों की ओर से अनुज को तलाशने का आश्वासन दिए जाने के बाद परिवार अपने गांव बारामई खेड़ा लौट गया था। इसके अगले दिन, 3 अक्टूबर को पुलिस ने अनुज को बरसाना के एक आश्रम से बरामद किया। इसके बाद उसे हाथरस ले जाकर परिवार को सौंप दिया गया था।
विराट कोहली को पांच करोड़ रुपये देने का दावा:
केली कुंज आश्रम को लेकर चर्चा के बीच फलाहारी महाराज दिनेश शर्मा ने विराट कोहली (Virat Kohli) को आश्रम बुलाने के संबंध में दावा किया था। 5 अक्टूबर को श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष फलाहारी महाराज ने प्रेमानंद महाराज को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि उनकी टीम से जुड़े एक साधु गुट ने विराट कोहली को पांच करोड़ रुपये देकर दर्शन के लिए बुलाया था, ताकि महाराज को प्रसिद्धि दिलाई जा सके।
हालांकि, विराट कोहली के प्रवक्ता ने 7 अक्टूबर को इन आरोपों को झूठा, निराधार और तथ्यहीन बताया था। प्रवक्ता के अनुसार, कोहली प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए गहरी श्रद्धा और सम्मान के कारण आश्रम जाते हैं। इस तरह आश्रम से जुड़े अलग-अलग मामलों के बीच प्रेमानंद महाराज का धैर्य, सहनशीलता और निंदा का सामना करने संबंधी संदेश सामने आया है।
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