जीएसटी घटा या बढ़ा बोझ? भट्ठा संचालकों का दर्द
रिपोर्टर : प्रदीप शर्मा
(गाजीपुर)। केंद्र सरकार के द्वारा जीएसटी (GST) के दो स्लैब — 5% और 18% — लागू करने के दावे के बावजूद, ईट भट्ठा उद्योग की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। भट्ठा संचालक अब भी 6% और 12% जीएसटी का भुगतान करने को मजबूर हैं। इसी समस्या को लेकर गाजीपुर में ईट भट्ठा समिति की ओर से वार्षिक सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें जीएसटी विभाग के अधिकारी भी शामिल हुए और भट्ठा संचालकों की समस्याओं को सुना गया।
भट्ठा संचालकों ने रखी अपनी समस्याएं:
सम्मेलन के दौरान संचालकों ने बताया कि ईट भट्ठा चलाने में सिर्फ जीएसटी ही नहीं, बल्कि कई अन्य तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार के टैक्स घटाने के दावे ज़मीनी स्तर पर असर नहीं दिखा पा रहे हैं। ईट भट्ठा समिति के महामंत्री रजनीकांत राय ने कहा कि जिला पंचायत प्रशासन द्वारा अवैध रूप से भट्ठा संचालकों से डिमांड की जा रही है, जिससे उद्योग पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है।
सरकारी दावे और जमीनी हकीकत में अंतर:
रजनीकांत राय ने बताया कि सरकार की ओर से यह दावा किया गया है कि 12% का जीएसटी स्लैब हटा दिया गया है, लेकिन वास्तविकता यह है कि आज भी ईट भट्ठा उद्योग पर वही स्लैब लागू है। उन्होंने कहा कि सरकार और विभागीय अधिकारियों से इस मुद्दे पर कई बार वार्ता की गई है। मंत्री सुरेश खन्ना, जीएसटी कमिश्नर और प्रमुख सचिव से भी संगठन के माध्यम से मुलाकात की जा चुकी है, लेकिन अब तक किसी ठोस समाधान की उम्मीद नहीं दिखी है।
आम जनता पर भी असर:
ईट भट्ठा उद्योग की इन समस्याओं का असर आम लोगों तक पहुंच रहा है। आज के समय में जब लोग अपने सपनों का घर बनाने की योजना बनाते हैं, तो उन्हें ईट की बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ता है। जीएसटी की दरों में कोई ठोस राहत न मिलने के कारण ईट के दामों में भी कोई कमी नहीं आई है, जिससे निर्माण कार्यों की लागत लगातार बढ़ रही है।
स्थानीय उद्योग को चाहिए नीति समर्थन:
भट्ठा संचालकों ने यह भी कहा कि सरकार को इस उद्योग की वास्तविक चुनौतियों को समझते हुए एक स्थायी नीति बनानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर टैक्स व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो ईट भट्ठा उद्योग धीरे-धीरे बंद होने की कगार पर पहुंच सकता है, जिससे रोजगार पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।
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