राजनीति की रणनीति, बिगड़ रही विकास की निति । सत्ता की चाह में क्या चुन लिया गलत राह? गाजीपुर की राजनीति में भूचाल, पंचायत में न्याय का “सपना” और बन रहा सपनों का आधार? अब जनता कैसे करे विचार, सपनों की जीत या न्याय की हार ?
उत्तर प्रदेश के जनपद गाजीपुर की राजनीति में एक ऐसे सीट को लेकर भूचाल आ चूका है जिसका योगदान जनपद के विकास में बेहद महत्वपूर्ण है लेकिन उस सीट को पाने के लिए जिस गणित का इस्तेमाल किया जाता है उसके फार्मूले पर ही गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं.
अब इस परीक्षा के परीक्षार्थी आमने सामने हैं एक किसी भी हाल में फेल नहीं होना चाहता और एक कहता है कि फेल करो या पास लेकिन जनता के लिए गलत उदहारण पेश न करो. आरोप है कि एक परीक्षार्थी के लिए फार्मूला के साथ ही खेल हो गया.
जी हाँ बात हो रही है गाजीपुर जिला पंचायत अध्यक्ष के कुर्सी की …
ये कहानी शुरू होती है त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2021 से. जनपद गाजीपुर की सैदपुर प्रथम सीट पर दो कद्दावर उम्मीदवार खड़े थे. एक पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह पत्नी अंजना सिंह थी तो दूसरी तरफ भाजपा एमएलसी विशाल सिंह चंचल की रिश्तेदार सपना सिंह. मुकाबला कड़ा था. दो – तीन मई को फैसला आया. पहले खबर आई कि राधेमोहन सिंह की पत्नी अंजना सिंह को 9728 मत मिले हैं और वो 470 मतों से विजयी हो गयी, लेकिन मतगणना में फैसला कुछ और ही था. खबर आई कि सपना सिंह 31 मतों से विजयी हो गयी. अब क्या था, नियम कानून को ध्यान में रखते हुए अंजना सिंह ने 7 जून 2021 को जिला जज की कोर्ट में याचिका दायर कर दी. अब मामला कोर्ट में था.
चूँकि सपना सिंह निर्दल प्रत्यासी थी और भाजपा कई वर्षों बाद गाजीपुर जिला पंचायत में सत्ता की तलाश कर रही थी. चूँकि सपना सिंह, भाजपा एमएलसी विशाल सिंह चंचल की रिश्तेदार थी, लिहाजा उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की, वो बात अलग है कि अब विशाल सिंह चंचल और सपना सिंह के बिच खटपट की खबर आती रहती है. खैर फिर मानक के अनुरूप सदस्यों का साथ मिला और बन गयी जिला पंचायत अध्यक्ष. वो बात अलग है कि इस बिच ये भी आरोप लगा कि बहुत सारे जिला पंचायत सदस्य जो सपा के सहयोग से जीते थे वो सपना सिंह के साथ चल दिए. और अब पंकज सिंह जो कि सपना सिंह के पति हैं उन्होंने भी मोर्चा संभल लिया.
खैर अभी मामला कोर्ट में था ऐसे में सवाल ये भी उठा कि जब मामला कोर्ट में है तो ऐसे में सपना सिंह को अध्यक्ष कैसे बनाया जा सकता है? हालांकि पोषणीयता के बिंदु पर 22 अप्रैल 2022 को याचिका खारिज कर दी गई। इसके बाद अंजना सिंह हाईकोर्ट की शरण में गई।
इस बिच सपना सिंह के ऊपर आरोप भी लगे, विकास कार्यों में हेरा फेरी के आरोप लगे, दुसरे दल के नेताओं से मिलकर सत्ता को बचाए रखने के आरोप लगे और हर बार मोर्चा उनके पति पंकज सिंह ने संभाला. इस बिच हाई कोर्ट से आदेश होने के बाद अपर जिला जज प्रथम की कोर्ट में विचारण की कार्यवाही शुरू हुई। दोनों पक्षों की तरफ से साक्ष्य और गवाह पेश किए गए। 13 दिसंबर 2023 को दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने बहस पूरी कर ली। इसके बाद न्यायालय ने फैसले के लिए पत्रावली सुरक्षित कर ली।
न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि याचिका में दिए गए कथन साबित करने में अंजना सिंह पूरी तरह विफल रहीं और वह किसी तरह का अनुतोष प्राप्त करने की अधिकारी नहीं हैं। उनकी याचिका सव्यय खारिज की जाती है। जिला शासकीय अधिवक्ता सिविल अजय कुमार पाठक ने सपना सिंह की तरफ से पैरवी की।
अब क्या था सपना सिंह और उनके समर्थक ख़ुशी मनाने लगे और पंकज सिंह ने प्रेस वार्ता कर बयानबाजियां भी कर दी, जिसको लेकर सवाल तो खड़े होने ही थे.
एक तरफ मतगणना में हेरा फेरी का आरोप, दूसरी तरफ दुसरे दल के सदस्यों का साथ लेने का आरोप , अब ये साथ लाभ देकर लिया गया था या फिर उनका दिल पसीज गया था, ये अलग विषय है, खैर तीसरी तरफ मामला कोर्ट में होने के बावजूद जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने का आरोप. 2.5 साल का वक़्त बीत गया और अब इतने सारे आरोप, क्या सही और क्या गलत? ये पता नहीं, लेकिन अब अंजना सिंह ने हाई कोर्ट जाने का मन तो बना लिया है…
