गोरखालैंड मुद्दे पर बढ़ी हलचल, दार्जिलिंग में अमित शाह की बैठक के बाद बनी खास कमेटी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में गोरखा नेताओं, पश्चिम बंगाल सरकार और अन्य संबंधित पक्षों की बैठक के बाद गोरखा मुद्दे के स्थायी राजनीतिक समाधान की दिशा में एक अहम पहल सामने आई है। भाजपा सांसद राजू बिस्टा के अनुसार, गृह मंत्रालय ने मध्यस्थ पंकज कुमार सिंह के नेतृत्व में एक समिति गठित की है। यह समिति बैठक में बनी सहमति के आधार पर अंतिम समझौते का मसौदा तैयार करेगी। 1988 के गोरखा समझौते की वर्षगांठ के दिन हुई इस बैठक को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्थायी समाधान के लिए समिति का गठन:
गृह मंत्री अमित शाह के उत्तर बंगाल दौरे के तीसरे और अंतिम दिन दार्जिलिंग की तलहटी में स्थित सुकना के एक होटल में यह बैठक आयोजित हुई। बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, पहाड़ी क्षेत्रों की विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेता और अन्य संबंधित पक्षों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
भाजपा सांसद राजू बिस्टा ने बताया कि गृह मंत्रालय के तहत मध्यस्थ पंकज कुमार सिंह के नेतृत्व में समिति का गठन किया गया है। समिति बैठक के दौरान बनी सहमति और सामने आए विषयों के आधार पर समझौते के मसौदे को अंतिम रूप देने का काम करेगी।
पंकज कुमार सिंह को मिली अहम जिम्मेदारी:
गृह मंत्रालय ने अक्टूबर 2025 में सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी और पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज कुमार सिंह को इस मुद्दे के लिए आधिकारिक सरकारी मध्यस्थ नियुक्त किया था। उनकी भूमिका राजनीतिक बातचीत को आगे बढ़ाने और गोरखा समुदाय से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों के समाधान की दिशा में काम करने पर केंद्रित है।
अब समिति के गठन के बाद इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी पंकज कुमार सिंह के नेतृत्व वाली समिति के पास होगी। बैठक में बनी सहमति के आधार पर अंतिम समझौते का मसौदा तैयार किया जाना प्रस्तावित है।
1988 के समझौते की वर्षगांठ पर हुई बैठक:
दार्जिलिंग के सांसद राजू बिस्टा के अनुसार, शनिवार को हुई बैठक की तारीख भी महत्वपूर्ण रही। बैठक ऐसे दिन हुई, जो 1988 में हुए गोरखा समझौते पर हस्ताक्षर की तारीख से मेल खाती है।
केंद्र सरकार, पश्चिम बंगाल सरकार और गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (GNLF) के बीच हुए उस समझौते के बाद गोरखालैंड के अलग राज्य की मांग को लेकर चले आंदोलन के बीच दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल (DGHC) का गठन किया गया था।
चार दशक से ज्यादा पुराने संघर्ष का मुद्दा:
राजू बिस्टा ने पहाड़ी समुदायों के संघर्ष को चार दशक से अधिक पुराना बताया। उन्होंने पिछली वामपंथी और टीएमसी सरकारों पर पहाड़ी लोगों की आकांक्षाओं को दबाने का आरोप लगाया।
बिस्टा ने अपने बयान में संघर्ष के दौरान करीब 2,000 लोगों की शहादत, 5,000 से अधिक लोगों के विस्थापन और महिलाओं के साथ अत्याचार तथा बलात्कार का भी उल्लेख किया।
बैठक में सभी पक्षों ने रखी अपनी बात:
राजू बिस्टा के मुताबिक, बैठक के दौरान विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों ने अपनी चिंताओं, मांगों और अपेक्षाओं को सामने रखा। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भी पहाड़ी क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों के समाधान को लेकर अपनी सरकार की सोच और योजनाओं की जानकारी दी।
सांसद के अनुसार, सभी संबंधित पक्षों की बात सुनने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक का समापन किया और आने वाले समय में इस मुद्दे के स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी।
संवैधानिक दायरे में समाधान पर जोर:
बैठक में दार्जिलिंग की पहाड़ियों से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों का संविधान के दायरे में रहते हुए स्थायी राजनीतिक समाधान तलाशने के एजेंडे पर चर्चा हुई। इस पहल को चुनाव से पहले पहाड़ी क्षेत्रों के मुद्दों के समाधान को लेकर किए गए भाजपा के वादे से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
बैठक में कई प्रमुख नेता रहे मौजूद:
बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के अलावा गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (GJM) प्रमुख बिमल गुरुंग, पार्टी के वरिष्ठ नेता रोशन गिरी, गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (GNLF) प्रमुख मान घिसिंग, राज्य सरकार के कई मंत्री, पहाड़ी क्षेत्रों से भाजपा के विधायक और पश्चिम बंगाल सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
समिति के गठन के साथ ही गोरखा मुद्दे के स्थायी राजनीतिक समाधान को लेकर आगे की प्रक्रिया शुरू होने की बात सामने आई है। अब समिति बैठक में बनी सहमति के आधार पर समझौते के मसौदे को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेगी।
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