ईरान (Iran) के एक सुरक्षा अधिकारी ने अमेरिका (America) और इजराइल (Israel) को लेकर कड़ा बयान दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव की स्थिति चर्चा में आ गई है। अधिकारी ने कहा कि दोनों देशों के लिए एक बड़ा “सरप्राइज” तैयार है, जिसके लिए उन्हें थोड़ा इंतजार करना होगा। इस बयान के बाद वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
अमेरिका-इजराइल को दी सख्त चेतावनी:
फार्स न्यूज एजेंसी (Fars News Agency) के हवाले से सामने आए बयान में ईरानी अधिकारी ने अमेरिकी आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि पुलों पर हमले की धमकियां केवल बयानबाजी हैं। उन्होंने इन बयानों को अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की विफलता से जोड़ते हुए कहा कि इस तरह की भाषा वास्तविक स्थिति को छिपाने का प्रयास है।
ईरान का तीखा रुख बरकरार:
ईरान के अन्य अधिकारियों ने भी कहा है कि यदि उनके खिलाफ हमलों में वृद्धि होती है, तो अमेरिका को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। खातम अल-अनबिया (Khatam al-Anbiya) के प्रवक्ता इब्राहिम जुल्फागारी (Ebrahim Zolfaghari) ने कहा कि ईरान को कमजोर करने का प्रयास अब एक “दलदल” बन गया है, जिसमें विरोधी देश खुद फंसते जा रहे हैं।
अमेरिकी रेस्क्यू ऑपरेशन का दावा:
इसी बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने दावा किया कि ईरान में लापता एक अमेरिकी एयरमैन को सुरक्षित बचा लिया गया है। उनके अनुसार, यह अधिकारी एफ-15ई लड़ाकू विमान (F-15E Fighter Jet) से जुड़ा था और एक मिशन के दौरान लापता हो गया था। ट्रम्प ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन को अमेरिकी सेना के सबसे साहसी अभियानों में से एक बताया।
दो एयरमैन को सुरक्षित निकालने का दावा:
बताया गया कि इस मिशन के दौरान एक और अमेरिकी पायलट को भी सुरक्षित निकाला गया था। दूसरे ऑपरेशन को गोपनीय रखा गया, ताकि सुरक्षा से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक न हो और किसी प्रकार का खतरा न उत्पन्न हो।
होर्मुज को लेकर अल्टीमेटम ठुकराया:
ईरान ने ट्रम्प द्वारा दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम को भी खारिज कर दिया है। अमेरिकी पक्ष ने होर्मुज (Hormuz) जलडमरूमध्य को खोलने या समझौते की बात कही थी। ईरानी सेना ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका दबाव की रणनीति अपना रहा है और इस तरह की धमकियां उसकी असहज स्थिति को दर्शाती हैं।
तनाव के बीच बढ़ी सतर्कता:
इन घटनाओं के बाद क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सतर्कता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयानों और घटनाओं से अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर प्रभाव पड़ सकता है और स्थिति को संभालने के लिए कूटनीतिक प्रयास जरूरी हैं।
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