लखनऊ में खाली प्लाट बने बीमारी का अड्डा, मच्छरों से बढ़ा खतरा

रिपोर्ट: सऊद अंसारी

Lucknow: लखनऊ में बरसात का मौसम लोगों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। शहर में फैले खाली प्लाट अब डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के प्रजनन केंद्र बन गए हैं। बीस साल पहले आशियाना बनाने या निवेश के लिए खरीदे गए ये भूखंड अब लोगों के लिए खतरा साबित हो रहे हैं। इन प्लाटों में बारिश का पानी भर जाने और कूड़ा-करकट जमा होने से मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे आसपास के इलाकों के लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।


खाली भूखंडों में मच्छरों का डेरा

इन खाली पड़े प्लाटों में लंबे समय से कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ। बारिश के बाद इन स्थानों पर जलभराव और गंदगी के कारण हालात और बिगड़ गए हैं। यही वजह है कि यह भूखंड अब मच्छरों की नर्सरी बन गए हैं। खसरा, डेंगू और मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारियों का खतरा यहां रहने वालों पर लगातार मंडरा रहा है।

फैजुल्लागंज में बिगड़े हालात

फैजुल्लागंज क्षेत्र की मामा कॉलोनी में स्थिति और गंभीर हो गई है। यहां गंदगी और मच्छरों के काटने से आठ लोग तेज बुखार की चपेट में आ चुके हैं। लोगों का कहना है कि खाली भूखंडों में जमा पानी और कूड़ा उनकी सेहत के लिए अभिशाप बन गया है।


नियमों का पालन कराने में नाकाम अधिकारी

लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) और आवास विकास परिषद के नियमों के अनुसार खरीदे गए भूखंडों पर तय समय सीमा में निर्माण कार्य किया जाना चाहिए। लेकिन हकीकत यह है कि अधिकारी इस नियम को लागू कराने में असफल रहे हैं। गोमतीनगर और वृंदावन कॉलोनी में तो कई प्रभावशाली लोगों के खाली भूखंड सांप और बिच्छुओं का बसेरा बन चुके हैं।


नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट

बारिश के बाद जब नगर निगम ने शहर में खाली भूखंडों का सर्वे कराया, तो चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया। सर्वे के मुताबिक, लखनऊ में कुल 18,220 खाली भूखंड पाए गए हैं। इनमें से सबसे ज्यादा भूखंड गोमतीनगर क्षेत्र में हैं, जहां उनकी संख्या 4,175 है। वहीं, इंदिरानगर और विकास नगर में 3,408 भूखंड मिले हैं। रायबरेली रोड पर यह संख्या करीब 3,500 के आसपास है।


बढ़ते खतरे से परेशान लोग

खाली प्लाटों के कारण फैली गंदगी और बीमारियों से लोग परेशान हैं। आसपास के निवासियों का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही उनकी सेहत पर भारी पड़ रही है। यदि समय रहते इन भूखंडों की सफाई और समुचित कार्रवाई नहीं की गई, तो हालात और ज्यादा गंभीर हो सकते हैं।


👉 यह समस्या सिर्फ साफ-सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के स्वास्थ्य ढांचे के लिए भी चुनौती बन गई है। प्रशासन को अब सख्ती दिखानी होगी, तभी लोगों को इन बीमारियों के प्रकोप से राहत मिल पाएगी।

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