लोकसभा में मंगलवार को Public Examination (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 (पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026) पर चर्चा शुरू हुई। दोपहर 2 बजे से शुरू हुई बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक के मुद्दे पर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। केंद्र सरकार ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य वर्ष 2024 में बने कानून को और प्रभावी बनाना है, जबकि विपक्ष ने इसे पर्याप्त नहीं बताते हुए सरकार की मंशा और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
सरकार ने कानून को और मजबूत बनाने की बात कही:
केंद्रीय राज्य मंत्री Jitendra Singh (जितेंद्र सिंह) ने सदन में कहा कि हाल के घटनाक्रम को देखते हुए वर्ष 2024 में बनाए गए कानून को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता महसूस हुई। उन्होंने कहा कि यह संशोधन छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के उद्देश्य से लाया गया है तथा इससे परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 1992 और 2010 में परीक्षा सुधार को लेकर कई सिफारिशें की गई थीं, लेकिन उस समय उन पर अमल नहीं किया गया। उनके अनुसार, सरकार की नीति स्पष्ट और ईमानदार है तथा यह संशोधन उसी दिशा में एक प्रयास है।
विपक्ष ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल:
Congress (कांग्रेस) सांसद Gaurav Gogoi (गौरव गोगोई) ने चर्चा के दौरान कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार नहीं करना चाहती और यह विधेयक केवल दिखावे का प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2024 में कानून लागू होने के बावजूद वर्ष 2026 में भी पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं, जिससे कानून की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा केंद्रों और अन्य व्यवस्थाओं पर गंभीरता से काम किए जाने की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) के अधिकारियों को लेकर भी सवाल उठाए और पूछा कि कुछ पदों पर बदलाव किए गए, जबकि अन्य जिम्मेदार पदों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली पर भी हुई बहस:
बहस के दौरान Gaurav Gogoi (गौरव गोगोई) ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सुधार की जरूरत है। उन्होंने विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और छात्रों से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2024 के मामले में गिरफ्तार आरोपियों में अधिकांश को जमानत मिल चुकी है, जिससे जांच और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर भी चर्चा जरूरी है।
दूसरी ओर Jitendra Singh (जितेंद्र सिंह) ने कहा कि सरकार द्वारा गठित समिति की अधिकांश सिफारिशों को लागू किया जा चुका है और यह संशोधन भी उसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य से किसी प्रकार का समझौता नहीं करना चाहती।
चर्चा के समय को बढ़ाने पर बनी सहमति:
लोकसभा अध्यक्ष Om Birla (ओम बिरला) ने शुरुआत में इस विधेयक पर चर्चा के लिए छह घंटे का समय निर्धारित किया था। बाद में संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju (किरण रिजिजू) ने बताया कि सभी प्रमुख राजनीतिक दलों से बातचीत के बाद चर्चा का समय बढ़ाकर आठ घंटे करने पर सहमति बन गई है।
उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो सरकार इस महत्वपूर्ण विधेयक पर दस घंटे तक चर्चा कराने के लिए भी तैयार है, ताकि सभी दल अपने विचार विस्तार से सदन के सामने रख सकें।
पेपर लीक रोकने पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने:
विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार ने दोहराया कि संशोधन का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाना और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना है। वहीं विपक्ष का कहना है कि केवल कानून में संशोधन पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की भी आवश्यकता है। इस मुद्दे पर सदन में विस्तृत चर्चा जारी रही।
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