गाजीपुर (Ghazipur) में न्यायालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को परखने के लिए पुलिस ने व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया। अपर पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में हुई इस अभ्यास प्रक्रिया में पुलिस, पीएसी, एलआईयू, अग्निशमन विभाग, डॉग स्क्वॉड, एंटी सैबोटॉज चेक टीम और स्वाट टीम समेत विभिन्न सुरक्षा इकाइयों ने हिस्सा लिया। मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षा बलों की तैयारियों और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को परखना रहा।
संदिग्ध वस्तु मिलने की सूचना पर सक्रिय हुई पुलिस:
मॉक ड्रिल के दौरान न्यायालय परिसर में संदिग्ध वस्तु मिलने की काल्पनिक सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस टीमों ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। पूरे परिसर की घेराबंदी कर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का अभ्यास किया गया। साथ ही परिसर में मौजूद आमजन को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की प्रक्रिया भी दोहराई गई।
इस अभ्यास के माध्यम से यह परखा गया कि किसी संभावित आपात स्थिति में पुलिस और अन्य सुरक्षा इकाइयां कितनी तेजी से मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई कर सकती हैं। सुरक्षा व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से सक्रिय करने का भी अभ्यास किया गया।
डॉग स्क्वॉड और एंटी सैबोटॉज टीम ने की जांच:
मॉक ड्रिल के दौरान एलआईयू, डॉग स्क्वॉड और एंटी सैबोटॉज चेक टीम ने न्यायालय परिसर के संवेदनशील और छिपे हुए स्थानों की गहन जांच की। टीमों ने उपलब्ध अत्याधुनिक उपकरणों के साथ संदिग्ध स्थानों की जांच करने की प्रक्रिया का अभ्यास किया।
सुरक्षा इकाइयों की ओर से परिसर के अलग-अलग हिस्सों को जांच के दायरे में लिया गया। इस दौरान संभावित खतरे की स्थिति में अपनाई जाने वाली सुरक्षा प्रक्रिया को परखा गया, ताकि वास्तविक आपात स्थिति में कार्रवाई के दौरान किसी तरह की कमी न रहे।
स्वाट टीम ने किया त्वरित प्रतिक्रिया अभ्यास:
मॉक ड्रिल में स्वाट टीम ने भी हिस्सा लिया। टीम ने संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया और तलाशी अभियान चलाने का अभ्यास किया। किसी भी संभावित आपात स्थिति में तेजी से कार्रवाई करने के लिए सुरक्षा बलों के बीच तालमेल की प्रक्रिया को भी परखा गया।
अभ्यास के दौरान विभिन्न सुरक्षा इकाइयों ने अपनी-अपनी जिम्मेदारियों के अनुरूप कार्रवाई की। इसका उद्देश्य आपात स्थिति में एक-दूसरे के साथ समन्वय बनाकर प्रभावी तरीके से कार्रवाई करने की क्षमता को मजबूत करना रहा।
अग्निशमन टीम ने राहत-बचाव का किया अभ्यास:
मॉक ड्रिल में अग्निशमन विभाग की टीम भी शामिल रही। किसी आपात स्थिति में आग लगने या अन्य आपदा की स्थिति से निपटने के लिए टीम ने राहत और बचाव कार्य का प्रदर्शन किया।
न्यायालय परिसर जैसे संवेदनशील स्थान पर किसी भी प्रकार की आपदा की स्थिति में तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू करने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया। इससे सुरक्षा व्यवस्था में शामिल अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय को परखने का अवसर मिला।
सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर:
अपर पुलिस अधीक्षक नगर ने बताया कि न्यायालय परिसर जैसे संवेदनशील स्थलों की सुरक्षा पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि मॉक ड्रिल का उद्देश्य सुरक्षा एजेंसियों की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को परखना और विभिन्न इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है।
उन्होंने बताया कि इस तरह के अभ्यास के माध्यम से किसी भी आपात स्थिति में प्रभावी ढंग से कार्रवाई करने की तैयारियों को परखा जाता है। मॉक ड्रिल के दौरान पुलिस और अन्य सुरक्षा इकाइयों ने आपात स्थिति से निपटने के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का अभ्यास किया।
आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों की हुई जांच:
गाजीपुर न्यायालय परिसर में आयोजित इस मॉक ड्रिल के दौरान सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं को परखा गया। संदिग्ध वस्तु मिलने की सूचना से लेकर परिसर की घेराबंदी, आमजन को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने, संवेदनशील स्थानों की जांच और राहत-बचाव कार्य तक अलग-अलग प्रक्रियाओं का अभ्यास किया गया।
इस दौरान पुलिस, पीएसी, एलआईयू, अग्निशमन विभाग, डॉग स्क्वॉड, एंटी सैबोटॉज चेक टीम और स्वाट टीम ने समन्वय के साथ अपनी भूमिका निभाई। मॉक ड्रिल के जरिए न्यायालय परिसर की सुरक्षा को लेकर तैयारियों और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की क्षमता को परखा गया।
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गाज़ीपुर ब्यूरो: हसीन अंसारी
